एक लाजवाब फिल्म जो बताती है कि तुलसीदास जी कैसे थे दुनिया के महानतम वैज्ञानिक

नई दिल्ली। एक फिल्म है जीनियस – टू। दमदार एक्टिंग। पावरफुल कंटेंट। भारत के प्राचीन ज्ञान- विज्ञान पर आधारित एक मजबूत पटकथा। आज के यूथ को इंस्पायर करने वाली कहानी। इस कहानी को पर्दे पर जीवंत किया है शबाना आजमी, जूही चावला, जरीना वहाब, गिरीश कर्नाड, जैकी श्रॉफ और दिव्या दत्ता ने। ऋषि कपूर गेस्ट एपीयरेंस में हैं जिन्होंने कमाल का अभिनय किया है। लेकिन अफसोस की बात है कि इस फिल्म की चर्चा नहीं हुई। कई बार वक्त बेहतरीन फिल्मों के साथ इंसाफ नहीं करता। जैसा कि तीसरी कसम के साथ हुआ था। जीनियस-2 भी वक्त की नाइंसाफी का शिकार है। यह एक ऐसी फिल्म है जो निराशा में आशा का संचार करती है। यह बताती है कि ज्ञान की शक्ति से बढ़ कर कोई दूसरी शक्ति नहीं। अगर आप 'नॉलेज इज पावर’ में यकीन रखते हैं तो दुनिया में कोई भी आपको हरा नहीं सकता।

डिजिटल दौर में तुलसीदास जी

डिजिटल दौर में तुलसीदास जी

क्या संत तुलसीदास जी वैज्ञानिक थे ? क्या रामचरित मानस की रचना करने वाले तुलसीदास जी कवि होने के साथ-साथ गणितज्ञ भी थे ? आमतौर पर तुलसीदास जी को इसलिए परम पूज्य माना जता है कि उन्होंने पवित्र ग्रंथ रामचरित मानस की रचना की। लेकिन फिल्म जीनियस-2 में दिखाया गया है कि कैसे तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा में पृथ्वी और सूर्य की दूरी बतायी है। ऐसा नहीं है कि इस ज्ञान की जानकारी पहले नहीं थी लेकिन इस फिल्म में जिस तरह से इसका प्रस्तुतिकरण किया गया है,वह अद्भुत है। इस फिल्म ने आज की युवापीढ़ी को बताया है कैसे छह सौ साल पहले संत तुलसीदास जी ने चौपायी के माध्यम से पृथ्वी और सूर्य की दूरी की सटीक गणना कर ली थी। सबसे प्रभावित करने वाली बात ये है कि आज के डिजिटल दौर में इस कंसेप्ट को फिल्म का आधार बनाया गया है। कहानी में प्रवाह है और मनोरंजन भी भरपूर है।

फिल्म का प्लॉट

फिल्म का प्लॉट

शबाना आजमी ने विद्या सांवत की भूमिका निभायी है जो एक निजी स्कूल में गणित पढ़ाती हैं। उसी स्कूल मे जूही चावला (ज्योति ठाकुर) भी शिक्षिका हैं। वे भी पहले साइंस पढ़ाती थीं लेकिन स्कूल प्रबंधन के पक्षपाती रवैये के कारण उन्हें डांस और म्यूजिक का टीचर बना दिया जाता है। स्कूल की एक टीचर कामिनी गुप्ता (दिव्या दत्ता) जोड़तोड़ से प्रिंसिपल बन जाती है। कहानी में कोई मोड़ आते हैं। साजिश होती है। शबाना आजमी और चूही चावला दिल से बच्चों को पढ़ना चाहती हैं। वे स्कूल प्रबंधन और कामिनी गुप्ता की साजिश का विरोध करती हैं। इस फिल्म दिखाया गया है कि अगर मैथेमेटिक्स को भी मनोरंजक तरीके से पढ़ाया जाए तो साधारण बच्चे भी इसमें दिलचस्पी लेने लगते हैं। बहरहाल कहानी में एक टर्न तब आता है जब मैथ की टीचर शाबाना आजमी को नौकरी से निकाल दिया जाता है। इस बीच और भी घटना क्रम होते हैं और कहानी क्लाइमैक्स पर पहुंचती है।

फिल्म का क्लाइमेक्स

फिल्म का क्लाइमेक्स

फिल्म का क्लाइमेक्स सीन एक क्वीज कॉन्टेस्ट है। जिला प्रशासन की मध्यस्थता से शबाना आजमी-जूही चावला और स्कूल प्रबंधन के बीच एक शर्त लगती। शर्त के मुताबिक शबाना आजमी और जूही चावला को स्कूल प्रबंधन के 10 सवालों का जवाब देना है। अगर दोनों शिक्षिका इन सभी सवालों का सही सही जवाब दे देती हैं तो उन्हें 5 करोड़ रुपये का इनाम मिलेगा। स्कूल प्रबंधन को उन्हें सम्मान के साथ नौकरी पर रखना होगा। स्कूल की प्रिंसिपल कामिनी गुप्ता को शबाना आजमी और जूही चावला से माफी मांगनी होगी। अगर दोनों शिक्षिका हार गयीं तो उन्हें अयोग्य शिक्षक होने के आरोप को कबूल करना होगा। क्वीज मास्टर की भूमिका ऋषि कपूर ने निभायी है।

तुलसीदास जी दुनिया के महानतम वैज्ञानिक

तुलसीदास जी दुनिया के महानतम वैज्ञानिक

फिल्म में क्वीज कॉन्टेस्ट वाला दृश्य इतना प्रभावशाली है कि नजर स्क्रीन पर चिपकी रह जाती है। ऋषि कपूर शबाना आजमी और जूही चावला से 10 सवाल पूछते हैं। इन सवालों का चयन स्कूल प्रबंधन ने किया है। स्कूल की प्रिंसिपल यानी दिव्या दत्ता को भरोसा है कि शबाना आजमी और जूही चावला इन सवालों का जवाब नहीं दे पाएंगी। ये सभी सवाल जनरल नॉलेज का खजाना हैं। इन सवालों का जवाब और उसका रोमांचक प्रस्तुतिकरण देखने लायक है। आखिरी सवाल पांच करोड़ रुपये का है। ऋषि कपूर पूछते हैं, तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा में ब्रह्मांड का एक रहस्य बताया है, वो क्या है ? तब मैथ की टीचर शबाना आजमी मन ही मन हनुमान चालीसा पढ़ती हैं। जैसे ही वे18वीं चौपायी पर आती हैं रुक जाती हैं-जुग सहस्त्र जोजन पर भानु, लिल्यो ताहि मधुर फल जानू। शबाना आजमी कागज कलम निकाल कैलकुलेशन करने लगती हैं- एक युग का मतलब 12 हजार साल। सहस्त्र मतलब एक हजार। योजन मतलब 8 मील। भानु मतलब सूर्य। 12000 × 1000 × 8 = 9 करोड़ 60 लाख मील। एक मील में 1.6 किलोमीटर। 96000000 × 1.6 = 153600000 किलोमीटर। यानी तुलसीदास जी ने 600 साल पहले ही बता दिया था कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी 15 करोड़ 36 लाख किलोमीटर है। शबाना आजामी कहती हैं, पृथ्वी और सूर्य की दूरी की जो गणना दुनिया के वैज्ञानिकों ने 18वी शताब्दी में की थी उसकी जानकारी तुलसी दास जी ने 16वीं शताब्दी में ही दे दी थी। पवित्र पुस्तिका हनुमान चालीसा में निहित विज्ञान की इस जानकारी को जिस तरह फिल्माया गया है उसकी तारीफ बयां नहीं की जा सकती है। फिल्म देख कर ही इसकी खूबसूरती को महसूस किया जा सकता है।

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