आरटीआई के जरिए सामने आई खामी को रेलवे ने बताया 'मानवीय भूल'
आरटीआई कार्यकर्ता अजय बोस की ओर से आरटीआई के जरिए की गई पहली अपील में रेल अधिकारियों ने उन्हें कोई जानकारी मुहैया नहीं कराई।
नई दिल्ली। आरटीआई के जरिए भारतीय रेल के सेंट्रल रेलवे कैटरिंग विभाग की ओर कुछ सामान की खरीदारी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। एक आरटीआई एक्टिविस्ट की दूसरी अपील पर ये जानकारी सामने आई है जिसमें पता चला है कि भारतीय रेल के सेंट्रल रेलवे कैटरिंग डिपार्टमेंट ने 972 रुपये प्रति 100 ग्राम की दर से दही खरीदी, वहीं रिफाइंड तेल 1253 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा गया। इसके जवाब में रेल मंत्रालय की ओर से ऑफिशियल ट्विटर हैंडल के जरिए उनका पक्ष सामने आया। इसमें उन्होंने बताया कि ये कोई घोटाला नहीं है, बल्कि एक मानवीय भूल है। रेलवे की ओर से बताया गया कि 970 रुपये में दही का एक कार्टन खरीद गया, जिसमें 100 ग्राम दही के 108 कप थे। वहीं 1241 में रिफाइंड तेल का 15 लीटर का टिन खरीदा गया है। रेलवे की ओर से भेजे गए ट्वीट में बताया गया कि इस मामले में गलती करने वाले आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।

सामने आई चौंकाने वाली जानकारी
आरटीआई कार्यकर्ता अजय बोस की ओर से आरटीआई के जरिए की गई पहली अपील में रेल अधिकारियों ने उन्हें कोई जानकारी मुहैया नहीं कराई। आखिरकार दूसरी अपील के बाद उन्हें जो जानकारियां मुहैया कराई गई वो बेहद चौंकाने वाली रही। अंग्रेजी अखबर 'द हिंदू' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सेंट्रल रेलवे कैटरिंग डिपार्टमेंट की ओर से की गई खरीदारी में उस वस्तु की खरीद एमआरपी से कई गुना ज्यादा के रेट पर किया गया। इसमें दही की खरीद 9720 रुपये प्रति किग्रा की गई। अजय बोस ने ये आरटीआई उस समय दायर की जब पता चला कि कैटरिंग विभाग बड़े घाटे में चल रहा है। हालांकि रेलवे की ओर से बाद में ट्वीट के जरिए बताया गया कि ये कोई घोटाला नहीं बल्कि मानवीय भूल है।

अजय बोस ने दायर की थी आरटीआई
अजय बोस ने 'द हिंदू' को बताया कि उन्होंने जुलाई 2016 में एक आवेदन किया, हालांकि सेंट्रल रेलवे से उस आवेदन पर कोई खास जानकारी नहीं दी गई। इस दौरान उनके रवैये से लगा कि वो कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। इस आवेदन के 15 दिन बाद एक अपील अपीलीय अथॉरिटी को दी, जिसमें कहा गया कि जरूरी सूचना मुहैया कराई जाए। हालांकि इसके बाद भी अजय बोस को जवाब नहीं दिया गया। आखिरकार उन्होंने दूसरी बार अपील की। तब जाकर उन्हें जानकारी मुहैया कराई गई।

रेलवे की ओर से आई सफाई
आरटीआई से अजय बोस जो जानकारी मिली उसके मुताबिक सेंट्रल रेलवे ने अमूल दही 9720 रुपये प्रति किग्रा. की दर से खरीदा था। आम तौर पर इस दही का दाम 25 रुपये होता है। इसके अलावा मार्च 2016 में 58 लीटर रिफाइंड तेल 72,034 रुपये यानी 1241 रुपये प्रति लीटर के हिसाम से खरीदा गया। हालांकि इस मामले में रेलवे की ओर से ट्वीट करके बताया गया कि ये मानवीय भूल है। बताया गया कि 970 रुपये में दही का एक कार्टन खरीद गया, जिसमें 100 ग्राम दही के 108 कप थे। वहीं 1241 में रिफाइंड तेल का 15 लीटर का टिन खरीदा गया है। रेलवे की ओर से भेजे गए ट्वीट में बताया गया कि इस मामले में गलती करने वाले आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।

खरीद के साथ वितरण में भी दिखा अंतर
जिस तरह से अजय बोस की आरटीआई से जानकारी मिली है उसके अनुसार रेलवे की सामान खरीद में काफी अंतर नजर आया। इससे पता चलता है कि खरीद के साथ-साथ उसके वितरण में भी काफी अंतर है। फिलहाल इस नुकसान को लेकर सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों की ओर से कहा गया कि ये टाइपिंग की गलती हो सकती है, लेकिन हम इस मामले को देखेंगे। वहीं रेलवे की ओर से ट्वीट करके भी इसे मानवीय गलती बताया गया। साथ ही खरीदे गए सामान के दाम भी बताए गए।

रेलवे ने दिया जवाब, घोटाला नहीं मानवीय भूल
आरटीआई एक्टिविस्ट की दूसरी अपील के बाद हुए खुलासे को लेकर खबर सामने आने के बाद रेल मंत्रालय की ओर से ऑफिशियल ट्विटर हैंडल के जरिए उनका पक्ष सामने आया।इसमें उन्होंने बताया कि ये कोई घोटाला नहीं है, बल्कि एक मानवीय भूल है। रेलवे की ओर से बताया गया कि 970 रुपये में दही का एक कार्टन खरीद गया, जिसमें 100 ग्राम दही के 108 कप थे। वहीं 1241 में रिफाइंड तेल का 15 लीटर का टिन खरीदा गया है। रेलवे की ओर से भेजे गए ट्वीट में बताया गया कि इस मामले में गलती करने वाले आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इस ट्वीट में बताया गया है कि कि खरीदे गए सामान का दाम वास्तव में कितना था।












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