अमोल कालिया: जब सिर पर शादी के सेहरे की जगह बंधा ''कफन'', मरने से पहले चौकी नं 5203 पर फहराया तिंरगा
25 years of kargil, देश इस साल कारगिल विजय दिवस की 25वीं सालगिरह मना रहा है। जुलाई में कारगिल युद्ध को 25 साल हो जाएंगे। इस युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सैंकड़ों वीर सपूत भारत माता के लिए कुर्बान हो गए। आज हम उन्हीं में एक बहादुर जवान के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। उनका नाम था कैप्टन अमोल कालिया।
कारगिल में 16000 फुट की उंचाई पर मौजूद चौकी संख्या 5203 को पाकिस्तान के कब्जे से छुड़ाते हुए अमोल देश के लिए शहीद हो गए। उनके साथ इस मिशन में 13 और जवान भी शहीद हुए थे। लेकिन इन वीर सपूतों ने मरने से पहले 25 पाकिस्तानियों को मार गिराया था।

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के चिंतपूर्णी में अमोल कालिया का जन्म 26 फरवरी 1978 को हुआ था। 12वीं की पढ़ाई के बाद अमोल ने 1991 में एनडीए ज्वाइन कर लिया। 1995 में आईएमए कमीशन प्राप्त करने के बाद सेकंड लेफ्टिनेंट अमोल कालिया को 1996 में खेमकरण सेक्टर में पोस्टिंग मिली। उनकी ज्यादातर ड्यूटी सियाचिन ग्लेश्यिर, कारगिल, द्रास व लेह आदि कठिन क्षेत्रों में रही।
घर में चल रही थीं शादी की तैयारियां-
अमोल से पहले उनके बड़े भाई अमन कालिया भी भारतीय वायु सेना ज्वाइन कर चुके थे। घऱ में पहले से देशभक्ति का लेकर माहौल था। जिसने अमोल को सेना में जाने के लिए प्रेरित किया। अमोल जब शहीद हुए तब उनके घर में उनकी शादी की तैयारियां चल रही थीं। अमोल का रिश्ता तय हो चुका था, बस शादी की तारीख तय करनी बाकी थी। जिसके लिए अमोल की छुट्टियों का इंतजार हो रहा था।
अमोल ने अपने आखिरी खत में लिखा कि, जून के आखिरी में आ रहा हूं, आप शादी की तारीख तय कर लेना। यहां सब ठीक है, बस दूसरी तरफ से घुसपैठ चल रही है, उसे जल्द निपटा लेंगे। करगिल से एक जून को अमोल कालिया का लिखा खत 9 जून को घर पहुंचा था। उसी दिन वह शहीद हो गए थे। अपने इस खत में अमोल कुछ अपनी बर्फ में खींच गई तस्वीरें भी भेजी थीं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
अमोल ने युद्ध से पहले घर ले लैंडलाइन फोन पर अपने माता-पिता से बात करने की कोशिश की थी, लेकिन वह अपने बड़े बेटे की शादी के बाद माता वैष्णो देवी के दरबार में गए थे। जिसके चलते वह अपने परिवार से बात नहीं कर सके। इसके बाद अमोल और उनके 13 साथियों को जून 1999 के पहले सप्ताह में बटालिक सेक्टर में 16,000 फुट ऊंची बर्फ से ढकी चौकी-5203 पर भेजा गया।
25 पाकिस्तानी से भारी पड़े 14 इंडियन जवान
जिसे पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कब्जा रखा था। कैप्टन अमोल कालिया ने अपने 13 जवानों के साथ हजारों फीट उंची चोटी पर दुश्मन के 25 पाकिस्तानी घुसपैठियों के साथ करीब 7 घंटे जमकर लड़ाई लड़ी। बताया जाता है कि, इस संघर्ष के शुरुआत में ही दो जवान शहीद हो गए, जिसके बाद कैप्टन अमोल कालिया ने मोर्चा संभाला। दोनों ओर से हो रही गोलीबारी में दुश्मन की ओर से आई गोली ने उन्हें आ लगी। जिसके वह घायल हो गए।
जख्मी हालत में अमोल कालिया ने एलएमजी गन उठाकर पाकिस्तानी घुसपैठियों पर हमला बोल दिया। भारी फायरिंग ने अमोल कालिया ने चार दुश्मनों को अपनी गोली का निशाना बनाया। उन्हें देख उनके साथी भी दुश्मनों पर टूट पड़े। वीर सैनिकों ने सभी दुश्मनों को मार गिराकर। चौकी-5203 पर तिरंगा लहराने के बाद घायल अमोल शहीद हो गए। अपने अद्भुद पराक्रम के लिए सेना ने उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया।












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