राम मंदिर ट्रस्ट का भारी विरोध, महंत परमहंस दास अनशन पर, कई संतों ने दी आंदोलन की धमकी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट बनाने का ऐलान करने के साथ ही कई संतों ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। ये विरोध ट्रस्ट में शामिल किए गए लोगों को लेकर है। सरकार के बनाए ट्रस्ट में राम मंदिर बनाने को लेकर आंदोलन करने वाले कई मंदिरों और आश्रमों के संत-महंत नाखुश हैं। संतों का कहना है कि केंद्र सरकार के इस ट्रस्ट में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े किसी संत का नाम नहीं है। संतों ने ट्रस्ट को मानने से इनकार दिया और आंदोलन की बात कही है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को ट्रस्ट का संरक्षक बनाने की मांग को लेकर अयोध्या की तपस्वी छावनी से निष्कासित महंत परमहंस दास बुधवार को अनशन पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि मांग पूरे होने तक वो उठेंगे नहीं। वहीं महंत रामचंद्र दास परमहंस के उत्तराधिकारी को भी नहीं शामिल किया गया। इसके लेकर भी संतों में नाराजगी है।
राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने कहा है कि हम इस ट्रस्ट को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि इस ट्रस्ट में वैष्णव समाज के संतों का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि संतों के बजाय स्वार्थी लोगों को ट्रस्ट में रखा गया है।
संत कमलनयन दास का कहना है कि ट्रस्ट के गठन में रामानंदी संतों का अपमान किया गया है। राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास ने भी कहा है कि अयोध्यावासी संत महंतों का ट्रस्ट के माध्यम से अपमान किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में ट्रस्ट के गठन का एलान किया है। 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' के नाम से गठित इस 15 सदस्यीय ट्रस्ट में एक ट्रस्टी अनिवार्य रूप से दलित होगा। ट्रस्ट के डीड में ही इसके नौ सदस्यों के नाम दे दिए गए हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष का केस लड़ने वाले वकील के. परासरन, 1989 में राम मंदिर का शिलान्यास करने वाले दलित सदस्य कामेश्वर चौपाल, जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद जी महाराज, पीठाधीश्वर जगतगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज, अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख परमानंद जी महाराज, अयोध्या के राजपरिवार के वंशज विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधि महंत दिनेंद्र दास, स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज और डॉ अनिल मिश्र शामिल हैं।












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