OPINION: कृषि और किसानों के लिए समर्पित हरियाणा सरकार, प्रदेश का अन्नदाता हो रहा खुशहाल

हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार किसानों के लिए किस कदर समर्पित रही है, इसका उदाहरण सिर्फ इस बात से दिया जा सकता है कि पिछले करीब 9 वर्षों में राज्य में लगभग 54 योजनाएं कृषि और किसानों के कल्याण के लिए ही लागू की गई हैं।

हरियाणा में 17 खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5 से 10 फीसदी बढ़ाई गई है। इसी तरह 5 रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 635 रुपए से लेकर 2,000 रुपए प्रति क्विंटल तक बढ़ा है।

farmer and haryana cm manohar lal khattar

किसानों के लिए समर्पित हरियाणा सरकार
यदि राज्य सरकार की ओर से किसान-कल्याण योजनाओं से संबंधित आंकड़ों को देखें तो अंदाजा लग सकता है कि केंद्र के सहयोग से प्रदेश सरकार ने किसानों के समग्र विकास और उनकी आमदनी में पर्याप्त बढ़ोतरी सुनिश्चित करने के लिए कितने सारे उपाय किए हैं।

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किसानों की हर बाधा दूर कर रही है खट्टर सरकार
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आने वाले महीनों में इन योजनाओं को और भी बेहतर करने के निर्देश दे रखे हैं। मकसद एक ही है कि अन्नदाता की खुशहाली में किसी तरह की बाधा खड़ी न होने पाए। क्योंकि, यह बात किसी से छिपी नहीं है कि किस तरह से किसानों के हितों को तार-तार करने के लिए कुछ पार्टियों और एजेंडा-जीवियों ने निहित-स्वार्थी हथकंडे अपनाए हैं। लेकिन, जब सरकार सेवा के लिए समर्पित हो तो ऐसे स्वार्थी एजेंडे भी टिक नहीं पाते।

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प्रदेश का अन्नदाता हो रहा खुशहाल
आंकड़े बताते हैं कि 2014 में गेहूं का एमएसपी 1,400 रुपए प्रति क्विंटल था, जो कि 2022-23 और 2023-24 के लिए बढ़कर क्रमश: 2,015 और 2,125 रुपए हो चुका है। यह सिर्फ एक नजीर है, लगभग सभी फसलों के एमएसपी इसी तरह से कहां से कहां पहुंच चुके हैं।

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बढ़ रही मुवआवजे की रकम
इसी तरह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य में 19.72 लाख किसानों के बैंक खातों में 4,827 करोड़ रुपए डाले गए हैं। जबकि, 8 वर्षों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 27 लाख किसानों के खातों में 6,189 करोड़ रुपए मुआवजे के तौर पर डाले गए हैं। यही नहीं प्राकृतिक आपदाओं की वजह से खराब हुई फसलों की भरपाई के लिए दी जाने वाली रकम भी 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 15 हजार रुपए की गई है।

कृषि और किसान का हित सोचने वाली हरियाणा सरकार
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि फसलों के नुकसान के बाद 9,790 करोड़ रुपए मुआवजे के तौर पर सरकार ने जारी किए हैं। इनमें 269 करोड़ रुपए की राशि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान के भी शामिल हैं। यही नहीं सरकार ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए भी 1,000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से 103 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए हैं। वहीं अगर कोई किसान बैंकों से लोन लेता है तो उसके लिए जो पहले स्टांप शुल्क के तौर पर 2,000 रुपए वसूले जाते थे, उसको भी कम करके मात्र 100 रुपए किया जा चुका है।

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इनके अलावा मुख्यमंत्री किसान खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के तहत वित्तीय मुआवजे की रकम भी अब 10 लाख रुपए कर दी गई है और इसका लाभ कम से कम 1,334 किसान परिवारों को मिल चुका है। खट्टर सरकार किसानों को सोलर पंप के लिए 75% और बैटरी से संचालित स्प्रे पंप पर 50% की वित्तीय सहायता दे रही है।

वहीं किसानों की फसल अच्छी हो इसके लिए ट्रेनिंग सेंटर भी खोले जा रहे हैं। मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल से फसलों की खरीद की सुविधा है। 25 अनाज मंडियों में अटल किसान मजदूर कैंटीन के माध्यम से 10 रुपए में भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। किसान अपनी फसलों को ऑन-लाइन बेच सकें, इसके लिए 108 अनाज मंडियों को ई-नाम ( E-NAM )पोर्टल से जोड़ा गया है। 82 लाख से अधिक किसान इसके माध्यम से करीब 77 हजार करोड़ रुपए के कृषि उत्पाद बेच चुके हैं।

सोनीपत के गन्नौर में 537 एकड़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बागवानी बाजार विकसित किया जा रहा है, जिसपर 7,000 करोड़ रुपए की लागत आने वाली है। जाहिर है कि अगर सरकार अन्नदाताओं के लिए सोच रही है, तो इसका लाभ भी उनतक पहुंच रहा है। धीरे-धीरे जिस तरह से सब सुव्यवस्थित हो रहा है, वैसे-वैसे किसानों की आय भी बढ़ती जा रही है।

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