आईये जानते हैं स्वदेशी मिसाइल 'आकाश' की खास बातें..
ग्वालियर। आज भारतीय वायु सेना के लिए वाकई में खास दिन है क्योंकि आज जमीन से हवा में मार करने वाली स्वदेशी सुपरसोनिक मिसाइल 'आकाश' को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया है।
आईये जानते हैं स्वदेशी मिसाइल 'आकाश' की खास बातें..
- साल 1990 में पहली आकाश टेस्ट मिसाइल बनी थी।
- मार्च 1997 में आकाश मिसाइल का पहली बार अपने विस्तृत रूप में आयी थी।
- मिसाइल 'आकाश' पूर्ण रूप से स्वदेशी मिसाइल है जो कि जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल है।
- इस मिसाइल को डीआरडीओ, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल) लिमिटेड और निजी क्षेत्र ने मिलकर तैयार किया है।
- इस मिसाइल में लगभग 92 प्रतिशत स्वदेशी कल-पुर्जो का इस्तेमाल किया गया है।
- इस मिसाइल का किसी भी मार्ग अर्थात सड़क, जल व आसमान के जरिए और कहीं भी परिवहन (टांसपोटेशन) किया जा सकता है।
- यह मिसाइल एक साथ आठ लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है।
- इसकी गति ध्वनि से तीन गुना है, जो लगभग 100 किलोमीटर की दूरी से लक्ष्य पर नजर रखकर 25 किलोमीटर की दूरी पर मंडरा रहे दुश्मन के हेलीकाप्टर, विमान और ड्रोन को भेद सकती है।
- इस मिसाइल के राडार को बीइएल ने विकसित किया है और इसे नाम दिया गया है 'राजेंद्र राडार'। यह रडार दुश्मन के कई लक्ष्यों को खोज सकता है और ध्वनि से तेज गति से उस पर हमला कर सकती है।
- यह दुश्मन के हेलीकाप्टर, विमान व ड्रोन को भेद सकती है।













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