New Zealand Prime Minister: कौन है न्यूजीलैंड के नये प्रधानमंत्री क्रिस हॉपकिंस
क्रिस हॉपकिंस न्यूजीलैंड के अगले प्रधानमंत्री बन गए हैं। चुनावी साल में संभावित आर्थिक मंदी को देखते हुए क्रिस हॉपकिंस के लिए राहें आसान नहीं हैं।

New Zealand Prime Minister: न्यूजीलैंड के नए प्रधानमंत्री के पद पर क्रिस हॉपकिंस ने शपथ ली है। पूर्व प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने 19 जनवरी को इस्तीफा दिया था। लेबर पार्टी के हॉपकिंस न्यूजीलैंड के 41वें प्रधानमंत्री बन गए हैं। इससे पहले हिपकिंस कैबिनेट मंत्री के तौर पर शिक्षा, पुलिस और पब्लिक सर्विस का कामकाज देख रहे थे।
क्रिस हॉपकिंस पहली बार साल 2008 में न्यूजीलैंड के सांसद के तौर पर चुने गए थे। 2020 में आई कोरोना महामारी के दौरान हॉपकिंस के काम को काफी सराहा गया था। न्यूजीलैंड पहला ऐसा देश बना था, जिसने खुद को कोरोनामुक्त घोषित किया था। 50 लाख की जनसंख्या वाले इस देश में अक्टूबर में आम चुनाव होने वाले हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अर्डर्न ने यह साफ किया है कि वो आगामी आम चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी।
कौन हैं क्रिस हॉपकिंस?
न्यूजीलैंड के नए प्रधानमंत्री क्रिस हॉपकिंस का पूरा नाम क्रिस्टोफर जॉन हॉपकिंस है, जिनका जन्म हट्ट वैली में 5 सितंबर 1978 को हुआ था। हिपकिंग के पैरेंट्स न्यूजीलैंड काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च से जुड़े थे। उन्होंने हट्ट इंटरमीडिएट और वाटरलू प्राइमरी स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई की, जिसके बाद वेलिंगटन के विक्टोरिया यूनिवर्सिटी से पॉलिटिक्स और क्रिमिनोलॉजी में ग्रेजुएशन किया। साल 2008 में हॉपकिंस ने पहली बार 29 साल की आयु में लेबर पार्टी की तरफ से रेमुटाका सीट पर चुनाव लड़ा था और संसद पहुंचे थे। अपने संसदीय कार्यकाल के शुरुआती 9 साल में हॉपकिंस लेबर पार्टी के प्रवक्ता और एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़ी कई पार्लियामेंट्री कमिटी के सदस्य रहे थे।
कोरोना महामारी के दौरान हुए फेमस
न्यूजीलैंड में हर तीन साल के बाद आम चुनाव कराए जाते हैं। हिपकिंस ने साल 2008 से लेकर 2020 तक रेमुटाका सीट से लगातार 5 बार चुनाव जीता हैं। 2017 से लेकर अब तक लेबर पार्टी की सरकार में उनके पास शिक्षा विभाग, पब्लिक सर्विस मंत्रालय के साथ-साथ लीडर ऑफ हाउस का पद था। कोरोना महामारी के दौरान हिपकिंस को स्वास्थ्य मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिल गया था।
COVID-19 के दौरान क्रिस हिपकिंस स्ट्रेट फॉरवर्ड बात करने वाले राजनेता के दौर पर काफी चर्चा में रहे थे। उन्होंने न्यूजीलैंड में कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए सख्त एडवाइजरी जारी किए थे, जिनमें बॉर्डर बंद करना शामिल था। हालांकि, हॉपकिंस को इसकी वजह से आलोचनाएं भी झेलनी पड़ी थी।
चीन के साथ सुधारने होंगे संबंध
न्यूजीलैंड के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री क्रिस हॉपकिंस के लिए चीन के साथ संबंध सुधारना सबसे बड़ी चुनौती में शामिल है। चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यावसायिक साझेदार रहा है। हर साल चीन न्यूजीलैंड से 20 बिलियन डॉलर यानी 1.6 लाख करोड़ रुपये का सामान आयात करता हैं। चीन हर साल न्यूजीलैंड से चीज, मीट और लकड़ी खरीदता है। इसके बदले चीन से हर साल 15 बिलियन डॉलर यानी 1.2 लाख करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट, कपड़े और मशीनरी निर्यात किया जाता है। कोरोना महामारी के बाद चीन और न्यूजीलैंड के संबंध में खटास आई थी, जिसके बाद चीन से व्यापारिक संबंध खराब हो गए थे।
क्रिस हॉपकिंस ने लेबर मिनिस्टर कारमेल सेपुलोनी को अपना सेकेंड इन कमांड और देश का पहला उप-प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। कारमेल को उप-प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्त करना हॉपकिंस की राजनीतिक संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा है। संभावित आर्थिक मंदी से न्यूजीलैंड को उबारने के लिए चीन के साथ फिर से व्यवसाय शुरू करना और देश की आर्थिक समस्या को खत्म करना उनका लक्ष्य है।
बढ़ती मंहगाई पर लगाना होगा कंट्रोल
न्यूजीलैंड में बेरोजगारी दर तो 3.3 प्रतिशत है, लेकिन महंगाई दर 7.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। न्यूजीलैंड के रिजर्व बैंक ने संभावित आर्थिक मंदी को देखते हुए बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट बढ़ाकर 4.25 प्रतिशत कर दी है, ताकि महंगाई को काबू किया जा सके। इस चुनावी साल में देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना हॉपकिंस के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
आठ महीने के बाद होने वाले आम चुनाव में लेबर पार्टी को जिताना भी हॉपकिंस के लिए सबसे बड़ी चुनौती में शामिल है। पिछले दिनों हुए ऑपिनियन पोल में सत्तारूढ़ लेबर पार्टी मुख्य विपक्षी नेशनल पार्टी से पिछड़ती हुई दिख रही है। प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद हॉपकिंस ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि उनका पहला लक्ष्य देश के लोगों के सामने ब्रेड और बटर की समस्या यानी आर्थिक समस्या को खत्म करना होगा। यही नहीं, हॉपकिंस ने बताया कि चीन का दौरा भी उनकी प्रॉयरिटी लिस्ट में शामिल है।
यह भी पढ़ें: क्रिस हिपकिंस बने न्यूजीलैंड के 41वें प्रधानमंत्री, क्या जेसिंडा अर्डर्न की तरह कमा पाएंगे नाम?












Click it and Unblock the Notifications