OPINION: लोगों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए ऐसे सोचती है हरियाणा सरकार
हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने पिछले 9 वर्षों के कार्यकाल में राज्य में अनेकों बदलाव किए हैं। बदलाव विकास और प्रगति के लिए किए गए हैं तो लोगों को बेवजह की शर्मिंदगी से बचाने के लिए भी हुए हैं। ये परिवर्तन किए गए हैं. गांवों और शहरों के नामों में। इसकी वजह से आज हजारों लोगों को गर्व के साथ अपने गांव का नाम लेने का अवसर मिला है।
हरियाणा में पहले कुछ गांवों के नाम तो ऐसे थे, जिसे वहां के लोग अपनी जुबान पर लाने तक से झिझकते थे। राज्य सरकार ने जनता की इन भावनाओं का कद्र करते हुए कई गांवों के नाम बदलकर उसे अच्छा नाम दिया है, जिसे बताने पर लोग गर्व का अनुभव कर सकते हैं। कुछ बदलाव ऐतिहासिक नजरिए से भी किए गए हैं।

हरियाणा में जनता के सम्मान के लिए नामों में हुए बदलाव
हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार की ओर से हाल में जो 'अचीवमेंट बुकलेट' जारी किए हैं, उसके अनुसार राज्य में 17 गांवों के नाम बदले गए हैं। इनमें से ज्यादातर की वजह यही है कि उनके नाम या तो शर्मनाक और विचित्र थे या फिर मौजूदा दौर के लिए उपयुक्त नहीं लग रहे थे। राज्य की जनता की ओर से कई गांवों के नाम बदलने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, क्योंकि कुछ नाम तो ऐसे थे, जिसे बताना भी उनके लिए मुश्किल हो जाता था।

अब शर्मिंदगी नहीं, गर्व और गौरव का एहसास
कुछ गांवों के नाम में हुए बदलाव से सवाल उठ सकता है कि वह अबतक क्यों नहीं हुए थे, पहले इस दिशा में किसी ने सोचा क्यों नहीं था? मसलन, हरियाणा में गांवों के नाम गंदा, किन्नर, कुतिया खेरी और गंदा खेरा भी थे। लेकिन, अब इनके नाम बदलकर क्रमश: अजीत नगर, गैबीनगर, वीरपुर और गुरुकुल खेरा कर दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक इन गांवों के लोग लंबे समय से ऐसे विचित्र नामों में बदलाव की मांग कर रहे थे। जाहिर है कि ये ऐसे नाम थे, जो बहुत बड़ी शर्मिंदगी की वजह बने हुए थे।

गुरगांव भी हो चुका है गुरुग्राम
हरियाणा में नामों में बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण गुड़गांव का है। सरकार ने इसे 2016 में गुरुग्राम कर दिया। क्योंकि, भारत में इस शहर का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसे महाभारत काल में पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य का गांव माना जाता है। प्राचीन काल से ही यह एक वैश्विक शहर है, लिहाजा नाम बदलने के माध्यम से भारत की अति-प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की कीर्ति का भी प्रचार-प्रसार हुआ है।
हरियाणा में गांवों के नामों में परिवर्तन का यह दौर 2015 के जून से शुरू हुआ था और इस साल अगस्त तक चला है। कुछ गांवों के नाम ऐतिहासिक वजहों से भी परिवर्तित किए गए हैं। जैसे मुस्तफाबाद,खिज्राबाद, बल रंगदान, आमीन और मोहम्मधेरी अब क्रमश: सरस्वती नगर, प्रताप नगर, बाल राजपुतान, अभिमन्यु नगर और ब्रह्मपुरी के नाम से जाने जाने लगे हैं।

एक कल्याणकारी सरकार का कार्य नागरिकों के कल्याण के लिए कार्य करना है। इसमें यह बात भी शामिल है कि जनता को सम्मानजनक जीवन भी मिले। खट्टर सरकार ने कुछ गांवों का नाम बदलकर इसी दिशा में कदम उठाया है और यह कितना बड़ा कदम है, इसका एहसास उन गांवों के लोगों को ज्यादा है।












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