Prabhas Mandal कौन था, CM सुवेंदु ने कराया एनकाउंटर? 12 साल की बच्ची के रेपिस्ट का शव लेने से मां का इनकार

Baruipur Girl Murder Case: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या का जघन्य मामला राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। इस कांड के मुख्य आरोपियों में शामिल प्रभास मंडल की बुधवार (8 जुलाई) तड़के कथित एनकाउंटर में मौत हो गई।

यह घटना मई 2026 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद पुलिस की पहली ऐसी कार्रवाई बताई जा रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का ऐलान किया है। आइए पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं...

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12 साल की बच्ची से बलात्कार, फिर हत्या-पानी में फेंका

4 जुलाई 2026 को 12 साल की बच्ची अपने दोस्त के जन्मदिन के उपहार खरीदने घर से निकली थी। पुलिस जांच के अनुसार, प्रभास मंडल ने उसे बहला-फुसलाकर एक सुनसान जगह पर ले जाया। वहां पहले से मौजूद अन्य आरोपियों (आनंद सरदार और दिवाकर सरदार) के साथ मिलकर बच्ची के साथ बर्बर बलात्कार किया गया। शुरुआती जांच में पता चला कि तीनों आरोपियों ने घटना से पहले नशीले पदार्थों का सेवन किया था।

बलात्कार के बाद बालिका को प्लास्टिक की बोरी में भरकर पास के तालाब में फेंक दिया गया। प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, सिर पर गंभीर चोटें थीं, यौन उत्पीड़न के स्पष्ट निशान मिले, और लड़की को संभवतः जीवित अवस्था में पानी में फेंका गया था (फेफड़ों में पानी मिलने से यह आशंका मजबूत हुई)। शव अगले दिन सूर्यपुर हाट इलाके के तालाब से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम में सिर की चोट से खून बहने और डूबने को मौत का कारण बताया गया।

Who Was Prabhas Mandal: प्रभास मंडल कौन था?

प्रभास मंडल इस मामले में पहला गिरफ्तार आरोपी था। कई CCTV फुटेज में उसे बच्ची के गायब होने से पहले उसके साथ देखा गया था, जिसके चलते उसे मुख्य संदिग्ध माना गया। पुलिस के अनुसार, उसे 10,000 रुपये का लालच देकर इस काम में शामिल किया गया था। वह बालिका को हमलावरों तक पहुंचाने की भूमिका में था। मंडल लंबे समय से नशे का आदी बताया जाता है। उसकी मां संध्या मंडल ने बाद में कहा कि बेटा कभी उनकी सलाह नहीं मानता था।

Baruipur Prabhas Mandal Encounter: कथित एनकाउंटर, पुलिस का बयान

8 जुलाई तड़के पुलिस प्रभास मंडल को सूर्यपुर ले गई थी, जहां घटनाक्रम को रीक्रिएट (दोबारा समझने) की प्रक्रिया चल रही थी। पुलिस अधिकारी के अनुसार, मंडल जांच को गुमराह कर रहा था और विरोधाभासी बयान दे रहा था। अचानक उसने एक पुलिसकर्मी से सर्विस रिवॉल्वर छीन लिया और भागने की कोशिश की। उसने पुलिस टीम पर एक राउंड फायरिंग भी की। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें मंडल को गोली लगी। उसे बारुईपुर सब-डिविजनल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मजिस्ट्रेट जांच और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस ने एनकाउंटर स्थल का दौरा कर वीडियो सबूत रिकॉर्ड किए। यह पुलिस का आधिकारिक बयान है। स्वतंत्र जांच एजेंसियां और कोर्ट अंतिम फैसला करेंगी। एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठ रही है।

मां का दिल दहला देने वाला बयान

एनकाउंटर की सूचना मिलने पर पुलिस जब उनके घर पहुंची, तो संध्या मंडल ने शव लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उसने जो किया, उसके लिए उसे वही मिला जिसके वह लायक था। मैं उसका चेहरा नहीं देखना चाहती। मैं शव लेने नहीं जाऊंगी और परिवार का कोई सदस्य भी नहीं जाएगा। मां ने बेटे को नशे की लत और परिवार की अनदेखी का जिक्र किया। यह बयान पूरे मामले की भयावहता को दर्शाता है, जहां अपराधी का अपना परिवार भी उससे मुंह मोड़ लेता है।

अब तक 4 गिरफ्तार,विसरा रिपोर्ट का इंतजार

प्रभास मंडल के अलावा आनंद सरदार और दिवाकर सरदार पहले गिरफ्तार हो चुके थे। STF, SOG और जिला पुलिस के संयुक्त अभियान में उत्तर 24 परगना के बशीरहाट से कबीर मोल्ला को गिरफ्तार किया गया। कुल गिरफ्तारियां अब चार हो गई हैं। बीते मंगलवार (7 जुलाई) को तीनों आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की गई। पीड़िता की मां का बयान दर्ज किया गया। फॉरेंसिक और विसरा रिपोर्ट का इंतजार है।

गुस्साई भीड़ ने एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या की

बच्ची का शव मिलने के बाद बारुईपुर में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने सड़क जाम कर दी, टायर जलाए और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की। गुस्साई भीड़ ने एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जिसे बाद में सरकार ने बेगुनाह बताया। पुलिस ने हिंसा में शामिल करीब 200 लोगों की पहचान वीडियो फुटेज से की है। अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले दर्ज हैं।

CM सुवेंदु ने 72 घंटे में रिपोर्ट मांगी

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बारुईपुर का दौरा कर हाई-लेवल मीटिंग की। उन्होंने DGP को 72 घंटे में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। सरकार ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने का ऐलान किया। पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री पर भरोसा जताया और उन्हें 'दादा' (बड़े भाई) कहा।

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