शेख हसीना पर लटकी फांसी की तलवार, मानवता के खिलाफ अपराध का ट्रायल शुरू, दोषी साबित हुईं तो हो सकती है फांसी
Bangladesh Row: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामले में औपचारिक ट्रायल शुरू हो गया है। रविवार को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) में इन आरोपों को दर्ज किया गया। इस केस की अगुवाई कर रहे मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने अदालत में आरोप पेश किए। ट्रिब्यूनल के एक अन्य अभियोजक गाज़ी मनोवार हुसैन तमीम ने डेली स्टार को बताया कि ट्रायल की कार्रवाई अब औपचारिक रूप से आरंभ हो चुकी है।
शेख हसीना पर क्या-क्या आरोप?
12 मई को ICT की जांच एजेंसी ने हसीना (Sheikh Hasina) के खिलाफ अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में जुलाई 2024 में हुए विद्रोह और उसके बाद की कार्रवाई के दौरान किए गए मानवता के खिलाफ पांच गंभीर अपराधों का उल्लेख है। वहीं शेख हसीना के साथ दो और आरोपी हैं। जिसमें पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल मामून (जो हिरासत में हैं) और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल (जो फरार हैं) इस लोगों के ऊपर भी ट्रायल की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल में पेश किए गए रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में हुए विद्रोह के दौरान 1,500 से ज्यादा लोगों की हत्या की गई, जबकि 25,000 से अधिक लोग घायल हुए। यह सब उस वक्त हुआ जब हसीना की सरकार ने देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्त कार्रवाई की थी।

सरकारी वकील इस्लाम ने क्या कहा?
वहीं इस मामले के सरकारी वकील इस्लाम ने कहा कि, 'ये किसी से बदला लेने की बात नहीं है। लोकतंत्र में मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।' जांच में जुटी टीम के पास वीडियो, ऑडियो क्लिप, हसीना की फोन कॉल्स, हेलीकॉप्टर और ड्रोन की गतिविधियों के रिकॉर्ड और पीड़ितों के बयान जैसे तमाम सबूत मौजूद हैं। इससे पहले 25 मई को इसी ICT कोर्ट में पहली सुनवाई हुई थी जिसमें आठ पुलिस वालों पर आरोप है कि उन्होंने 5 अगस्त को छह प्रदर्शनकारियों को मार डाला उसी दिन जब हसीना देश से भागीं। उनमें से चार पुलिस वाले जेल में हैं और चार की गैरमौजूदगी में केस चल रहा है। वहीं माना जा रहा है कि, शेख हसीन को इस मामले में फांसी की सजा तक हो सकती है।
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शेख हसीना को लगा दोहरा झटका
वहीं दूसरी तरफ, रविवार, 1 जून 2025 को बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने देश की एक बड़ी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी का रजिस्ट्रेशन फिर से बहाल कर दिया। गौर करने वाली बात ये है कि इसी पार्टी पर शेख हसीना ने अपने कार्यकाल में प्रतिबंध लगाया था और इसके कई नेताओं पर कड़ी कार्रवाई की गई थी। अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। खुद हसीना की पार्टी आवामी लीग पर भी मई 2025 से बैन लग चुका है, जो तब तक लागू रहेगा जब तक उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल खत्म नहीं हो जाता। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर ये साफ है कि ये सिर्फ किसी एक नेता या पार्टी की बात नहीं है ये बांग्लादेश की राजनीति और लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला दौर है। कौन सी ताकतें आगे आएंगी, कौन पीछे छूट जाएगी इसका असर आने वाले चुनावों और सत्ता के संतुलन पर साफ दिखाई देगा।












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