Go-LX पर अब ऑनलाइन बिकेगी गाय? गो तस्करों पर कैसे नकेल कसेगा Avimukteshwaranand का ये प्लान? अब तक कितनी हत्या

Avimukteshwaranand Launched Go-LX For Cow Trading: गोहत्या के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रहे ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अब एक नया और व्यावहारिक कदम उठाया है। उन्होंने 'गो-एलएक्स (Go-LX)' नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू करने का ऐलान किया है, जिसके जरिए गायों की खरीद-फरोख्त होगी। इसका मकसद साफ है कि गायों को कसाई के हाथों बिकने से रोकना, पशुपालकों को आर्थिक सहारा देना और गो संरक्षण को नई दिशा देना।

यह प्लेटफॉर्म OLX की तर्ज पर काम करेगा, जहां पशुपालक अपनी गायों का विज्ञापन डाल सकेंगे और गो भक्त-गो सेवक उन्हें खरीदकर संरक्षण दे सकेंगे। स्वामी जी का कहना है कि इससे 'अगर मुसलमान गाय नहीं खरीदेंगे तो हिंदू पशुपालक बर्बाद हो जाएंगे' वाले नैरेटिव को भी तोड़ा जाएगा।

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गो-एलएक्स प्लान क्या है? स्वामी जी ने क्या कहा?

21 मई को जारी एक वीडियो में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने विस्तार से योजना बताई। उन्होंने कहा कि हम एक वेबसाइट बना रहे हैं। इस वेबसाइट के जरिए हम गायों को खरीदेंगे। जो पशुपालक या व्यापारी अपनी गाय बेचना चाहता है, वह वेबसाइट पर विज्ञापन दे सकता है। अगर कोई हिंदू अपनी गाय बेचना चाहता है, तो मुझे बेचे। हम खरीदने के लिए तैयार हैं। हम गायों को कटने नहीं देंगे और किसी गोहत्यारे को गाय खरीदने नहीं देंगे।

स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि वे खासकर उन गायों को खरीदेंगे जो दूध देना बंद कर चुकी हैं या जिन्हें कसाई के हवाले किया जा रहा है। पशुपालक सीधे प्लेटफॉर्म पर अपनी गाय बेच सकेंगे। गो संरक्षण में विश्वास रखने वाले लोग इन्हें खरीदकर आश्रय दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में गोहत्या बंदी के समर्थन में मुस्लिम समाज का भी बड़ा हिस्सा है। इस्लाम में गोमांस खाना कोई अनिवार्य धार्मिक कर्तव्य नहीं है। अगर देश में गोहत्या और गोमांस भक्षण पूरी तरह बंद हो जाए तो सामाजिक सद्भाव मजबूत होगा।

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प्लान के पीछे की वजह: गलत नैरेटिव को चुनौती

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र करते हुए कहा कि जानबूझकर यह फैलाया जा रहा है कि गोहत्या बंद होने से हिंदू पशुपालक आर्थिक संकट में फंस जाएंगे। गो-एलएक्स इसी सोच को तोड़ने का प्रयास है।

प्लेटफॉर्म के जरिए:

  • पशुपालक को उचित मूल्य मिलेगा।
  • गाय कटने से बच जाएगी।
  • गो सेवक संगठन और भक्त गायों को गोशालाओं या संरक्षण केंद्रों में रख सकेंगे।
  • पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और ऑनलाइन होगी।

Who Is Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कौन हैं?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। उनका मूल नाम उमाशंकर था।

शिक्षा और संन्यास यात्रा:

  • 1977-1982: गुजरात के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में शिक्षा।
  • 1982: काशी पहुंचे और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मुलाकात हुई, जो उनके गुरु बने।
  • संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की डिग्री हासिल की।
  • वेदांत, व्याकरण, ज्योतिष और हिंदू दर्शन में गहन अध्ययन।
  • 2006: गुरु से संन्यास दीक्षा, नाम बदलकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रखा गया।

पीठाधिपति बनना:

  • 11 सितंबर 2022: गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का निधन।
  • गुरु की वसीयत के आधार पर ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ) पीठ के उत्तराधिकारी घोषित हुए।
  • 15 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने पट्टाभिषेक पर अंतरिम रोक लगा दी थी (स्वामी गोविंदानंद सरस्वती की याचिका पर)।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गो संरक्षण, हिंदू धर्म रक्षा और सनातन मूल्यों के प्रखर समर्थक माने जाते हैं। वे कई बार गोहत्या विरोधी आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

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गो-एलएक्स से गो तस्करों पर कैसे पड़ेगा असर?

विश्लेषकों के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म गो तस्करों और अवैध गो-मांस व्यापार पर नकेल कस सकता है क्योंकि:

  • 1. पारदर्शिता: गायों की खरीद-फरोख्त ऑनलाइन रिकॉर्ड होगी, जिससे अवैध सौदों पर नजर रखना आसान होगा।
  • 2. आर्थिक विकल्प: पशुपालकों को वैध और सम्मानजनक खरीदार मिलेगा, इसलिए कसाई को बेचने की मजबूरी कम होगी।
  • 3. सामुदायिक भागीदारी: गो भक्त और संरक्षण संगठन बड़े पैमाने पर गायें खरीद सकेंगे।
  • 4. सोशल मीडिया प्रभाव: प्लेटफॉर्म वायरल होने पर हजारों गो सेवक जुड़ सकते हैं।

हालांकि चुनौतियां भी हैं कि बड़े पैमाने पर फंडिंग, लॉजिस्टिक्स (गायों का परिवहन और रखरखाव), कानूनी जटिलताएं और राज्य-स्तरीय गोहत्या कानूनों का अलग-अलग होना।

गो संरक्षण की व्यापक बहस

भारत में गाय हिंदू धर्म की पवित्रता का प्रतीक है, लेकिन आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक आयाम भी जुड़े हैं। कई राज्यों में गोहत्या पर पाबंदी है, फिर भी अवैध तस्करी जारी रहती है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह कदम धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर संतुलन बनाने की कोशिश लगता है।

वे मुस्लिम समाज के उन लोगों का स्वागत कर रहे हैं जो गोहत्या के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि गोहत्या बंद होने से हिंदू-मुस्लिम सद्भाव बढ़ेगा।

एक नई शुरुआत?

गो-एलएक्स अगर सफल हुआ तो यह गो संरक्षण की दिशा में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाला पहला बड़ा धार्मिक-आर्थिक मॉडल साबित हो सकता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह कदम दिखाता है कि वे समस्या को केवल विरोध से नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान से भी निपटाना चाहते हैं।

अभी प्लेटफॉर्म लॉन्च होने वाला है। अगर यह पारदर्शी, विश्वसनीय और बड़े पैमाने पर कामयाब हुआ तो गोहत्या विरोधी आंदोलन को नई ऊर्जा मिलेगी। गो-एलएक्स वेबसाइट जल्द लॉन्च होने वाली है। स्वामी जी ने सभी हिंदू पशुपालकों और गो भक्तों से अपील की है कि वे इस मंच से जुड़ें और गायों की रक्षा में अपना योगदान दें।

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