बाबरी से बड़ी होगी अयोध्या की नई मस्जिद, इस वजह से 26 जनवरी को पड़ेगी नींव

नई दिल्ली- अयोध्या में पांच एकड़ में बनने वाली नई मस्जिद की नींव 26 जनवरी को रखी जाएगी। बाबरी मस्जिद की जगह बनने वाली नई मस्जिद के ब्लूप्रिंट का शनिवार को अनावरण किया जाएगा। यह जानकारी मस्जिद निर्माण के लिए बने ट्रस्ट के सदस्यों ने दी है। 6 महीने पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मस्जिद निर्माण के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (Indo-Islamic Cultural Foundation) नाम के ट्र्स्ट का गठन किया था। बता दें कि 9 नवंबर, 2019 के अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को बाबरी मस्जिद के बदले नई मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था।

26 जनवरी को पड़ेगी नई मस्जिद की नींव

26 जनवरी को पड़ेगी नई मस्जिद की नींव

अयोध्या में बाबरी मस्जिद के बदले बनने वाली नई मस्जिद के निर्माण का इंतजार खत्म होने जा रहा है। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन ने कहा है, 'ट्रस्ट ने 26 जनवरी को अयोध्या में मस्जिद की नींव रखने के लिए इसलिए चुना है, क्योंकि सात दशक पहले इस दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। हमारा संविधान प्लूरलिज्म पर आधारित है, जो कि हमारी मस्जिद प्रोजेक्ट का मूलमंत्र है।' मस्जिद कॉम्पलेक्स में एक मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, एक कम्युनिटी किचेन और एक लाइब्रेरी भी होगी, जिसका ब्लूप्रिंट आईआईसीएफ 19 दिसंबर को जारी करेगा। इस प्रोजेक्ट की योजना को इसके चीफ आर्किटेक्ट प्रोफेसर एसएम अख्तर ने फाइनल किया है। अख्तर के मुताबिक, 'मस्जिद में एक साथ 2,000 नमाजियों की क्षमता होगी और इसका ढांचा गोलाकार होगा।' यह मस्जिद बिजली के लिए सौर ऊर्जा पर निर्भर होगी और इसमें प्राकृतिक रूप से तापमान नियंत्रित रखने की भी व्यवस्था होगी। कम्युनिटी किचेन में दो बार खाना परोसा जाएगा।

बाबरी से बड़ी और अलग होगी नई मस्जिद

बाबरी से बड़ी और अलग होगी नई मस्जिद

मस्जिद के बारे में थोड़ी विस्तार से जानकारी देते हुए अख्तर ने कहा है कि, 'नई मस्जिद बाबरी मस्जिद से बड़ी होगी, लेकिन उसके ढांचे जैसी नहीं दिखेगी। कॉम्पलेक्स में हॉस्पिटल को अहम स्थान मिलेगा। यह इस्लाम की सच्ची भावना से मानवता की सेवा करेगा जैसा कि पैगंबर ने 1,400 वर्ष पहले बताया था।' उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल सामान्य अस्पतालों की तरह नहीं होगा, बल्कि उसका आर्किटेक्चर मस्जिद के अनुसार ही होगा। इसमें इस्लाम के प्रतीकों का भी चित्रण होगा। यह 300 बेड का अस्पताल होगा, जहां बीमारों के मुफ्त इलाज का इंतजाम होगा। मस्जिद ट्रस्ट अस्पताल बनाने के लिए कॉर्पोरेट फंडिंग के भी इंतजार में है। इसके साथ ही अस्पताल को मानव संसाधन उपलब्ध करवाने के लिए ट्रस्ट नर्सिंग और पैरामेडिक कॉलेज स्थापित करने की भी सोच रहा है। जबकि, डॉक्टरों के बारे में ट्रस्ट को भरोसा है कि उसका इंतजाम स्थानीय स्तर पर हो जाएगा और बड़े मामलों में बाहर से भी सहयोग ले सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत मिली जमीन

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत मिली जमीन

पिछले साल 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का रास्ता साथ किया था। लेकिन, अदालत ने उसके साथ ही सरकार को बाबरी मस्जिद के बदले नई मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ प्लॉट अयोध्या में ही प्रमुख स्थान पर देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के उसी आदेश के तहत प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अयोध्या के सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ सरकारी जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी है, जहां पर 26 जनवरी को बाबरी मस्जिद के बदले नई मस्जिद की आधारशिला रखी जानी है।

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