West Bengal Politics: टूट की कगार पर TMC? कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी जिन्हें ममता के बागी विधायक बनाएंगे LOP
TMC split in West Bengal 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा सियासी संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की खबरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि पार्टी के करीब 60 विधायक बागी खेमे के साथ खड़े हो गए हैं और निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
यदि यह दावा सही साबित होता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में महाराष्ट्र की तरह बड़ा राजनीतिक विभाजन देखने को मिल सकता है, जहां 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी।

विधानसभा अध्यक्ष को आज सौंपी जाएगी चिट्ठी: दो-तिहाई बहुमत का दावा
HT की रिपोर्ट के मुताबिक- पार्टी के बागी गुट ने दावा किया है कि टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से लगभग 60 विधायकों ने रीताब्रत बनर्जी के समर्थन में अपने हस्ताक्षर (Signatures) दे दिए हैं। संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law - दलबदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी दल को आधिकारिक तौर पर विभाजित करने या नया गुट बनाने के लिए कम से कम दो-तिहाई (2/3) विधायकों की आवश्यकता होती है। टीएमसी के मामले में यह जादुई आंकड़ा 54 विधायकों का है, जबकि बागियों के पास 60 विधायकों का समर्थन होने का दावा है।
संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, किसी भी दल के कम से कम दो-तिहाई विधायक यदि किसी नए समूह या विलय का समर्थन करते हैं तो उसे वैधानिक मान्यता मिल सकती है। TMC के मामले में यह संख्या 54 विधायकों के आसपास बनती है।
ममता बनर्जी ने BJP पर लगाया साजिश का आरोप
कोलकाता में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) दिल्ली से TMC को तोड़ने की साजिश रच रही है। ममता ने कहा,दिल्ली से TMC को तोड़ने की साजिश की जा रही है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। हम इसका डटकर मुकाबला करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की एकता बरकरार है और वह किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं।
कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी?
ऋतब्रत बनर्जी पहले CPI(M) से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2017 में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में वाम दल से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने TMC का दामन थामा और 2024 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। अब वही नेता TMC के भीतर बगावत का चेहरा बनकर उभरे हैं। ऋतब्रत ने कहा-मैं खुद को आज भी तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा मानता हूं। लेकिन पार्टी का नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं से कट गया है। लोगों को TMC का बेहतर संस्करण चाहिए।
बगावत की इनसाइड स्टोरी: कैसे सुलगी असंतोष की चिंगारी?
टीएमसी के भीतर यह विवाद 6 मई को तब शुरू हुआ जब पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने की सिफारिश की। लेकिन 11 मई को रीताब्रत बनर्जी और संदीपान साहा नाम के दो विधायकों ने स्पीकर रथिंद्र बोस को लिखित शिकायत दी कि शोभनदेव की नियुक्ति वाले दस्तावेजों पर कुछ विधायकों के जाली हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके बाद स्पीकर ने उस सिफारिश को होल्ड पर रख दिया।
विवाद बढ़ता देख ममता बनर्जी ने 1 जून को रीताब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया। लेकिन असली झटका 31 मई को लगा जब ममता बनर्जी ने स्थिति को संभालने के लिए सभी 80 विधायकों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी, जिसमें से सिर्फ 20 विधायक पहुंचे। इसके चलते बैठक रद्द करनी पड़ी और यह साफ हो गया कि बहुमत ममता के हाथ से निकल चुका है। बागी विधायकों का असली असंतोष ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के कामकाज के तरीके को लेकर है।
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यह पूरा घटनाक्रम साल 2022 की उस याद को ताजा करता है जब एकनाथ शिंदे ने तत्कालीन महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के खिलाफ विद्रोह किया था और बाद में चुनाव आयोग ने उनके गुट को ही असली 'शिवसेना' मानकर तीर-कमान का सिंबल दे दिया था।
टीएमसी के पास वर्तमान में लोकसभा में 28 सांसद और राज्यसभा में 13 सांसद हैं, इसलिए विधानसभा के बाद यह लड़ाई संसद और चुनाव आयोग तक भी खिंच सकती है। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में सबकी नजर विधानसभा अध्यक्ष के अगले कदम और बागी विधायकों के दावों पर टिकी हुई है। यदि बागी खेमे के पास वास्तव में दो-तिहाई विधायकों का समर्थन है तो राज्य की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ सकता है।














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