इतिहास के पन्नों से- आप कितना जानते हैं राजा टोडरमल को
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) मुगलकाल के स्वर्णिम काल यानी अकबर के दौर में दो हिन्दुओं बीरबल और राजा मान सिंह का बहुत जिक्र होता है, पर राजा टोडर मल का उस तरह से जिक्र नहीं होता। हालांकि वे भी अकबर के बेहद करीबी थे। वे उनके दरबार में राजस्व मंत्री थे। वे भी हिन्दू थे।
भूमि की पैमाइश
उन्होंने ही सबसे पहले भूमि की पैमाइश की। जाति के खत्री बनिया थे और पैसे-कौड़ी के मामले में उस्ताद। हालांकि कुछ इतिहासकार कहते हैं कि वे कायस्थ थे। क्या मजाल कि दरबार में एक पैसे की भी हेरफेर हो जाए। वे ब्रज में कविता भी रचते थे।
सीतापुर में जन्म
उनके पिता का निधन जब हुआ तब वे बहुत छोटे थे। उनके जन्म स्थान को लेकर भी विवाद हैं। पर जानकारों का कहना है कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हुआ।
आगरा का काम
कहते हैं कि अकबर ने टोडरमल को आगरा के कामकाज को देखने की भी जिम्मेदारी दी थी।उनका निधन 8 नवंबर, 1589 को लाहौर में हुआ। उनके दोनों पुत्र धारी और कल्याण दास भी अकबर के दरबार में ही थे। अकबर उन्हें पुत्रों की तरह ही स्नेह करता था।
टोडरमल की कविता का आनंद आप भी लीजिए।
जार को बिचार कहा गनिका को लाज कहा,गदहा को पान कहा आँधरे को आरसी।
निगुनी को गुन कहा दान कहा दारिदी को,सेवा कहा सूम को अरँडन की डार सी।
मदपी की सुचि कहा साँच कहा लम्पट को, नीच को बचन कहा स्यार की पुकार सी।
टोडर सुकवि ऐेसे हठी ते न टारे टरे,भावै कहो सूधी बात भावै कहो फारसी।
हालांकि देश के बहुत से शहरों में बीरबल और राजा मान सिंह के नाम पर सड़कें और चौराहें है, पर टोडरमल के नाम पर दिल्ली के अलावा शायद ही किसी शहर में कोई सड़क हो। राजधानी में बंगाली मार्केट इलाके में टोडरमल रोड़ है। हालांकि ये बताना कठिन है कि टोडरमल रोड में रहने वाले या आने वाले कितने लोगों को मालूम है कि वे कौन थे।













Click it and Unblock the Notifications