Shrikant Jichkar: कौन थे डॉ. श्रीकांत जिचकर, जिन्हें कहा जाता है भारत का सबसे पढ़ा-लिखा शख्स
भारत के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे नागरिक के तौर पर डॉ श्रीकांत जिचकर का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है। यही नहीं, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी उनसे संपर्क किया था। डॉ. जिचकर के पास 19 मास्टर की डिग्रियां थीं।

Shrikant Jichkar: आपने अपने आस-पड़ोस में जरूर सुना होगा कि कोई पढ़ने में बहुत तेज है, किसी के पास डबल बीए या डबल एमए की डिग्रियां हैं। किसी ने आईएएस या आईपीएस की परीक्षा पास कर ली, लेकिन हम जिस शख्स के बारे में बता रहे हैं उनके पास एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, बल्कि 19 पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्रियां थीं। यही नहीं, उन्होंने 42 यूनिवर्सिटीज की परीक्षाएं पास की थी, जिनमें से ज्यादातर में उन्हें मेरिट मिली। इसके अलावा वो आईएएस और आईपीएस भी रह चुके थे।
डॉ. श्रीकांत जिचकर का नाम भारत के सबसे ज्यादा क्वालिफाइड शख्स के रूप में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल है यानी इनसे ज्यादा डिग्रीधारी शख्स भारत में नहीं हुआ। उनके पास गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का भी लेटर आया था। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने श्रीकांत जिचकर को लिखे लेटर में बताया था कि अभी तक किसी ने भी दुनिया के सबसे ज्यादा क्वालिफाइड शख्स का दावा नहीं किया है। हालांकि, बाद में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इस पदवी को स्टैंडरडाइज कर दिया।
कौन थे डॉ. श्रीकांत जिचकर?
डॉ. श्रीकांत जिचकर का जन्म 14 सितंबर 1954 को नागपुर के एक मराठी परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी पहली डिग्री नागपुर यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस और एमडी में ली। इसके बाद जिचकर ने मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद उन्होंने बीएएलएलबी, एलएलएम (इंटरनेशनल लॉ), एमबीए, बिजनेस मैनेजमेंट में डॉक्टरेट, बैचलर इन जर्नलिज्म, संस्कृत लिटरेचर में पीएचडी किया।
जिचकर यहीं नहीं रूके, इनके अलावा उनके नाम 19 मास्टर डिग्रियां भी थीं, जिनमें पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, समाज शास्त्र, इकोनॉमिक्स, संस्कृत, इतिहास, अंग्रेजी लिटरेचर, मनोविज्ञान, राजनीति शास्त्र, एनसिएंट हिस्ट्री, कल्चर, आर्किलोजी, फिलॉस्पी आदि शामिल हैं। उन्होंने अपनी ज्यादातर डिग्रियां फर्स्ट डिवीजन में प्राप्त की थीं। उनके पास कई यूनिवर्सिटीज के गोल्ड मेडल्स भी थे। श्रीकांत जिचकर ने 1973 से लेकर 1990 के बीच 42 यूनिवर्सिटीज में परीक्षाएं दी थीं।
यूपीएससी परीक्षा दो बार पास की
1978 में श्रीकांत जिचकर ने यूपीएससी (सिविल सर्विस) की परीक्षा पास की, जिसमें उन्हें इंडियन पुलिस सर्विस यानी आईपीएस कैडर मिला। हालांकि, वह ज्यादा समय तक आईपीएस नहीं रहे, दो महीने के बाद ही उन्होंने आईपीएस के पद से इस्तीफा दे दिया और साल 1980 में दोबारा सिविल सर्विस का एग्जाम पास किया। इस बार उन्हें आईएएस का कैडर मिला, लेकिन चार महीने के बाद ही उन्होंने आईएएस के पद से भी इस्तीफा दे दिया।
सांसद, विधायक और मंत्री भी बने
श्रीकांत जिचकर 1980 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीते और विधायक भी बने। श्रीकांत रामचंद्र जिचकर 1980 से लेकर 1985 तक महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे और सरकार में राज्यमंत्री भी बने। उन्होंने कांग्रेस पार्टी की टिकट पर कटोल से चुनाव जीता था। इसके बाद 1986 से लेकर 1992 तक डॉ जिचकर महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य के तौर पर निर्वाचित हुए। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री के तौर पर उन्होंने 14 विभाग भी संभाले थे।
साल 1992 में वह महाराष्ट्र से दिल्ली, राज्यसभा सांसद के तौर पर पहुंचे। उन्होंने साल 1992 में नागपुर में संदीपनी स्कूल की स्थापना की थी। जितकर 1998 तक राज्यसभा सांसद रहे थे। उन्होंने 1998 और 2004 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन इन दोनों चुनाव में वह बेहद कम अंतर से पराजित हुए।
संस्कृत के उत्थान में अहम योगदान
डॉ श्रीकांत जिचकर ने महाराष्ट्र के नागपुर में कवि कुलगुरू कालिदास संस्कृत विद्यालय स्थापित किया। उन्होंने संस्कृत भाषा में डॉक्टरेट भी किया। उनके संस्कृत में लिखे रिसर्च पेपर संस्कृत स्कूल में इस्तेमाल किये जाते हैं। यही नहीं, उन्होंने संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए 1993 में संस्कृत यूनिवर्सिटी स्थापित करने की पैरवी की थी। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुधाकर राव नाइक के कार्यकाल में जिचकर को नागपुर में संस्कृत विश्वविद्यालय खोलने हेतु एक सदस्यीय कमेटी का हिस्सा बनाया गया। सरकार ने डॉ. जिचकर की स्टडी को स्वीकार करते हुए नागपुर में संस्कृत विश्वविद्यालय खोलने की स्वीकृति दी और उन्हें इसका कुलपति बनाया गया।
डॉ. श्रीकांत जिचकर ने संस्कृत भाषा में किए गए अपने अध्ययन में बताया कि भारत में 3 करोड़ पांडुलिपियां संस्कृत भाषा में लिखी हुई हैं, जिनमें से केवल 16 लाख पांडुलिपियों को ही सूचीबद्ध किया गया है। संस्कृत यूनिवर्सिटी स्थापित करने से बाकि बची पांडुलिपियों को सूचीबद्ध करने और प्रकाशित करने में सहायता मिलेगी। अपनी 19 मास्टर्स की डिग्रियों के बाद डॉ जिचकर नागपुर यूनिवर्सिटी में डॉ ऑफ लॉ कर रहे थे, जिसमें उन्होंने दो रिसर्च पेपर्स भी सबमिट किए थे।
सड़क दुर्घटना में हुई मौत
डॉ. श्रीकांत जिचकर अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अब तक उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भारत के सबसे क्वालिफाइड शख्स के तौर पर दर्ज है। 2 जून 2004 को नागपुर से 61 किलोमीटर दूर कोंधाली के पास सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी कार एक तेज रफ्तार ट्रक से टकरा गई और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। उनके साथ उनके रिश्तेदार श्रीराम धावड़ भी थे, जिनको इस दुर्घटना में कई गंभीर चोटें आई थी।
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