'नजरें चार हुई होंगी लेकिन ये प्रेम...', शहीद कैप्टन अंशुमान के पिता ने अब बहू स्मृति के 'प्यार' पर उठाया सवाल
Captain Anshuman Singh Parents: कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के परिवार को लेकर खूब चर्चा की जा रही है। उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले अंशुमान सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह और माता मंजू देवी ने अपनी विधवा बहू स्मृति सिंह पर कई आरोप लगाए हैं।
कैप्टन अंशुमान सिंह के माता-पिता का दावा है कि उनकी बहू स्मृति वीरता पुरस्कार के साथ-साथ उनके बेटे के फोटो एलबम, कपड़े और अन्य यादें लेकर पंजाब के गुरदासपुर स्थित अपने घर चली गई हैं। अंशुमान सिंह के पिता ने कई मीडिया चैनलों से बात कर बताया है कि उन्हें अपनी बहू से समाजिक तौर पर दिक्कत है। अब उन्होंने स्मृति सिंह और अपने बेटे अंशुमान सिंह के प्रेम कहानी पर प्रतिक्रिया दी है।

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कैप्टन अंशुमान सिंह और स्मृति की लव स्टोरी पर क्या बोले शहीद के पिता
शहीद कैप्टन अंशुमान के पिता रवि प्रताप सिंह ने बेटे और स्मृति सिंह की लव मैरिज शादी पर कहा,
''देखिए जब हमारा बेटा (अंशुमान सिंह) इंजीनियरिंग करने के लिए गया था, NIT जलंधर में, उसी वक्त वह भी (स्मृति) वहां सिविल इंजीनियर बनने के लिए भी वह वहां थी...एक महीने के लिए मेरा बेटा वहां था, उसके बाद उसका ऑर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हो गया था। इसी एक महीने के बीच में उनकी नजरें चार हुई होंगी और जैसा वो कह रही हैं, तो प्रेम भी हुआ होगा। लेकिन वो प्रेम उस पराकाष्ठा तक नहीं पहुंचा, जैसा वो कह रही हैं...क्योंकि प्रेम की मर्यादा कुछ और है, और जिस प्रेम की वो परिभाषा दे रही हैं, वो कहीं से भी आदर्श प्रेम नहीं है।''
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रवि प्रताप सिंह ने आगे कहा, ''जब मेरे बेटे ने मुझे कहा था कि शादी करनी है, फिर हमने बड़े धूमधाम से बेटे की शादी करवाई। शादी के पहले हम उनसे मिले थे, उनका स्वाभाव हमें अच्छा लगा था। हमने दहेज लेने से भी मना कर दिया था। हमने दहेज का एक पैसा भी नहीं लिया था नाही मैंने कोई सामान उनसे लिया था।''

कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता बोले- हमारा नंबर भी बहू ने ब्लॉक कर दिया है
रवि प्रताप सिंह ने आगे कहा,
''अंशुमान की पत्नी तेरहवीं के अगले ही दिन चली गई थी। उन्होंने हमारे बेटे का एटीएम और सिमकार्ड तक ब्लॉक कर दिया है। हमारे फोन नंबर भी ब्लॉक कर दिए हैं। हमे आज तक नहीं पता है कि स्मृति ने ऐसा क्यों किया है। अब इसके पीछे असली वजह क्या है, व्यावहारिक तौर पर ये स्मृति ही बता पाएंगी, हमने उनके पिता से कई बार पूछा है, वो कहते हैं, हमें पास्ट लाइफ को भूल जाना चाहिए। वो कहते हैं कि आप लोग ये मत पूछा कीजिए कि, स्मृति कहां है और कैसी है।''

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कैप्टन अंशुमान सिंह बहू के इंटरव्यू पर भी उठाए सवाल
रवि प्रताप सिंह ने बताया, "हमने अंशुमान की सहमति से उसकी शादी स्मृति से कर दी। शादी के बाद वह मेरी बेटी के साथ नोएडा में रहने लगी। 19 जुलाई 2023 को जब हमें अंशुमान की मौत की सूचना मिली तो मैंने उन्हें लखनऊ बुलाया और हम उनके अंतिम संस्कार के लिए गोरखपुर गए। लेकिन तेरहवीं के बाद वह (स्मृति) गुरदासपुर वापस जाने की जिद करने लगी। अगले दिन वह अपनी मां के साथ नोएडा गई और अंशुमान का फोटो एलबम, कपड़े और अन्य सामान अपने साथ ले गई।''
रवि प्रताप सिंह ने यह भी दावा किया कि, ''जो स्मृति कह रही हैं 18 जुलाई 2023 को उन्होंने अंशुमान से रात को फोन पर लंबी बातचीत में आने वाले 50 सालों की प्लानिंग की है, उसमें भी मुझे शक है...शायद वो झूठ बोल रही हैं...क्योंकि उस रात तो स्मृति ज्यादातर वक्त मेरी बेटी के साथ थी...तो पता नहीं उन्होंने कब बात की थी।''
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स्मृति सिंह ने कीर्ति चक्कर लेने के बाद DD न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके और अंशुमान के बीच 18 जुलाई की रात आने वाले 50 सालों में उनका जीवन कैसा होगा, वो घर और बच्चे की प्लानिंग पर बात कर रहे थे। बता दें कि 19 जुलाई 2023 को सियाचिन में कैप्टन डॉक्टर अंशुमान सिंह शहीद हो गए थे।

'कीर्ति चक्र को छू भी नहीं सका'
रवि प्रताप सिंह ने आगे दावा किया कि 5 जुलाई को राष्ट्रपति द्वारा अपने बेटे को दिए गए कीर्ति चक्र को वह हाथ में भी नहीं ले पाए। रवि प्रताप सिंह ने कहा, "जब अंशुमान को कीर्ति चक्र दिया गया, तो उनकी मां और पत्नी सम्मान लेने गईं। राष्ट्रपति ने मेरे बेटे के बलिदान को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया, लेकिन मैं एक बार भी इसे छू नहीं सका।"
पुरस्कार समारोह को याद करते हुए कैप्टन अंशुमान सिंह की मां मंजू ने कहा, "5 जुलाई को मैं स्मृति के साथ राष्ट्रपति भवन में पुरस्कार समारोह में शामिल हुई थी। जब हम समारोह से निकल रहे थे, तो सेना के अधिकारियों के आग्रह पर मैंने एक बार फोटो खिंचवाने के लिए कीर्ति चक्र को हाथ में लिया। लेकिन उसके बाद स्मृति ने मेरे हाथों से कीर्ति चक्र ले लिया।"

रवि प्रताप बहू स्मृति पर लगाए एक और गंभीर आरोप?
रवि प्रताप ने यह भी आरोप लगाया कि जब सरकार ने कैप्टन अंशुमान सिंह की याद में एक प्रतिमा स्थापित करने का फैसला किया, तो उन्होंने स्मृति और उनके पिता को संदेश दिया कि वे कम से कम अनावरण समारोह के लिए कीर्ति चक्र लेकर आएं। रवि प्रताप सिंह ने दावा किया, "लेकिन कोई जवाब नहीं आया।"
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले कैप्टन अंशुमान को मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में उनकी पत्नी स्मृति सिंह और मां मंजू सिंह को यह पुरस्कार प्रदान किया।
अंशुमान सिंह अपने माता-पिता का सबसे बड़ा बेटा था, सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र में एक चिकित्सा अधिकारी के रूप में तैनात था। जुलाई 2024 में एक आग दुर्घटना में गंभीर रूप से जलने और घायल होने के बाद उनकी दुखद मौत हुई थी।
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