Cartoons of 90s: 1990 के दशक के लोकप्रिय भारतीय कार्टून और कॉमिक्स अब कहां
1990 के दशक तक भारत के बच्चों में कार्टून कॉमिक्स बेहद लोकप्रिय थे, लेकिन टीवी के प्रसार के साथ उनकी लोकप्रियता कम होने लगी और बाद में सेटेलाइट टीवी, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के दौर में बहुत कम हो चुकी है।

Cartoons of 90s: पिछले दिनों एक खबर आई कि दुनिया का चहेता कार्टून कैरेक्टर 'मिकी माउस' जल्द ही एक सार्वजनिक संपत्ति होने वाला है। यूएस में कॉपीराइट कानून के अनुसार किसी भी पात्र के अधिकार उसके प्रकाशन के 95 साल बाद समाप्त हो जाते हैं। दरअसल, जिस मिकी माउस के कॉपीराइट का अधिकार डिज्नी ने खोया है, इसमें कथित तौर पर मिकी माउस के कैरेक्टर का सिर्फ 'स्टीमबोट विली' (Steamboat Willie) संस्करण शामिल है।
'स्टीमबोट विली' का कैरेक्टर आज के मिकी माउस से काफी अलग है। इसके कुछ कैरेक्टर पहले से भी सार्वजनिक संपत्ति हो चुके हैं जिसमें पूह (Pooh) और उसके दोस्तों के कैरेक्टर शामिल हैं।
अमेरिका में शुरु हुए इस कार्टून कैरेक्टर का सफर दुनिया ने देखा हैं। भारत में भी मिकी माउस के करोड़ों प्रशंसक हैं। जैसे मिकी माउस मशहूर हुआ था, ठीक वैसे ही भारत में भी कई कार्टून कैरेक्टर जिनमें चाचा चौधरी और साबू से लेकर पिंकी, बिल्लू, मोटू पतलू, नागराज आदि बहुत मशहूर हुए थे।
जब पूछते थे, 'अकल चंपक आ गई क्या...'
90 के दशक से पहले जन्में लोगों को याद होगा कि उन दिनों अमर चित्र कथा, पंचतंत्र, चंपक, टिंकल, चंदामामा, लोटपोट, तेनाली रमन, चाचा चौधरी सहित अनेक कॉमिक्स आते थे। उन दिनों सभी बच्चों को इनके आने का बेसब्री से इंतजार भी रहता था और एक-दो बार दुकानदार से पूछ भी आते थे कि अंकल इस महीने की चंपक और लोटपोट आ गई क्या?
इंद्रजाल कॉमिक्स से शुरू हुआ कार्टून कॉमिक्स का चलन
भारत में सबसे पहले नारायण देबनाथ ने 1962 में बंगाली भाषा में हांडा भोंडा नाम के कार्टून कॉमिक्स की शुरुआत की थी। 1950 और 60 के दशक में विदेशी अंग्रेजी कॉमिक्स भारत में बिकते थे और अमीर परिवारों के बच्चे ही उन्हें पढ़ते थे।
उसके बाद टाइम्स ऑफ इंडिया प्रकाशन समूह ने इंद्रजाल कॉमिक्स नाम से अपने कॉमिक्स अंग्रेजी के अलावा हिंदी में भी प्रकाशित करने शुरू किए, जिनमें फैंटम, मैनड्रेक, फ्लैश गॉर्डन इत्यादि विदेशी कैरेक्टर प्रमुख होते थे।
बच्चों में विदेशी कॉमिक्स की लोकप्रियता और भारतीय इतिहास के बारे में कम जानकारी देखकर अनंत पै ने 1967 में अमर चित्रकथा की शुरुआत की। इनमें भारतीय महापुरुषों, महाकाव्यों, ऐतिहासिक नायक नायिकाओं, कथाओं, इत्यादि पर आधारित चित्रकथाओं (कॉमिक्स) का प्रकाशन होता था। अमर चित्र कथा की बिक्री तेजी से बढ़ी और विदेशी कॉमिक्स को पछाड़ कर देश के बच्चों और वयस्कों सभी में लोकप्रिय हो गईं।
चाचा चौधरी बने पहले लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर
दिवंगत कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा ने 1969 में 'लोटपोट' नाम की मैगजीन के लिये कार्टून बनाना शुरू किया था। इसके बाद 1971 में चाचा चौधरी पर आधारित कॉमिक्स को पहली बार लोगों के सामने लाया गया।
यह कैरेक्टर इतना लोकप्रिय हुआ कि world encyclopedia of comics में प्राण कुमार शर्मा को Walt Disney of India कहा गया। यूं तो प्राण ने श्रीमती जी, बिल्लू, पिंकी, रमन जैसे कई कैरेक्टर बनाये लेकिन चाचा चौधरी जैसी लोकप्रियता किसी भी कैरेक्टर को नहीं मिली। टीवी और मोबाइल के इस दौर में आपको जानकर खुशी होगी कि डायमण्ड कॉमिक्स प्राइवेट लिमिटेड आज भी इस कॉमिक्स को प्रकाशित करता है।
राज कॉमिक्स का था अपना 'टशन'
उन दिनों राज कॉमिक्स भी प्रचलन में थी। राज कॉमिक्स में नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, जम्बू, बिल्लू जैसे फेवरेट पात्र होते थे। उन दिनों मनोज कॉमिक्स भी आती थी। माना जाता था कि मनोज कॉमिक्स, राज कॉमिक्स और डाइंमड कॉमिक्स एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी जैसे थे। आज मनोज कॉमिक्स ने कॉमिक्स बनाना बंद कर दिया है। हालांकि राजा पॉकेट बुक्स के राज कॉमिक्स आपको आज भी रेलवे बुक्स स्टॉल में मिल ही जाएंगे।
चम्पक भी थी सबकी चहेती पत्रिका
कॉमिक्स की बात हो और चंपक का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। लोकप्रियता के मामले में चम्पक को पछाड़ पाना बेहद मुश्किल था। बच्चों के साथ बड़े भी इसे बेहद दीवाने थे। इसमें कहानियां, चुटकुले व पहेलियों के अलावा और भी बहुत कुछ होता था। दिल्ली बुक कम्पनी इसे आज भी प्रकाशित करती है।
तुलसी कॉमिक्स में भी थे जबरद कैरेक्टर
तुलसी कॉमिक्स 1980 एवं 90 के दशक की एक भारतीय कॉमिक्स प्रकाशक कंपनी थी, जो पहले तुलसी पॉकेट बुक्स का भाग हुआ करती थी। हालांकि तुलसी कॉमिक्स अपने निम्न दर्जे की कहानियों के कारणों से कभी उच्च स्तर की सफलता हासिल ना कर सका। जितनी सफलता अन्य कंपनी जैसे डायमंड कॉमिक्स, राज कॉमिक्स एवं मनोज कॉमिक्स ने हासिल की। इस वजह से सन् 2004 तक कंपनी बंद हो गई थी। हालांकि अब तक की सबसे लंबी कहानियों के तौर पर जम्बू श्रंखला की कॉमिक्स कई वर्षों तक चली थीं।
ये कॉमिक्स भी थे प्रचलित
1978 में स्थापित डायमंड कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित अकबर बीरबल की कहानियां भी बहुत प्रचलित थी। सम्राट अकबर और उनके बेहद चालाक मंत्री बीरबल की इन कहानियों में बीरबल बड़ी से बड़ी समस्याओं के बेहद आसान और मजेदार समाधान ढूंढा करते थे। आज भी इसका प्रकाशन किया जाता है। बीरबल की तरह तेनाली रमन पर आधारित Tales Of Tenali Raman भी काफी प्रचलित था। बीरबल की तरह तेनाली रमन भी बेहद चतुरता से हर समस्या का समाधान खोज लेते थे।
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