Kadaknath Murga :ग्वालियर के कड़कनाथ मुर्गे से लोग भगा रहे सर्दी, UP, राजस्थान राज्यों में भी भारी डिमांड
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति का कहना है कि लोग एडवांस पैसा देकर कड़कनाथ मुर्गे की बुकिंग कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश में इस समय भीषण ठंड कहर बरपा रही है। लोग अपने शरीर में गर्माहट लाने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं और खानपान में भी बदलाव कर रहे हैं। सर्दी के चलते कड़कनाथ मुर्गों की डिमांड बढ़ गई है। ग्वालियर के केंद्र में उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों से मांग आ रही है। लेकिन इन्हें पूर्ति नहीं हो पा रही और लंबी वेटिंग है।
अब हालात यह हो गए हैं कि, भारी मांग के चलते देश के कोने कोने से 10 हजार कड़कनाथ मुर्गा की वेटिंग है। इसी वजह से ग्वालियर का कृषि विज्ञान केंद्र इन मुर्गों की सप्लाई नहीं कर पा रही है। बताते चलें कि यूं तो कड़कनाथ मुर्गा एमपी के अलीराजपुर और झाबुआ में पैदा होता है, लेकिन ग्वालियर का कृषि विश्वविद्यालय हेचरिंग के जरिए अंडों से कड़कनाथ के चूजे तैयार कर देश के अलग-अलग राज्यों में भेजे जाते हैं।
इस वजह से बड़ी मांग
एमपी में इन दिनों काफी ठंड है। इसका सबसे बड़ा कारण यह माना जाता है कि, कड़कनाथ मुर्गे का चिकन ठंडी में काफी गर्म होता है। ठंडी में इसका चिकन खाना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है। यही कारण है कि, ठंडी में कड़कनाथ मुर्गा की भारी मांग आ रही है। यह मांग एमपी से ही नहीं बल्कि राजस्थान उत्तर प्रदेश समेत दिल्ली से है।
राजमाता विजयराजे कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र में अभी 1 माह में लगभग 2 हजार चूजे तैयार हो रहे हैं। जबकि यहां अभी करीब 10 हजार चूजों की मांग, उत्तर प्रदेश राजस्थान और दिल्ली समेत एमपी के अन्य जिलों से आ रही है।
एमपी के ग्वालियर में स्थित राजमाता विजयराजे विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाला कृषि विज्ञान केंद्र एमपी का तीसरा कड़क नाथ का हैचरी सेंटर है। यहां पर हेचरी के जरिए कडकनाथ के अंडे से चूजे तैयार किए जाते हैं। मध्य प्रदेश के साथ-साथ अन्ना राज्यों में सप्लाई किए जाते हैं।
यही कारण है कि जब सर्दी की शुरुआत होती है तो इनकी मांग काफी बढ़ जाती है। यहां से एमपी के साथ-साथ महाराष्ट्र गुजरात राजस्थान उत्तर प्रदेश समेत हैदराबाद के भी लोग कड़कनाथ के चूजे और मुर्गा मुर्गी लेने पहुंचते हैं। कड़कनाथ मुर्गा का यह हेचरी सेंटर ग्वालियर के अलावा एमपी में 2 अन्य जगह और स्थित है। जहां ग्वालियर में यह कृषि विज्ञान केंद्र प्रतिवर्ष लगभग 60 हजार कड़कनाथ मुर्गों के चूजे तैयार करता है और मध्य प्रदेश समेत देश के अलग-अलग राज्यों में सप्लाई करता है।
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