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'छोड़नी पड़ती कुर्सी', संविधान संशोधन विधेयक पर बोले अमित शाह, क्यों दिया केजरीवाल का उदाहरण?

Amit Shah: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ANI के साथ एक खास बातचीत की है जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की है। स्मिता प्रकाश के इस पॉडकास्ट में उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से लेकर केजरीवाल के जेल से सरकार चलाने को लेकर बात की है। 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर शुरू हुई बहस के बीच अमित शाह ने इसे ऐतिहासिक कदम करार दिया है।

शाह ने कहा कि अब कोई भी नेता जेल में रहते हुए सरकार नहीं चला पाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। शाह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस कानून को अपने खिलाफ भी लागू किया है, ताकि राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर यह कानून पहले से लागू होता, तो उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ता। शाह के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

Amit Shah

"कानून होता तो केजरीवाल को देना पड़ता इस्तीफा"

अमित शाह ने कहा कि अगर यह कानून पहले से लागू होता, तो अरविंद केजरीवाल को पहले ही इस्तीफा देना पड़ता। उन्होंने कहा, "जब वे जेल से बाहर आए और जनता ने सवाल उठाने शुरू किए, तब उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया और आतिशी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया।"
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"जेल में रहकर सरकार नहीं चल सकती"

130वें संशोधन पर बोलते हुए शाह ने कहा, "जब तक आपको जमानत नहीं मिलती, तब तक आप सरकार नहीं चला सकते। अगर जमानत मिलने में 40 दिन भी लग जाएं, तो आप 40 दिन बाद शपथ ले सकते हैं। इसमें असुरक्षा की कोई बात नहीं है, यह सिर्फ व्यवस्था को साफ करने का कदम है।"

विपक्ष के आरोपों पर जवाब

विपक्ष की आपत्तियों को लेकर शाह ने कहा कि जमानत को लेकर कोई असमानता नहीं है। उन्होंने कहा, "मेरे केस को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट में किसी भी मामले में पांच दिन से ज्यादा समय जमानत मिलने में नहीं लगा।"

"मोदी ने अपने खिलाफ किया संशोधन"

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संशोधन में प्रधानमंत्री के पद को भी शामिल किया है। उन्होंने इंदिरा गांधी के 39वें संशोधन का जिक्र करते हुए कहा, "तब राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष को न्यायिक समीक्षा से बाहर रखा गया था। लेकिन मोदी जी ने ऐसा संशोधन किया है जिसमें अगर प्रधानमंत्री भी जेल जाते हैं, तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।"

पारदर्शिता की ओर कदम

शाह के मुताबिक, यह संशोधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि अब कोई भी नेता जेल से शासन नहीं चला पाएगा, जिससे राजनीति में साफ-सफाई और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित होंगी।
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