बिहार में शिशु मृत्यु दर कम करने में एसएनसीयू की अहम भूमिका, राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन

बिहार में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर नवजात मृत्यु दर 18 है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। राज्य के अस्पतालों में उन्नत जीवन रक्षक उपकरणों, कर्मचारियों के निरंतर प्रशिक्षण और जिला सुविधाओं में नई नवजात शिशु देखभाल कोनों के साथ एसएनसीयू और एनआईसीयू चलाए जा रहे हैं। देखभाल को और मजबूत करने के लिए 115 फर्स्ट रेफरल यूनिट्स में तीन-बिस्तर वाले एनबीयू की योजनाएं शामिल हैं।

बिहार में शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है और इसमें विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से राज्य के 35 जिला अस्पतालों में एसएनसीयू और 10 मेडिकल कॉलेजों में एनआईसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई) संचालित की जा रही हैं।

Bihar expands SNCUs and NICUs

सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार बिहार में नवजात मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 18 दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 19 से कम है। स्वास्थ्य विभाग इसे राज्य के लिए सकारात्मक उपलब्धि मान रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार हर नवजात को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए संचालित एसएनसीयू में बेड क्षमता बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी एसएनसीयू में अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही वहां कार्यरत चिकित्सकों और नर्सों के नियमित प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

हर वर्ष हजारों नवजातों का हो रहा सफल उपचार

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में संचालित एसएनसीयू और एनआईसीयू में 45,147 बच्चों का सफल उपचार किया गया। वहीं राज्य में प्रतिवर्ष औसतन 55 से 57 हजार नवजातों का इन इकाइयों में इलाज किया जाता है।

जिला अस्पतालों में स्थापित किए गए न्यू बॉर्न केयर कॉर्नर

राज्य के सभी जिला अस्पतालों में लेबर रूम के भीतर न्यू बॉर्न केयर कॉर्नर स्थापित किए गए हैं। यहां जन्म के तुरंत बाद नवजातों की स्वास्थ्य जांच और आवश्यक प्रबंधन किया जाता है। जरूरत पड़ने पर बच्चों को एसएनसीयू में रेफर किया जाता है।

आगे और मजबूत होगी नवजात स्वास्थ्य व्यवस्था

स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर राज्य के 115 एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) में तीन बेड वाले एनबीएसयू (न्यू बॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट) स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। विभाग का मानना है कि इससे नवजातों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में और मदद मिलेगी।

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