MP News: LPG के बाद अब रसोई की पूरी थाली पर संकट, मध्य प्रदेश में दाल-मसाले से लेकर ड्राई फ्रूट तक महंगे
MP News: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे टकराव का असर अब सीधे मध्य प्रदेश की रसोई तक पहुंचने लगा है। प्रदेश में एलपीजी सिलेंडर की कमी के साथ-साथ अब दाल, मसाले, ड्राई फ्रूट और रोजमर्रा की कई खाद्य सामग्री के दाम भी तेजी से बढ़ने लगे हैं।
हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि आने वाले दिनों में आम लोगों के लिए किचन चलाना और मुश्किल हो सकता है। जानकारी के अनुसार गुरुवार 13 मार्च 2026 से प्रदेश में गैस संकट और गहरा सकता है, क्योंकि ऑयल कंपनियां फिलहाल सिर्फ करीब 15 प्रतिशत स्टॉक ही उपलब्ध करा पा रही हैं।

LPG संकट: कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई लगभग बंद
प्रदेश में पिछले तीन दिनों से 19 किलो के कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई लगभग ठप हो गई है। ऑयल कंपनियों ने साफ कर दिया है कि सीमित स्टॉक को देखते हुए फिलहाल गैस की आपूर्ति सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं के लिए ही की जाएगी। इसमें अस्पताल, सेना और पुलिस कैंटीन, रेलवे और एयरपोर्ट कैंटीन तथा बस स्टैंड के भोजनालय शामिल हैं। खाद्य विभाग को इन संस्थानों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इस स्थिति का सीधा असर होटल-रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन, ढाबों, रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों और मिठाई दुकानों पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं, भोपाल और इंदौर में चल रहे मेट्रो प्रोजेक्ट के काम पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि वेल्डिंग जैसे कई कामों में LPG का उपयोग होता है।
होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर संकट
भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली के अनुसार राजधानी में करीब 1500 से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं, जहां रोजाना लगभग 2000 से 2500 कमर्शियल सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। उनका कहना है कि जिन होटलों के पास गैस का थोड़ा स्टॉक बचा है, वे अधिकतम 48 घंटे तक ही काम चला पाएंगे। इसके बाद कई होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।
कुछ होटल और ढाबे फिलहाल इंडक्शन स्टोव, लकड़ी-कोयले के चूल्हे या डीजल भट्टी का सहारा लेकर काम चला रहे हैं। इंदौर में तो खाद्य विभाग ने अस्थायी रूप से पारंपरिक ईंधन जैसे लकड़ी, कंडा और कोयला इस्तेमाल करने की सलाह भी दी है।

घरेलू सिलेंडर की सप्लाई भी प्रभावित
सरकारी स्तर पर दावा किया जा रहा है कि घरेलू 14.2 किलो LPG सिलेंडर की सप्लाई में कोई बड़ी दिक्कत नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग ही नजर आ रही है। कई शहरों में गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। भोपाल के 5 नंबर, टीटी नगर, कोहेफिजा और आसपास के इलाकों में लोगों को सिलेंडर के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक अब घरेलू सिलेंडर की वेटिंग 5 से 7 दिन तक पहुंच गई है। इसके अलावा सरकार ने नया नियम लागू किया है, जिसके तहत अब सिलेंडर की अगली बुकिंग 25 दिन बाद ही संभव होगी, जबकि पहले यह अवधि 21 दिन थी। पैनिक बुकिंग और स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति के कारण कई जगह गैस एजेंसियों के सर्वर भी क्रैश होने की खबरें सामने आई हैं।
दाल, मसाले और ड्राई फ्रूट के दाम भी बढ़े
गैस संकट के साथ-साथ किचन की अन्य जरूरी चीजों के दाम भी तेजी से बढ़ने लगे हैं। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू और अन्य थोक व्यापारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण दालों और मसालों के दाम में उछाल देखने को मिल रहा है।
व्यापारियों के मुताबिक:
- हरी मूंग करीब ₹100 प्रति क्विंटल महंगी हुई
- मसूर दाल में ₹100 प्रति क्विंटल तक बढ़ोतरी
- चना ₹150 प्रति क्विंटल महंगा
- मूंग मोगर ₹125 प्रति क्विंटल तक बढ़ी
- चना दाल में करीब ₹100 प्रति क्विंटल का उछाल
- तूअर दाल ₹200 से ₹300 प्रति क्विंटल तक महंगी
इसके अलावा मसालों में भी तेजी देखी जा रही है। लाल मिर्च लगभग ₹50 प्रति किलो और धनिया करीब ₹40 प्रति किलो महंगा हो गया है। वहीं ड्राई फ्रूट्स में भी बड़ा उछाल आया है-पिस्ता ₹250 प्रति किलो, अंजीर ₹100 प्रति किलो, जबकि केसर की कीमत लगभग ₹20,000 प्रति किलो तक पहुंच गई है।
आम आदमी और छोटे कारोबार पर असर
गैस और खाद्य सामग्री के बढ़ते दामों का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। घरों में खाना बनाना महंगा और मुश्किल होता जा रहा है। दूसरी ओर छोटे होटल, चाय की दुकानें, समोसे-कचौड़ी और स्ट्रीट फूड बेचने वाले दुकानदारों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है।
कई जगहों पर चाय की कीमत ₹10 से बढ़कर ₹20 तक पहुंचने लगी है। पूड़ी-सब्जी, गोलगप्पे, मटर पनीर और अन्य खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ने लगे हैं। वहीं कमर्शियल सिलेंडर की कमी के चलते ब्लैक मार्केट में गैस सिलेंडर ₹2000 से ₹2500 तक में बिकने की खबरें भी सामने आ रही हैं।
अगर संकट लंबा चला तो और बढ़ सकती है महंगाई
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई प्रभावित रही, तो भारत को गैस और अन्य सामान के लिए रूस और अफ्रीकी देशों जैसे वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होना पड़ सकता है। हालांकि इन रास्तों से आयात करने में ज्यादा समय और लागत लग सकती है।
सरकार फिलहाल घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने और रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दे रही है, लेकिन बाजार में बढ़ती महंगाई और कमर्शियल सेक्टर की परेशानी अभी कम होती नहीं दिख रही।
रसोई से लेकर बाजार तक संकट के संकेत
मौजूदा हालात को देखते हुए साफ है कि मध्य प्रदेश में सिर्फ LPG सिलेंडर ही नहीं बल्कि पूरी रसोई की थाली पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अगर सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में इसका असर बड़े पैमाने पर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और बाजार दोनों को मिलकर स्थिति संभालनी होगी, ताकि आम लोगों की रसोई पर ज्यादा बोझ न पड़े।












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