सगी बेटी ही बनी विधवा मां की सबसे बड़ी दुश्मन, सुपारी देकर कराई हत्या! कातिल आयुषी की रूह कंपा देने वाली साजिश

Rajasthan Murder Case: रिश्तों को कत्ल करने और लालच की एक ऐसी खौफनाक कहानी सामने आई है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर आम जनता तक को हिलाकर रख दिया है। जिस मां ने पति की मौत के बाद टूटे हुए परिवार को तिनका-तिनका जोड़कर संभाला, उसी मां की मौत की स्क्रिप्ट उसकी सगी बेटी ने लिख डाली।

राजस्थान पुलिस की जांच में जो सच सामने आया है, वह किसी रोंगटे खड़े कर देने वाले क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। आरोप है कि 23 साल की कलयुगी बेटी आयुषी ने अपनी ही विधवा मां नीरज शर्मा (45) की सुपारी देकर बेरहमी से हत्या करवा दी।

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मकसद सिर्फ इतना था-"मां मरेगी तो उसकी सरकारी नौकरी अनुकंपा के आधार पर मुझे मिल जाएगी और सारी प्रॉपर्टी भी मेरी हो जाएगी।"

3 महीने तक रची गई मौत की खौफनाक पटकथा

पुलिस के मुताबिक, यह वारदात किसी गुस्से या अचानक हुए विवाद का नतीजा नहीं थी। नीरज शर्मा को रास्ते से हटाने के लिए पिछले 3 महीने से गहरी और सुनियोजित साजिश रची जा रही थी। हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाया गया। कातिलों को साथ जोड़ा गया, गाड़ियों का इंतजाम हुआ और पूरी कोशिश की गई कि इस मर्डर को एक साधारण 'सड़क हादसा' (हिट एंड रन) साबित किया जा सके ताकि कोई शक न करे।

पिता की मौत के बाद जगी 'कातिल' चाहत

इस खूनी खेल की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी। नीरज शर्मा के पति विजय कुमार शर्मा अदालत में एलडीसी (LDC) के पद पर तैनात थे। एक साल पहले उनकी अचानक मौत हो गई, जिससे पूरा परिवार गहरे आर्थिक संकट में डूब गया। इसके बाद सरकार की तरफ से नीरज शर्मा को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिली, ताकि वे अपने बच्चों का पेट पाल सकें।

लेकिन पुलिस जांच के अनुसार, यही सरकारी नौकरी बेटी आयुषी की सबसे बड़ी चाहत और लालच की वजह बन गई। आयुषी के मन में यह गंदा विचार बैठ गया कि अगर मां नहीं रहेगी, तो नियम के मुताबिक वह नौकरी और घर की पूरी संपत्ति सीधे उसके नाम हो जाएगी।

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चाचा और चचेरे भाई को भी साजिश में किया शामिल

अपनी मां को मौत के घाट उतारने के लिए आयुषी ने अपने ही घर के दो 'विभीषणों'-अपने सगे चाचा मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि से हाथ मिलाया। तीनों ने मिलकर प्लान बनाया कि जहर या हथियार के बजाय नीरज को गाड़ी से कुचलवाया जाए ताकि पुलिस इसे एक्सीडेंट मानकर फाइल बंद कर दे।

शुरुआत में उन्होंने एक किराए की एसयूवी (SUV) से नीरज को उड़ाने की कोशिश की, लेकिन उस समय प्लान फेल हो गया। इसके बाद हार न मानते हुए उन्होंने दूसरी गाड़ी का इंतजाम किया और कई दिनों तक नीरज की हर गतिविधि, उनके आने-जाने के समय और रास्तों की निगरानी की।

7 लाख की सुपारी और 130 की स्पीड से मौत की टक्कर

जब घर के लोग नाकाम रहे, तो आयुषी और उसके चाचा ने पेशेवर अपराधियों का सहारा लिया। उन्होंने भरतपुर के बयाना के रहने वाले हेमंत शर्मा नाम के बदमाश से 7 लाख रुपये में मां की मौत का सौदा किया। हेमंत ने इस काम के लिए अपने चार अन्य साथियों को भी टीम में शामिल कर लिया।

3 जुलाई 2026 की शाम करीब 4:45 बजे, नीरज शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को कोचिंग छोड़कर पैदल घर लौट रही थीं। घात लगाए बैठे शूटरों ने अपनी तेज रफ्तार एसयूवी की स्पीड बढ़ाई और करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से नीरज को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भयानक थी कि नीरज हवा में उछलती हुई करीब 100 फीट दूर जाकर गिरीं। उनके सिर और शरीर पर इतनी गंभीर चोटें आईं कि मौके पर ही उनकी तड़प-तड़पकर मौत हो गई। वारदात को अंजाम देकर ड्राइवर गाड़ी सहित तुरंत फरार हो गया।

मां को पहले ही था अपनी मौत का डर; भाई ने खोली पोल

शुरुआती जांच में पुलिस इसे महज एक 'हिट एंड रन' का केस मान रही थी। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब नीरज के भाई राकेश शर्मा ने थाने पहुंचकर सीधे अपनी भांजी आयुषी, सास और भतीजे बलराम के खिलाफ हत्या की लिखित शिकायत दर्ज कराई।

राकेश ने पुलिस को बताया कि नीरज अपनी मौत से पहले बेहद डरी हुई थीं। उन्होंने कई बार अपने भाई से रोते हुए कहा था कि, "आयुषी का व्यवहार मेरे प्रति बहुत हिंसक और अजीब हो गया है। वो, उसके चाचा और बलराम प्रॉपर्टी के लिए मुझे लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। मुझे डर है कि ये लोग मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।" मां का यही डर और भाई का बयान इस पूरी तफ्तीश का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना।

CCTV और कॉल डिटेल ने बेनकाब किया चेहरा

भाई के सनसनीखेज आरोप के बाद पुलिस ने फौरन इलाके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले। जब टक्कर मारने वाली एसयूवी के मालिक और कड़ियों को जोड़ा गया, तो शक की सुई सीधे घर के अंदर मुड़ गई। पुलिस ने जब आयुषी, उसके चाचा और संदिग्धों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल (CDR) और लोकेशन निकाली, तो हैरान करने वाला सच सामने आ गया। दुर्घटना के वक्त और उससे पहले, इन सबके बीच लगातार बातचीत हो रही थी।

कातिल बेटी समेत 7 गिरफ्तार, 1 फरार

ठोस सबूत मिलने के बाद पुलिस ने तगड़ा एक्शन लेते हुए कलयुगी बेटी आयुषी, उसके साजिशकर्ता चाचा मोहन स्वरूप, सुपारी किलर हेमंत शर्मा और उसके 4 अन्य मददगार साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में इस्तेमाल की गई एसयूवी गाड़ी को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

हालांकि, आयुषी का चचेरा भाई बलराम उर्फ रवि अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

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