'Sonia Gandhi का नाम गैर-कानूनी तरीके से मतदाता सूची में जोड़ा गया', भाजपा का सबूत के साथ कांग्रेस पर हमला
Sonia Gandhi Name Illegally Added to Voter List: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि 1980 में, जब वह भारतीय नागरिक भी नहीं थीं, तब उनका नाम अवैध रूप से मतदाता सूची में जोड़ा गया था।
यह आरोप ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्ष, खासकर कांग्रेस, चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में धांधली और अनियमितताओं के आरोप लगा रही है। भाजपा ने इसे कांग्रेस की 'चुनावी कदाचार' की पुरानी परंपरा का हिस्सा बताया है।

भाजपा का आरोप: सोनिया गांधी का नाम गैर-कानूनी तरीके से मतदाता सूची में
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बुधवार (13 अगस्त 2025) को दावा किया कि सोनिया गांधी, जिनका जन्म 1946 में इटली में सोनिया माइनो के रूप में हुआ था, को 1980 में नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि वह उस समय भारतीय नागरिक नहीं थीं। ठाकुर ने कहा कि यह प्रविष्टि स्पष्ट रूप से उस कानून का उल्लंघन थी, जिसमें मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए भारतीय नागरिकता अनिवार्य है।
भाजपा के राष्ट्रीय आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने X पर एक पोस्ट में दावा किया कि 1980 की मतदाता सूची की फोटोकॉपी इस बात का सबूत है कि सोनिया गांधी को उस समय मतदाता के रूप में दर्ज किया गया था, जबकि वह उस समय भारतीय नागरिक नहीं थीं। मालवीय ने बताया कि उस समय गांधी परिवार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आधिकारिक आवास, 1 सफदरजंग रोड, नई दिल्ली में रहता था। 1980 के लोकसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में संशोधन के दौरान सोनिया गांधी का नाम मतदान केंद्र 145 के क्रमांक 388 पर जोड़ा गया था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भारी विरोध के बाद 1982 में उनका नाम सूची से हटा दिया गया था, लेकिन 1983 में फिर से जोड़ा गया, जबकि वह अप्रैल 1983 में ही भारतीय नागरिक बनी थीं। मालवीय ने इसे 'घोर चुनावी कदाचार' करार देते हुए सवाल उठाया कि सोनिया गांधी का नाम नागरिकता प्राप्त करने से पहले दो बार मतदाता सूची में कैसे दर्ज हुआ?
कांग्रेस का जवाब: 45 साल पुराना मुद्दा उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश
कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे 45 साल पुराना और अप्रासंगिक मुद्दा बताया। पार्टी सूत्रों ने कहा कि भाजपा मौजूदा राजनीतिक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए पुराने मामले को उछाल रही है। सूत्रों ने बताया, 'यह सब आज के प्रासंगिक सवालों से बचने की कोशिश है।' हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक अनुराग ठाकुर के बयान का औपचारिक जवाब नहीं दिया है।
विपक्ष के मतदाता धोखाधड़ी के आरोप
कांग्रेस और विपक्षी दलों ने हाल के महीनों में चुनाव आयोग और भाजपा पर मतदाता सूची में धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं। खासकर कर्नाटक और महाराष्ट्र के पिछले साल के चुनावों में कथित तौर पर लाखों अवैध वोटों की गणना का दावा किया गया है। कांग्रेस ने बेंगलुरु के महादेवपुरा में एक कमरे वाले घर से 80 वोट दर्ज होने का हवाला देते हुए कहा कि इससे उसे एक लोकसभा सीट का नुकसान हुआ।
विपक्ष ने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव हारने के कुछ महीनों बाद मतदाता सूची में एक करोड़ से अधिक नाम जोड़े गए, जिसके बाद भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने विधानसभा चुनाव जीता। इसके अलावा, बिहार में चल रहे 'विशेष गहन पुनरीक्षण' को लेकर भी विवाद है, जिसे विपक्ष ने लाखों मतदाताओं को वोटिंग से वंचित करने की साजिश बताया है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।
चुनाव आयोग का खंडन
चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों का खंडन करते हुए अपनी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बताया है। आयोग ने राहुल गांधी से अपने दावों को हलफनामे के साथ साबित करने की मांग की है। 8 अगस्त को एक बयान में आयोग ने कहा कि कांग्रेस ने 2018 में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की याचिका का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की थी।
भाजपा का पलटवार
भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को बदनाम करने का आरोप लगाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में एक रैली में कहा, 'कांग्रेस हर चुनाव हार रही है और अब बिहार चुनाव से पहले हार का बहाना ढूंढ रही है।' अमित मालवीय ने X (पूर्व में ट्विटर)पर लिखा, 'सोनिया गांधी का मतदाता सूची के साथ रिश्ता चुनावी कानूनों के उल्लंघन से भरा है। शायद यही वजह है कि राहुल गांधी अवैध मतदाताओं को नियमित करने के पक्ष में हैं और विशेष पुनरीक्षण का विरोध करते हैं।'
भाजपा और कांग्रेस के बीच मतदाता सूची को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला भारतीय राजनीति में एक नया विवाद बन गया है। सोनिया गांधी पर लगे 45 साल पुराने आरोपों ने एक बार फिर पुरानी बहस को हवा दी है, जबकि विपक्ष मौजूदा चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रहा है। यह मामला न केवल राजनीतिक माहौल को गर्म कर रहा है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठा रहा है। बिहार में आगामी चुनावों और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले से इस विवाद के और तूल पकड़ने की संभावना है।
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