हरियाणा में तेज हुआ किसान आंदोलन, महापंचायतों में उमड़ रही महिलाओं की भारी भीड़
केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में रविवार को हरियाणा के चरखी दादरी में बुलाई गई किसानों की 'महापंचात' में महिला किसानों ने बड़ी की संख्या में भाग लिया।
चंडीगढ़। Farmers agitation: केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में रविवार को हरियाणा के चरखी दादरी में बुलाई गई किसानों की 'महापंचात' में महिला किसानों ने बड़ी की संख्या में भाग लिया। बुजुर्गों और युवाओं के अलावा किसानों विरोध के समर्थन में महिलाओं की भागीदारी ने इस आंदोलन को और मजबूती देने का काम किया है। इस आंदलोन में शुरूआत से ही महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली है।

हमने दिल्ली, गाजीपुर और सिंघु बॉर्डर पर भी महिला किसानों को इस विरोध में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते देखा। महिलाओं की भारी संख्या रविवार को हरियाणा के चरखी दादरी में हुई महापंचायत में भी देखने को मिली। इस महापंचायत को संबोधित करके हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, यह विरोध एक जन आंदोलन है और यह असफल नहीं होगा।
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किसान विरोध को और अधिक मजबूत करने के लिए महापंचायत के अलावा एक ही साथ दो रैलियों का भी आयोजन किया गया जिनमें से एक रैली को बीकेयू (राजेवाल) के प्रमुख बलवीर सिंह राजेवाल और दूसरी को भारतीय किसान यूनियन के महासचिव युधिवीर सिंह संबोधित कर रहे थे। इस दौरान खापों के प्रतिनिधि, धार्मिक नेता और राजनीतिक नेता भी उपस्थित थे। हरियाणा के चरखी दादरी में महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि वर्तमान में किसानों का जो विरोध चल रहा है यह किसानों की आजादी से जुड़ा है, और किसी भी जाति या मजहब से इसका कोई ताल्लुक नहीं है। यह जन आंदोलन है और यह असफल नहीं होगा।
उन्होंने आगे कहा कि खाप ने मुगलों और गोरों से लड़ाइयां लड़ी हैं और इसलिए वे आज भी प्रासंगिक हैं, उन्हें एकजुट रहना चाहिए। टिकैत ने कहा, "उन्होंने (सरकार) पंजाब और हरियाणा को बांटने की कोशिश की और अब वे खाप में मतभेद पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। टिकैत ने कहा कि वर्तमान सरकार व्यवसाइयों की समर्थक है, और वे भूख का व्यवसाय करना चाहते हैं। वे भूख बढ़ने पर भोजन की कीमतें बढ़ाएंगे। लेकिन भोजन को तिजोरी के अंदर बंद नहीं रखा जा सकता है। वहीं बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि 500 किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और बुजुर्गों के अनुभव के एक साथ आने पर ही यह आंदोलन अपने तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचा।
वहीं, किसान नेता राजू मान ने कहा कि महापंचायत में भारी जन सैलाब इस बात का प्रमाण है कि अब किसानों के साथ-साथ उनके बच्चे भी जाग चुके हैं, और मांगें पूरी होने तक वह नहीं रुकेंगे। राजस्थान के भरतपुर में, मीर खेड़ा मदरसे के मौलाना अरशद ने रैली की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मेवात क्षेत्र के लोग कृषि की रक्षा के लिए लड़ेंगे, जो उनकी आजीविका का मुख्य आधार था। बीकेयू के नेताओं गुरनाम सिंह चादुनी और युधिवीर सिंह ने पुष्टि की कि यदि केंद्र का वास्तव में इरादा है तो किसान भारतीय जनता पार्टी से बात करने के लिए तैयार हैं।
टिकैत के बेटे गौरव टिकैत, उनके करीबी सहयोगी गुलाम मोहम्मद जोला और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर रावण ने भी महापंचायत को संबोधित किया। इस दौरान जोला ने कहा कि किसानों के आंदोलन ने विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत किया है, जो 2013 की मुजफ्फरनगर हिंसा के बाद पहले से परेशान थे। हरियाणा के तीन कांग्रेस विधायक - आफताब अहमद (नूंह), मामन खान (फिरोजपुर झिरका) और मोहम्मद इलियास (पुहाना) - किसानों की मांगों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए महापंचायत में शामिल हुए। कांग्रेस विधायक अहमद ने कहा महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी किसानों का समर्थन तब तक जारी रखेगी जब तक कि विवादास्पद कानून वापस नहीं ले लिए जाते। महापंचायत में हरियाणा किसान सभा के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह भी उपस्थित थे।












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