'अपनी बेटियों को गुस्से में बड़ा नहीं होने दे सकते'-HC के आदेश पर 8 साल की बच्ची को 1.5 लाख रुपए का मुआवजा
कोच्चि, 23 दिसंबर: केरल हाई कोर्ट ने एक मासूम बच्ची को जिस तरह का न्याय दिया है, उसके खूब चर्चे हो रहे हैं। दरअसल, इसी साल अगस्त में एक मासूम लड़की और उसके पिता के साथ केरल की पिंक पुलिस ने सरेआम बहुत अपमाजनक बर्ताव किया था। छोटी सी बच्ची पर पिंक पुलिस की एक अफसर ने मोबाइल चोरी के झूठे आरोप लगाकर उसकी और उसके पिता की सड़क पर ही तलाशी ली थी। बाद में मोबाइल पिंक पुलिस की कार से ही बरामद हुआ। इस घटना ने 8 साल की बच्ची को अंदर से झकझोर दिया। उसने इस अपमान के खिलाफ केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत ने ना सिर्फ उसे मुआवजा देने का सरकार को आदेश दिया है, बल्कि कहा है कि 'छोटी सी देवीप्रिया को जो आघात लगा है, वह अथाह है.....'

8 साल की बच्ची को 1.5 लाख रुपए का मुआवजा
केरल सरकार को अट्टिंगल की पिंक पुलिस कांड पर जोरदार झटका लगा है। केरल हाई कोर्ट ने बुधवार को उसे इस मामले में याचिकाकर्ता को 1.5 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के जज जस्टिस देवन रामचंद्रणन ने सरकार से याचिकार्ता को अदालती खर्तों के लिए भी अलग से 25,000 रुपए का भुगतान करने को कहा है। केरल हाई कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है। इस मामले में याचिकाकर्ता 8 साल की एक बच्ची देवीप्रिया और उसके पिता थे।

पिंक पुलिस की अफसर ने मोबाइल चोरी का आरोप लगाया था
दरअसल मासूम और उसके पिता के साथ पिंक पुलिस ने सड़क किनारे बीते 27 अगस्त को अपमानजनक सलूक किया था। इसी के बाद वे अदालत में सरकार से 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग को लेकर पहुंचे थे। देवीप्रिया और उसके पिता जयचंद्रण पिंक पुलिस कार के पास इंतजार कर रहे थे, तभी उनपर चोरी का आरोप लगाया गया था। पिंक पुलिस अधिकारी रजिता ने दावा किया था कि बच्ची ने उनका मोबाइल फोन चुरा लिया है। जबकि बाद में वह फोन कार के अंदर से ही बरामद हुआ था। बच्ची और पिता की पुलिस अधिकारियों ने सरेआम तलाशी ली थी। लेकिन, जब मोबाइल पुलिस की कार से ही बरामद हुई तो इसकी वजह से पुलिस की भारी फजीहत हुई। केरल की लेफ्ट फ्रंट सरकार ने आनन-फानन में आरोपी पुलिस अधिकारी का तबादला कर दिया था, लेकिन पीड़ित अपमान के लिए मुआवजे की मांग को लेकर हाई कोर्ट पहुंच गए।

'छोटी सी देवीप्रिया को जो आघात लगा है, वह अथाह है.....'
केरल हाई कोर्ट में राज्य की वामपंथी सरकार के वकीलों ने लगातार दलील देने की कोशिश की कि वे लोग मुआवजे के हकदार नहीं हैं, क्योंकि उनके मौलिक अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। लेकिन, कई दौर की सुनवाई के बाद अदालत ने बुधवार को जो फैसला दिया, वह आम नागिरकों के लिए नजीर बन गया है। अपने आदेश में जस्टिस देवन रामचंद्रण ने कहा, 'हम अपनी बेटियों को गुस्से में बड़ा होने के लिए नहीं छोड़ सकते, तत्काल सुधार के कदम उठाए जाने चाहिए। इसपर कोई आपत्ति नहीं कर सकता कि आर्टिकल 21 के तहत सम्मान के साथ और पूर्ण जीवन जीने के उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है।' अपनी टिप्पणी में अदालत ने ये भी कहा है कि 'छोटी सी देवीप्रिया को जो आघात लगा है, वह अथाह है.....'

क्या है पिंक पुलिस ?
हैरानी की बात है कि एक मासूम बच्ची के साथ केरल की जिस पिंक पुलिस ने इस तरह की घटना को अंजाम दिया है, उसका गठन सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर ही किया गया है। पिंक बीट पुलिस में विशेष तौर पर प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाती है। इन्हें सरकारी और निजी बसों के अलावा बस स्टॉप, स्कूल, कॉलेज और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पेट्रोलिंग की ड्यूटी दी जाती है।(दूसरी और अंतिम तस्वीर- सांकेतिक)
हम अपनी बेटियों को गुस्से में बड़ा होने के लिए नहीं छोड़ सकते.........छोटी सी देवीप्रिया को जो आघात लगा है, वह अथाह है.....केरल हाई कोर्ट












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