Milk Price Rise: दूध के दामों ने बिगाड़ा बजट, जानिये कीमतों के बढ़ने के कारण
दूध की कीमतों में फिर इजाफा किया गया है। इस वजह से आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ एक बार फिर बढ़ गया है।

Milk Price Rise: भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। साल 1951 में भारत में दूध उत्पादन 17 मिलियन टन था, जो सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2019-20 में बढ़कर 198.4 मिलियन टन हो गया। इसके बाद भी दूध की कीमत दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। 27 दिसंबर से मदर डेयरी ने अपने दूध की कीमतों में फिर से इजाफा किया है। साल 2022 में मदर डेयरी ने पांचवीं बार कीमतें बढ़ाई हैं। जिसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। वहीं मदर डेयरी की तरह अमूल भी चार बार दूध के दाम बढ़ा चुका है। अगर हम इस कीमत की बढ़ोतरी को जोड़ें तो मदर डेयरी 20 फीसदी तक दूध के दामों में बढ़ोतरी कर चुकी है। कंपनी ने केवल दूध के दाम ही नहीं बढ़ाए बल्कि घी, पनीर, खोवा से लेकर दही, लस्सी तक के भी रेट बढ़ा दिए हैं।
आखिर क्यों महंगा हो रहा दूध?
सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में हर दिन लगभग 30 लाख लीटर दूध की आपूर्ति करने वाली कंपनी मदर डेयरी से जब भी दूध की कीमत को लेकर सवाल पूछा गया तो वो हमेशा लागत का हवाला देकर रेट बढ़ाने की बात कहती है। इस साल के अगस्त महीने में अमूल ने भी दूध की कीमतों में इजाफा किया था तब उसने भी बढ़ती लागत का हवाला दिया गया था। वहीं मार्च में अमूल ने कहा था कि ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने की वजह से दूध की कीमतें बढ़ाई गई हैं। इस बीच मदर डेयरी ने कहा था कि ऑपरेशन और प्रोडक्शन की कॉस्ट बढ़ी हैं। वहीं पशुओं के चारे की कीमत दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं। वैसे 2021 के मुकाबले चारे की कीमत में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
पशुओं का चारा हुआ महंगा
साल 2022 में पशु चारे की कीमत पिछले 9 साल के रिकॉर्ड को तोड़ चुकी है। कई राज्यों में गेहूं का भूसा 700 से 800 रुपये प्रति मन (40 किलो) के भाव बिक रहा है। जबकि बाजरे की फसल (Pearl Millet Crop) नुकसान के कारण चारा सकंट की समस्या दोबारा बढ़ गई। साथ ही सरसों और कपास की खल, चोकर और दूसरे अनाज के भाव में भी बढ़त दर्ज की गई है। पहले सरसों की खल 1,600 रुपये क्विंटल के भाव पर बिक रही थी और फिलहाल यह 3,000 रुपये क्विंटल पर पहुंच गयी है। आकंड़ों की मानें तो आज देश 12 से 15 प्रतिशत हरा चारा और 25 से 26 फीसदी सूखे चारे की कमी का सामना कर रहा है।
अब यहां गौर करने वाली बात यह है कि इन सबका सीधा असर उन किसानों पर पड़ता है, जो अपने जीवन-यापन के लिए मवेशी पालते हैं। जिसके चलते दूध के उत्पादन की लागत बढ़ रही है। इस वजह से दूध कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है। बता दें कि पिछले साल सितंबर में चारा महंगाई दर 20.57 प्रतिशत पर थी, जबकि इस साल अगस्त में यह 25.54 प्रतिशत रही थी।
बढ़ोतरी की जिम्मेदार कच्चे दूध की खरीद
मदर डेयरी के प्रवक्ता का कहना है कि इस साल पूरे डेयरी उद्योग में दूध की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर देखा जा रहा है। चारे की बढ़ती लागत और अनियमित मानसून के कारण कच्चे दूध की कीमतों पर दबाव पड़ा है और कच्चे दूध की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। कंपनी भी इन बढ़ी कीमतों को लेकर किसानों के पक्ष में है। दरसअल कंपनियों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों को आर्थिक रूप से मदद मिलेगी, ताकि वे कभी भी दूध की क्वालिटी से कोई समझौता न करें।
कब-कब बढ़े दूध के भाव
साल 2022 में सबसे पहले मार्च महीने में दूध के सभी प्रकारों (फुल क्रीम, टोंड, डबल टोंड) पर 2-2 रुपये बढ़ाए गये थे। इसके बाद अगस्त में सभी तरह के दूध पर 2 रुपये की वृद्धि की गयी। उसके बाद अक्टूबर में दिल्ली-एनसीआर के साथ आसपास के कुछ बाजारों में फुल क्रीम दूध और गाय के दूध के दामों में दो रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। फिर, नवंबर में कंपनी ने फुल क्रीम दूध के दाम में एक रुपये बढ़ा दिया और टोकन दूध के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। इसके बाद अब 27 दिसंबर को कंपनी ने फिर से दूध के दाम को दो रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिया है। इस तरह देखा जाए तो मदर डेयरी ने दूध की कीमत में 9 रुपये का इजाफा किया है।
वहीं दूसरी तरफ देश की सबसे बड़ी दूध वितरण कंपनी अमूल भी पीछे नहीं है। इस साल अमूल ने भी 7 रुपये की वृद्धि की है। अमूल ने मार्च, अगस्त, अक्टूबर और नवंबर महीनों में कभी 2 रुपये तो कभी 1 रुपये करके बढ़ोतरी की है।
दूध की कीमतों पर सरकार क्यों चुप?
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दूध की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी लगातार संसद से लेकर बाहर तक केंद्र सरकार पर हमलावर है लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, बीते दिनों, 13 दिसंबर को लोकसभा में पशुओं के चारे की महंगाई का मुद्दा उठा था। इसके बाद 14 दिसंबर को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने होलसेल प्राइज इंडेक्स (WPI) यानी थोक कीमतों का आंकड़ा जारी किया था, जिसमें नवंबर में पशु चारे की इंडेक्स वैल्यू 225.7 रिकॉर्ड की गई है, जबकि पिछले साल ये इंडेक्स वैल्यू 176.8 दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों के अनुसार साल भर के अंदर ही चारे की कीमत में 28 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई है।
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