CBI ने 15,000 करोड़ के बाइक बोट घोटाले का किया खुलासा, यूपी फर्म और प्रमोटर के खिलाफ केस दर्ज

CBI ने 15,000 करोड़ के बाइक बोट घोटाले का किया खुलासा, यूपी फर्म और प्रमोटर के खिलाफ केस दर्ज

नई दिल्ली, 01 नवंबर: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 15,000 करोड़ रुपये के बाइक बोट घोटाले का खुलासा किया है और इसकी जांच के लिए केस भी दर्ज किया है। 15,000 करोड़ रुपये का बाइक बोट घोटाला हीरा व्यापारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़े पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले से भी बड़ा निकला है। सीबीआई ने प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश स्थित बाइक बोट के मुख्य प्रबंध निदेशक (चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर) संजय भाटी ने 14 अन्य लोगों के साथ मिलकर देश भर में निवेशकों से करीब 15,000 करोड़ रुपये ठगे हैं।

BIKE BOT

जानें क्या है पूरा मामला?

कथित बाइक बोट घोटाले में आरोपी ने बाइक बोट के नाम से बाइक-टैक्सी सर्विस की आड़ में कथित रूप से अत्यधिक आकर्षक निवेश योजनाएं बनाई थीं, जिसमें एक ग्राहक एक, तीन, पांच या सात बाइक में निवेश कर सकता था। इन बाइकों का रख-रखाव और संचालन कंपनी द्वारा किया जाता था। निवेशक को बाइक के लिए मासिक किराया, ईएमआई और बोनस (एकाधिक बाइक में निवेश के मामले में) इत्यादि दिया जाता था। इन सब आर्कषक ऑफर को दिखाकर निवेशकों को जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।

सीबीआई ने अपनी शिकायत में क्या-क्या कहा?

कंपनी ने अपने प्लान के तहत कथित तौर पर विभिन्न शहरों में फ्रेंचाइजी आवंटित की लेकिन इन शहरों में बाइक और टैक्सियों का संचालन मुश्किल से होता था। अगस्त 2017 में योजनाएं शुरू की गईं और निवेशकों, ग्राहकों से धन का संग्रह और उनके लिए पुनर्भुगतान 2019 की शुरुआत तक जारी रहा।

सीबीआई की प्राथमिकी में आगे लिखा है, गलत मंशा से निवेशकों से पैसे निकालने के लिए कंपनी ने विज्ञापन दिया कि 'BIKE BOT - THE BIKE TAXI POWERED BY GIPL'योजना द्वारा संचालित बाइक टैक्सी बहुत जल्द संलग्न होगी और योजना का लाभ उठाने के इच्छुक व्यक्ति को जल्दी से पैसा जमा करना होगा'।

नवंबर 2018 से शुरू हुआ घोटाले का खेल

नवंबर 2018 में, कंपनी ने ई-बाइक के लिए एक बाइक बोट स्कीम लॉन्च की। ई-बाइक की सदस्यता राशि नियमित पेट्रोल बाइक के लिए निवेश राशि से लगभग दोगुनी थी। यानी स्कीम के तहत बाइक टैक्सी शुरू की गई। निवेशकों से इस स्कीम में एक व्यक्ति से एक मुश्त 62200 रुपये का निवेश कराया गया। इसके बदले में कंपनी ने वादा किया कि एक साल तक 9765 रुपये मिलेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और निवेशकों के पैसे लेकर संचालक फराक हो गया था।

इस तरह के विज्ञापन पर, लगभग 2,00,000 निवेशकों ने पैसा लगाया। लेकिन सच्चाई ये है कि इसके बाद लोगों को जब लगा कि उनके साथ धोखा हुआ है तो उन्होंने पुलिस में शिकायतें कीं। कंपनी की धोखाधड़ी गतिविधि नोएडा जिला प्राधिकरण के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों के सामने भी आ गई थीं।''

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि पूर्व नियोजित साजिश के तहत संजय भाटी और उसके सहयोगियों ने निवेशकों को ठगा और कारोबार के नाम पर देश भर से कम से कम 15,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड (कंपनी का नाम) के प्रमोटर संजय भाटी और अन्य के खिलाफ गौतमबुद्धनगर के दादरी पुलिस स्टेशन में दर्ज विभिन्न प्राथमिकी के आधार पर बाइक बॉट घोटाले में मनी-लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की थी। वित्तीय जांच एजेंसी ने इस मामले में 216 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति भी कुर्क की है।

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