साइड इफेक्ट रहित अश्वगंधा बन सकता है HCQ का विकल्प, सरकार की पहल पर शुरू हुआ शोध
नई दिल्ली। कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ युद्ध में भारत में निर्मित हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) दवा से सभी परिचित है, जिसकी आपूर्ति भारत में अमेरिका समेत कई जरूरतमंद देशों को करवाई, लेकिन अब भारत में मोदी सरकार की पहल पर Covid19 के इलाज में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी अश्वगंधा की उपयोगिता पर शोध शुरू हो गई है। यह शोध अंग्रेज़ी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) बनाम आर्युवैदिक जड़ी-बूटी अश्वगंधा से जुड़ा होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) और इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के कई वैज्ञानिक मिलकर इस बारे में स्टडी कर रहे हैं। मोदी सरकार की पहल पर शुरू हुआ यह शोध का मकसद यह पता लगाना है कि क्या एचसीक्यू का काम अश्वगंधा कर सकती है।


गौरतलब है कोविड-19 के ख़िलाफ़ एचसीक्यू का इस्तेमाल एक प्रतिरोधात्मक दवा के तौर पर किया जा रहा है। ज़्यादातर मामलों में ये स्वास्थ्यकर्मियों को दी जाती है और आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय समेत आईसीएमआर के वैज्ञानिक अश्वगंधों के रोग प्रतिरोधक गुणों के आधार कोविड-19 के वैकल्पिक इलाज के लिए ताजा शोध पर काम कर रहे हैं। स्टडी में पता लगाया जाएगा कि क्या अश्वगंधा एचसीक्यू का विकल्प हो सकता है।

शोध से जुड़े टास्कफोर्स के प्रमुख यूजीसी के वाइस चेरयमैन भूषण पटवर्धन ने कहा, 'हम कोविड-19 के ऊपर अश्वगंधा के असर को देखना चाहते हैं, हम यह भी देखना चाहते हैं कि क्या अश्वगंधा एचसीक्यू वाला काम कर सकती है। उन्होंने आगे कहा, अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटी को इसके औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है और ऐसी स्टडी पहले से मौजूद है, जो बताती है कि ये इम्युनिटी बढ़ाने का काम करती है।
बकौल पटवर्धन, हम इसका देशभर में पहली पंक्ति में अपनी सेवा दे रहे और चुने हुए 400 स्वास्थ्यकर्मियों पर टेस्ट करेंगे, जिनमें से आधे मरीजों को अश्वगंधा और आधे मरीज को एचसीक्यू दिया जाएगा और हम देखेंगे कि इसके कैसे परिणाम आते हैं।
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इम्युनो-मॉड्यूलेटर के तौर पर अश्वगंधा की तुलना एचसीक्यू से की गई है
आयुष मंत्रालय के सचिव आयुष रंजन कोटेचा ने भी इस मामले में इसी स्टडी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि एक बड़े ही प्रतिष्ठित जर्नल ने एक स्टडी पब्लिश की है, जिसमें इम्युनो-मॉड्यूलेटर के तौर पर अश्वगंधा की तुलना एचसीक्यू से की गई है और परिणाम बताते हैं कि दोनों ही एक जैसा ही असर करते हैं।

चूहों पर की गई एक स्टडी में अश्वगंधा को लेकर अनुमान सही साबित हुई है
इम्युनिटी बेहतर करने को लेकर चूहों पर की गई एक स्टडी में अश्वगंधा को लेकर यह बात साबित हुई है कि ये माइलोसप्रेशन (एक प्रक्रिया जिसकी वजह से बोन मैरो की गतिविधियों धीमी पड़ जाती है और ब्लड सेल का उत्पादन कम हो जाता है) को घटाता है।

एचसीक्यू की तुलना में साइड-इफेक्ट रहित है आयुर्वेदिक अश्वगंधा
उन्होंने आगे कहा कि अश्वगंधा से जुड़े काफ़ी सारे साक्ष्य मौजूद हैं। हालांकि वो उसे लेकर पहले से सावधानी बरतते हुए यह कहना चाहेंगे कि ऐसा पहले से ही नहीं मान लिया जाना चाहिए कि ये दवा काम करेगी, जैसा की एचसीक्यू का एहतियातन इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वो यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अश्वगंधा का भी वैसा ही प्रभाव हो सकता है। हालांकि एक अच्छी बात यह है कि एचसीक्यू की तुलना में इसका कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं होगा।

आने वाले हफ्ते में यह शोध शुरू हो जाएगा, शोध 12 हफ्ते में पूरो होगा
उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा, ‘इसे टेस्ट करने के लिए अलग-अलग स्टडी की योजना है, हमने क्लीनिकल प्रोटोकॉल बनाने की मजबूत कवायद शुरू की है और इस अध्ययन में वैज्ञानिकों का एक समूह शामिल है। आईसीएमआर द्वारा तकनीकी रूप से मदद प्राप्त बहुत से समीक्षकों द्वारा इसका विश्लेषण किया जा रहा है। इस स्टडी के लिए हम कई मेडिकल कॉलेजों के साथ काम कर रहे हैं और आने वाले हफ्ते में यह शोध शुरू हो जाएगा और इसे पूरा करने के लिए 12 हफ्ते का समय तय किया गया है। यानी यह स्टडी 3 महीने में आ जाएगी।

साइड इफैक्ट के कारण HCQ के इस्तेमाल को लेकर आगाह किया है
भारत से लेकर अमेरिका तक ने अपने नागरिकों को एचसीक्यू के इस्तेमाल को लेकर आगाह किया है। आईसीएमआर ने मार्च में भारत के लोगों को आगाह किया था कि इस दवा का इस्तेमाल ‘प्रयोग' के तौर पर किया जा रहा है। आईसीएमआर के महामारी विज्ञान के प्रमुख डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर ने 25 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि HCQ दवा को डॉक्टर की सलाह के बग़ैर नहीं लिया जाना चाहिए।












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