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बाबरी विध्वंस पर फैसला: सभी अभियुक्तों के बरी होने पर क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली- ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में सभी अभियुक्तों को बरी किए जाने के फैसले की सख्त आलोचना की ही। उन्होंने इस फैसले को भारतीय न्यायपालिका के लिए काला दिन करार दिया है। उन्होंने कहा है कि यह न्याय का मामला है, इसलिए बाबरी ढांचे को गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों को दोषी करार दिया जाना चाहिए। लेकिन, जो लोग इसमें शामिल रहे हैं, उन्हें राजनीतिक रूप से फायदा मिला है और वे गृहमंत्री से लेकर मानव संसाधन मंत्री तक बने हैं। उन्होंने बिना नाम लिए पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी की ओर इशारा करते हुए अपनी भड़ास निकाली है।

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    6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या की बाबरी मस्जिद गिराने के मामले में आज लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट के फैसले की एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने काफी आलोचना की है। उन्होंने अदालत से सभी आरोपियों को बरी कर दिए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है। ओवैसी ने कहा है, 'आज भारतीय न्यापालिका के इतिहास के लिए दुखद दिन है। अब कोर्ट ने कहा है कि कोई साजिश नहीं थी.........।'

    उनका कहना है कि, 'सीबीआई कोर्ट का फैसला भारतीय न्यायपालिका के लिए एक काला दिन है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट जमीन से जुड़े संपत्ति विवाद के विवाद में पहले ही कह चुका है कि 'यह कानून के शासन का घोर उल्लंघन है और लोगों की इबादत की जगह को तोड़ने के लिए सोच-समझकर किया गया कार्य है। '

    ओवैसी ने बरी होने के बाद भाजपा के बुजुर्ग नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का बिना नाम लिए निशाना साधा है। ओवैसी के मुताबिक, 'यह एक न्याय का मसला है। यह सुनिश्चित करने का मुद्दा है कि जो लोग बाबरी मस्जिद गिराने के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें दोषी ठहराया जाना चाहिए। लेकिन, पहले उन्हें गृहमंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्री बनाकर राजनीतिक तौर पर पुरस्कृत किया जा चुका है। बीजेपी इसी मुद्दे की वजह से सत्ता में है। '

    गौरलतब कि लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद ढांचा को गिराने के केस में सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया। स्पेशल सीबीआई जज सुरेंद्र कुमार यादव ने अपने फैसले में साफ कहा है कि उस दिन की घटना पूर्वनियोजित नहीं थी और भीड़ ने अनियंत्रित होकर बाबरी ढांचे को गिरा दिया था।

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