सिर्फ 23 साल के सिपाही गुरतेज सिंह ने शहीद होने से पहले कैसे ढेर किया एक दर्जन चीनी जवानों को

नई दिल्‍ली। 15 जून को पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीनी सेना के साथ टकराव हिंसक हो गया था। भारतीय सेना के बहादुरों ने चीनी सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया। 16 बिहार रेजीमेंट के 20 सैनिक शहीद हो गए जिनमें कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे। इन 20 बहादुरों में एक नाम 23 साल के सिपाही गुरतेज सिंह का भी है। पंजाब ने अपने चार नौजवानों को देश के नाम कुर्बान कर दिया है। जब आपको यह पता लगेगा कि किस तरह से गुरतेज सिंह ने किस तरह से चीनी सैनिकों धूल चटाई तो आप अपने आप ही उन्‍हें सैल्‍युट करेंगे।

15 जून को ही थी भाई की शादी

15 जून को ही थी भाई की शादी

15 जून की घटना में 16 बिहार, 3 पंजाब रेजीमेंट, दो आर्टिलरी यूनिट और तीन मीडियम रेजीमेंट के अलावा 81 फील्‍ड रेजीमेंट चीन को जवाब देने में शामिल थी। गुरतेज 3 पंजाब घातक प्‍लाटून के सिपाही थी। पंजाब के मानसा गांव के वीरे वाला डोकरा के रहने वाले गुरतेज जिस दिन शहीद हुए उसी दिन गांव में उनके बड़े भाई गुरप्रीत की शादी का जश्‍न चल रहा था। भाई को सेना अधिकारियों की तरफ से जश्‍न के दौरान ही लाडले छोटे भाई की शहादत की सूचना दी गई थी। गुरतेज बॉर्डर पर टेंशन और कोरोना वायरस महामारी के चलते वह शादी में शामिल नहीं हो सके।

'बोले सो निहाल' के साथ टूट पड़े दुश्‍मन पर

'बोले सो निहाल' के साथ टूट पड़े दुश्‍मन पर

3 पंजाब घातक प्‍लाटून को रिइनफोर्समेंट के लिए बुलाया गया था। सैनिकों के पास उनके धर्म से जुड़ी कृपाण और डंडे, छड़ें और तेज चाकू ही थीं। सिपाही गुरतेज पर पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के चार सैनिकों ने हमला बोला। गुरतेज जरा भी डरे नहीं बल्कि रेजीमेंट का युद्धघोष 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल,' चिल्‍लाते हुए उनकी तरफ बढ़े। गुरतेज ने दो को वहीं ढेर कर दिया जबकि दो ने उन्‍हें जान से मारने की कोशिश। गुरतेज चारों को पहाड़ी पर खींच कर ले गए और यहां से उन्‍हें नीचे गिरा दिया। गुरतेज भी अपना नियंत्रण खो दिया था और फिसल गए थे। लेकिन वह एक बड़े पत्‍थर की वजह से अटक गए और उनकी जान बच गई।

एक अकेले गुरतेज सवा लाख के बराबर!

एक अकेले गुरतेज सवा लाख के बराबर!

सिपाही गुरतेज की गर्दन और सिर पर गहरी चोटें आ गई थीं। उन्‍होंने अपनी पगड़ी को दोबारा बांधा और फिर से लड़ाई के लिए आगे बढ़ चले। उन्‍होंने चीनी जवानों का मुकाबला अपनी कृपाण से किया और एक चीनी सैनिक से उसका तेज हथियार भी छीन लिया। इसके बाद गुरतेज ने सात और चीनी जवानों को ढेर किया। अब तक गुरतेज 11 चीनी जवानों को ढेर कर चुके है। शहादत से पहले गुरतेज ने अपनी कृपाण से 12वें चीनी सैनिक को भी ढेर किया। गुरतेज अकेले लड़े लेकिन कहते हैं न कि एक-एक अकाली सिख सवा लाख के बराबर होते हैं, गुरतेज ने इसी बात को सही साबित कर दिया।

दिसंबर 2018 में शामिल हुए थे आर्मी में

दिसंबर 2018 में शामिल हुए थे आर्मी में

19 जून 2020 को पंजाब घातक प्‍लाटून उनके शव के साथ गांव पहुंची और यहां पर पूरे सैनिक सम्‍मान के साथ उनका अंतिम संस्‍कार किया गया। गुरतेज अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उन्‍होंने अपनी आखिरी कॉल में कहा था, 'मैं जल्‍द घर आऊंगा।' वह अपने घर तो लौटे मगर तिरंगे में लिपटे हुए। गुरतेज ने दिसंबर 2018 में आर्मी ज्‍वॉइन किया था। वह हमेशा से आर्मी में जाना चाहते थे और उनका वह सपना तब पूरा हुआ जब वह सिख रेजीमेंट का हिस्‍सा बने।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+