पालमपुर सीट भाजपा के लिए बनी गले की फांस, बागी से पार्टी हुई बेचैन
शिमला। प्रदेश की राजनिति में यूं तो पालमपुर चुनाव क्षेत्र पहले ही खासा चर्चा में रहता रहा है। पालमपुर शांता कुमार व बृज बिहारी लाल बुटले की कर्मभूमि रही है। लेकिन इस बार सीनियर बुटेल नहीं बल्कि उनके बेटे अशीष चुनाव मैदान में हैं तो दूसरी ओर भाजपा ने प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्षा इंदु गोस्वामी को मैदान में उतारा है। दरअसल इंदु गोस्वामी के मैदान में उतरने से यह सीट भाजपा के लिये अहम हो गई है। इंदु गोस्वामी को भाजपा का टिकट पीएमओ के मार्फत मिला है। जिससे उनकी चर्चा हर ओर है। उन्हें भाजपा के सीएम पद की दौड़ में शामिल किया जा रहा है। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पालमपुर में रविवार को भाजपा की चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। दरअसल बुटेल परिवार के पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी प्रवीण शर्मा को हटाकर प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष इंदु गोस्वामी को प्रत्याशी बना कर भाजपा नेतृत्व ने महिलाओं को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व देने की पहल की है। यह पहल प्रवीण शर्मा की बगावत के कारण भाजपा की गले की फांस बन कर रह गई है।

शांता कुमार को अपना राजनैतिक गुरू मानने वाले प्रवीण शर्मा ने गुरू की सलाह दरकिनार कर पार्टी से बगावत कर दी और निर्दलीय चुनाव लडऩे का फैसला लिया। प्रवीण शर्मा अब एक ही बात मतदाताओं से कह कर सहानुभूति वोट बटोरने का प्रयास कर रहे हैं। कि मेरा क्या कसूर। प्रवीण शर्मा का कहना है उन्हें इस बात का मलाल नहीं है कि उनके स्थान पर महिला को टिकट क्यों दिया गया। उनका तो बस एक ही सवाल पार्टी से है कि अगर टिकट देना था तो पालमपुर विधानसभा क्षेत्र से किसी महिला को टिकट देते। बाहरी महिला को टिकट देकर पालमपुर क्षेत्र वासियों के साथ ज्यादती की गई है। इंदु गोस्वामी पालमपुर की नहीं बैजनाथ की रहने वाली हैं।

वैसे वर्तमान कांग्रेस प्रत्याशी आशीष बुटेल के पिता बृज बिहारी लाल बुटेल से प्रवीण शर्मा का पिछले पिछले तीन विधानसभा चुनावों में आमना-सामना हो चुका है। इसमें से दो चुनाव बृजबिहारी लाल बुटेल ने जीते थे और एक में प्रवीण शर्मा को विजय हासिल हुई थी.। पिछले चुनावों में प्रवीण शर्मा बुटेल से 10,000 मतों से पराजित हुए थे। इनकी पराजय का एक कारण गद्दी समुदाय के वोटों का दूलो राम के खाते में जाना भी था जो भाजपा छोडक़र नव-गठित प्रादेशिक राजनैतिक पार्टी के उम्मीदवार बन चुनाव में उतरे थे। तब उन्हें 6000 वोट मिले थे।
2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान दूलो राम ने फिर भाजपाका दामन थाम लिया था। अब दूलोराम भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार इंदु गोस्वामी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं, लेकिन धूमल के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं के बाद उनका क्या रुख रहता है, ये देखने वाली बात है। इंदु गोस्वामी का प्रचार धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री मोदी की पालमपुर रैली के बाद ही अधिकृत प्रत्याशी की स्थिति का आकलन हो पाएगा। देखना होगा कि पांच नवंबर की पीएम मोदी की पालमपुर रैली कोई प्रभाव छोड़ पाती है, या नहीं। उधर कांग्रेस उम्मीदवार आशीष बुटेल इस बगावत में कांग्रेस की जीत देख रहे हैं। उनके प्रचार का प्रमुख केंद्र पिता के विकास कार्यों का बखान है।
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