यूपी में दर्ज 6 FIR रद्द कराने के लिए SC पहुंचे मोहम्मद जुबैर, CJI ने कही ये बात

नई दिल्ली, 18 जुलाई। ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ उत्तर प्रदेश में में दायर 6 एफआईआर को रद्द करने की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने के सामने जब यह याचिका आई तो उन्होंने मोहम्मद जुबैर से कहा कि वह उस बेंच से तारीख मांगे जो पहले से ही इससे जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। इसी तरह के केस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच सुनवाई कर रही है।

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इस महीने की शुरुआत में शीर्ष कोर्ट ने जुबैर को आंतरिक राहत दी थी और उन्हें सीतापुर मामले में अंतरिम जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा था कि यह जमानत सशर्त दी जा रही है, याचिकाकर्ता कोई भी ट्वीट नहीं करेगा और ना ही दिल्ली छोड़ेगा। बाकी की अन्य शर्तें सीतापुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तय करेगा। बता दें कि जुबैरा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है कि उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ जो एफआईआर दर्ज की गई हैं उसे रद्द किया जाए। दरअसल दिल्ली की कोर्ट ने जुबैर को 2018 मामले में जमानत दे दी थी, जिसके बाद जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

बता दें कि मोहम्मद जुबैर को पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने एक पुराने ट्वीट के आधार पर गिरफ्तार कर लिया था, उनपर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप था। जुबैर के खिलाफ यूपी में 6 एफआईआर दर्ज हैं। दो केस हाथरस, एक-एक केस गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में दर्ज किया गया है। लखीमपुर खीरी मामले में कोर्ट ने शनिवार को जुबैर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। उनके खिलाफ 18 सितंबर 2021 में केस दर्ज किया गया था। जुबैर के खिलाफ यह केस सुदर्शन न्यूज चैनल को लेकर फैक्ट चेक ट्वीट को लेकर किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जुबैर ने लोगों को हमारे चैनल के वीडियो के जरिए गुमराह करने की कोशिश की है। इस मामले में जुबैर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

हाथरस पुलिस ने पिछले हफ्ते जुबैर की रिमांड के लिए चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने याचिका दायर की है। दिल्ली कोर्ट ने जुबैर से कहा है कि वह इस मामले में पूछताछ के लिए पेश हो, जब उनसे पेश होने के लिए कहा जाए, साथ ही वह बिना इजाजत दिल्ली छोड़कर बाहर ना जाएं। कोर्ट ने कहा कि केस के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी से हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है, लिहाजा आरोपी को जमानत दी जाती है।

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