महात्मा गांधी के परपोते राजमोहन बोले- लोगों को निडर रहना तो वे सिखा गए, नफरत मुक्त नहीं बना सके
गांधीनगर. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर जारी प्रदर्शनों के बीच महात्मा गांधी के प्रपौत्र राजमोहन गांधी ने हिंसक घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा है कि गांधीजी लोगों को डर से मुक्त रहना तो समझा गए, लेकिन नफरत नहीं करना सिखाने में विफल रहे।'
मालूम हो कि, राजमोहन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं। वे गुजरात स्थित आईआईटी गांधीनगर में 'भारत की खोज' कार्यक्रम के दौरान गांधीजी के संदर्भ में बोल रहे थे।

सीएए के विरोध के बीच गांधीजी के प्रपौत्र का बयान
राजामोहन ने कहा, ''ब्रिटेनियों के भारत छोड़ने में गांधीजी का योगदान कितना था, इस बात का कोई महत्व नहीं है। चूंकि संसाधनों की कमी के चलते अंग्रेज वैसे भी भारत छोड़कर चले ही जाते। मगर, गांधीजी ने जिस तरह भारत में आजादी का आंदोलन लड़ रहे नेताओं को एक किया, उन्हें एकमत होने के लिए राजी किया यह बात ज्यादा अहम थी। उन्होंने भारतीयों को डर मुक्त होना सिखाया। लोगों को जाति, धर्म में मिलकर रहने और बिना किसी तरह के भेदभाव के जीने की जरूरत बताई। हालांकि, वे उन्हें नफरत मुक्त बनाने में विफल रहे।''

'गांधीजी ने कभी भारत को हिंदू राष्ट्र के तौर पर नहीं स्वीकारा'
''गांधीजी लोकतंत्र, समानता व स्वतंत्रता के हिमायती थे, उनके इन्हीं विचारों को संविधान निर्माताओं ने स्वीकार किया और संविधान में जगह दी, यह बड़ी बात रही। इस्लाम के आधार पर पाकिस्तान के जन्म के बाद भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का संविधान निर्माताओं पर भारी दबाव था। लेकिन गांधीजी ने हिंदू धर्म आधारित भारत की पहचान को कभी भी स्वीकार नहीं किया। उनकी अगुवाई में लोगों ने हिंदू राष्ट्र के विचार को ठुकरा दिया।''

'आज भी एक वर्ग कहता है भारत हिंदू राष्ट्र हो'
''भारत में आज भी कई लोगों अथवा एक तबके का मानना है कि भारत की पहचान हिंदू धर्म के आधार पर होनी चाहिए और हिंदुओं के लिए भारत प्रथम राष्ट्र होना चाहिए। जबकि, सच यह है कि भारत में सामाजिक व सांस्कृतिक विविधता के बावजूद लंबे समय से लोकतंत्र चला आ रहा है। हमें लोगों को 'नफरत मत करो' यह बात समझाने की जरूरत है।''












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