PoK Election: 'चुनाव से पहले दखल दें प्रधानमंत्री', PoK के नेता ने PM Modi से मांगी मदद, बताई अंदर की बात
PoK Election: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान से एक बार फिर मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। PoK के मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्ज़ा (Amjad Ayub Mirza) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है और विरोध की आवाज़ उठाने वालों पर कार्रवाई तेज कर दी गई है। बता दें कि PoK में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं, जिसके बाद पाकिस्तानी सरकार इसे लेकर कुछ बड़े फैसले ले सकती है।
पीएम मोदी से मदद की अपील
अमजद अयूब मिर्ज़ा ने वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों की स्थिति पर ध्यान देने की अपील की। उनका कहना है कि क्षेत्र में रहने वाले लोगों को राजनीतिक अधिकार, आर्थिक अवसर और नागरिक स्वतंत्रताएं नहीं मिल पा रही हैं। मिर्ज़ा के मुताबिक, हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत दोनों को इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है।

राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर बढ़ रहा दबाव
मिर्ज़ा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में राजनीतिक और नागरिक अधिकारों की मांग करने वाले कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, जो लोग अपने अधिकारों की बात करते हैं, उन्हें गिरफ्तारी, हिरासत और अन्य प्रकार की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने वाले कई लोगों को चुप कराने की कोशिश की जा रही है।
अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं पर कार्रवाई का आरोप
समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, मिर्ज़ा ने आरोप लगाया कि गिलगित-बाल्टिस्तान अवामी एक्शन कमेटी के कई सदस्यों और नेताओं को जेल में डाला गया है। उनका कहना है कि ये नेता राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय अधिकारों और आर्थिक न्याय की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी आवाज़ दबाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई की गई। मिर्ज़ा का आरोप है कि इन गिरफ्तारियों का उद्देश्य लोगों की मांगों को कमजोर करना है।
9 जून की हड़ताल से पहले बड़े ऑपरेशन की आशंका
अमजद अयूब मिर्ज़ा ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर 9 जून को प्रस्तावित आम हड़ताल से पहले संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा होता है तो क्षेत्र में लोकतांत्रिक गतिविधियों और राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर और अधिक असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, इससे लोगों में असंतोष और बढ़ने की संभावना है।
ईद के दिन भी सड़कों पर उतरे स्वास्थ्यकर्मी
मिर्ज़ा ने क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि PoK में ईद जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर हुए। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं बल्कि क्षेत्र में बढ़ते जन असंतोष का संकेत है। उनका कहना है कि लोग रोजगार, वेतन, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार परेशान हैं।
बेरोजगारी और आर्थिक संकट बना बड़ी समस्या
मिर्ज़ा का कहना है कि बेरोजगारी, आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक शिकायतों ने क्षेत्र के लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में युवा बेहतर अवसरों की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं, जबकि आम नागरिकों को भी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं का संयुक्त प्रभाव लोगों की जीवन गुणवत्ता को लगातार प्रभावित कर रहा है।
मोदी मॉडल की तारीफ भी की
प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए मिर्ज़ा ने भारत में विकास, जवाबदेही और आर्थिक प्रगति पर दिए जाने वाले जोर की सराहना की। उन्होंने कहा कि बेहतर शासन और अवसरों की तलाश कर रहे लोगों के लिए विकास और जवाबदेही जैसे सिद्धांत उम्मीद की किरण बन सकते हैं। उनका मानना है कि इन मूल्यों से क्षेत्र के लोगों को सकारात्मक संदेश मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी की अपील
अमजद अयूब मिर्ज़ा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के मुद्दों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया को वहां के लोगों की समस्याओं और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान देना चाहिए। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होने से इन मुद्दों को अधिक गंभीरता से लिया जा सकता है।
'हमें बेहतर जीवन की उम्मीद'- मिर्जा
मिर्ज़ा ने अपने बयान में कहा कि न्याय, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद रखने वाले लोगों को समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकास पर आधारित फैसलों से क्षेत्र के लोगों को उम्मीद दिखाई देती है। उनका कहना है कि लोगों को ऐसे मॉडल की आवश्यकता है जो आर्थिक अवसर, जवाबदेही और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित कर सके।
भारत से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठाने की मांग
अपने बयान के अंत में मिर्ज़ा ने भारत से आग्रह किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत उन प्रयासों का समर्थन कर सकता है जिनका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों के लिए नागरिक स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक अधिकार और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना है। मिर्ज़ा के मुताबिक, इन मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर चर्चा और समर्थन से क्षेत्र के लोगों की आवाज़ को मजबूती मिल सकती है।
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