टीचर्स डे: महिला शिक्षक ने जान पर खेलकर बचाई 250 बच्चों की जान
शिमला। शिक्षक दिवस पर आज राष्ट्ररपति रामनाथ कोविंद के हाथों सम्मानित हो रहे शिक्षकों में हिमाचल के मंडी जिले की वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला की शिक्षिका मीना कुमारी भी हैं। मंडी के लड़कियों के स्कूल में टीजीटी मीना कुमारी ने जान जोखिम में डालकर 250 बच्चों की जान बचाई थी।

2008 में मीना के स्कूल में छठी से आठवीं तक मिड-डे मील की लॉन्चिंग की जा रही थी। इस दौरान एक सिलेंडर की पाइप फट गई और उसमें आग लग गई। मीना ने साहस और विवेक का परिचय देते हुए सिलेंडर को उठाकर कमरे से बाहर फेंक दिया। इससे बड़ा हादसा होने से बच गया और 250 बच्चों की जिंदगी बच गई। लेकिन इस घटना में मीना आग में झुलस गई। उन्हें जोनल अस्पताल मंडी में भर्ती करवाया गया। जहां तीन दिन तक वह दाखिल रहीं।
शिक्षक दिवस पर नेशनल अवार्ड के लिए चयनित शिक्षिका मीना को 2015 में स्टेट अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। मीना एनसीसी कैडेट्स को तराशने के लिए 20 वर्ष से एनसीसी ऑफिसर के रूप में कार्य कर रही हैं। उनके नेतृत्व में एनसीसी कैडैट्स 26 जनवरी और 15 अगस्त की राष्ट्रीय परेड में भी हिस्सा ले चुके हैं। सरकार के बेटी बचाओ-पढ़ाई और बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए मीना कुमारी से बेहतर उदाहरण कोई नहीं हो सकता। क्योंकि उनकी तीन बेटियां हैं। वह अपनी बेटियों को बेटों से बढ़कर मानती हैं। तीनों बेटियों उच्च शिक्षा ग्रहण कर उच्च पदों पर सेवाएं दे रही हैं।
मीना के पति प्रकाश डाक विभाग में सब पोस्ट मास्टर हैं। शिक्षिका मीना कुमारी का कहना है कि पारिवारिक और नौकरी की जिम्मेवारियों को निभाते हुए वह समाज सेवा में भी अपना समय देती हैं। एनसीसी विंग में लड़कियों को हर एक्टिविटी के लिए तैयार करती हैं। इनके सामाजिक दायित्व को निभाने के लिए इन्हें हिमोत्कर्ष, जिला प्रशासन व अन्य सामाजिक संगठनों की ओर से भी सम्मानित किया गया है।












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