Farmer Suicides: मराठवाड़ा में क्यों अधिक हैं किसानों की आत्महत्या के मामले
महाराष्ट्र में मराठवाड़ा एक ऐसा क्षेत्र है जहां किसानों द्वारा आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। पिछले लगभग 20 वर्षों से यह समस्या साल-दर-साल गंभीर होती जा रही है।

Farmer Suicides: डिवीजनल कमिश्नर के अनुसार महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में वर्ष 2022 में कुल 1023 किसानों ने आत्महत्या की। जबकि 2021 में 887 किसानों ने आत्महत्या की थी और बात की जाए साल 2001 की तो तब यह आंकड़ा सिर्फ एक किसान का था। आइये समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर मराठवाड़ा के किसान ऐसी कौन सी समस्या से जूझ रहे हैं कि उनके पास सिर्फ आत्महत्या का एकमात्र विकल्प बचता है?
महाराष्ट्र का कौन सा इलाका मराठवाड़ा कहलाता है
मराठवाड़ा में औरंगाबाद, बीड, जालना, लातूर, नांदेड़, उस्मानाबाद, परभानी और हिंगोली जिले आते हैं। यह क्षेत्र अपनी संस्कृति एवं इतिहास की वजह से भी जाना जाता है क्योंकि अजंता और एल्लोरा भी यही औरंगाबाद में स्थित है। कृषि उत्पादन को देखें तो यहां मुख्य रूप से रूई, बाजरा, ज्वार, गन्ना, गेहूं, संतरा, और आम की खेती होती है। मगर बीते दो दशकों से यह क्षेत्र गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है, और इसकी वजह से कृषि उत्पादन और स्थानीय किसानों पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्याएं
मराठवाड़ा क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या, हाल के वर्षों में एक बहुत ही चिंता का विषय बन गया है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, 2014 और 2019 के बीच मराठवाड़ा क्षेत्र में कुल 3,786 किसानों ने आत्महत्या की। जबकि 2001 में मराठवाड़ा के 8 जिलों में मिलाकर सिर्फ एक आत्महत्या का मामला सामने आया था लेकिन पिछले 20 वर्षों में हालत इतनी खराब हो गई कि यह आंकड़ा वर्ष 2020 में 773 और वर्ष 2021 में 887 हो गया था। वर्ष 2001 से अब तक मराठवाड़ा के 8 जिलों को मिलाकर कुल 10,431 आत्महत्याओं के मामले सामने आए हैं।
मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या के पीछे मुख्य कारण
मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या करने के पीछे कई कारण हैं और इन कारणों में सबसे मुख्य कारण है सूखा पड़ना। मराठवाड़ा में जब बरसात नहीं होती तो सूखा पड़ने लगता है तब पानी की कमी फसल को बर्बाद कर देती है। दूसरा मुख्य कारण है लगातार बढ़ता कर्जा, क्योंकि ज्यादातर किसान गरीब हैं और वे फसल उगाने के लिए कर्ज लेते हैं। मगर जब सूखे के कारण उनकी फसल बर्बाद हो जाती है तो गरीब किसान अपना कर्ज नहीं उतार पाते और ऐसे ही करते-करते यह कर्जा बढ़ता रहता है। एक समय ऐसा आता है वे कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाते है और आत्महत्या कर लेते हैं।
क्या है मराठवाड़ा में जल संकट के मुख्य कारण
ग्राउंड वॉटर का अत्यधिक दोहन - एक कृषि क्षेत्र होने की वजह से मराठवाड़ा में फसलों की सिंचाई के लिए ग्राउंड वॉटर पर बहुत ज्यादा निर्भरता है। जिसकी वजह से क्षेत्र में ग्राउंड वॉटर बहुत कम हो गया और लगातार घटता ही जा रहा है।
अपर्याप्त वर्षा - यहां बरसात बहुत कम होती है इसलिए स्थानीय लोग इसे प्रकृति का श्राप मानते है। इस कारण से भी यहां जल संकट गहराता जा रहा है और लगभग हर वर्ष सूखा पड़ता है।
वॉटर स्टोरेज की कमी - मराठवाड़ा में वॉटर स्टोरेज जैसे बांध और तालाबों की भारी कमी है। अतः मानसून के दौरान जो कुछ भी पानी गिरता है उसे सही से जमा नहीं किया जाता। बाकि पानी बेहद गर्मी के कारण लुप्त हो जाता है।
अपर्याप्त जल प्रबंधन - मराठवाड़ा क्षेत्र जल प्रबंधन की समस्या से भी लड़ रहा है। दरअसल, यहां ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर जैसे सिंचाई सिस्टम नहीं हैं जोकि पानी को बचाने में बहुत सहायता प्रदान करते हैं।
कितना है मराठवाड़ा में भूजल स्तर
मराठवाड़ा में भूजल स्तर (ग्राउंडवॉटर लेवल) हाल के वर्षों में बहुत तेजी से गिर रहा है। ग्राउंडवॉटर सर्वे एंड डेवलपमेंट एजेंसी (GSDA) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में मराठवाड़ा में औसत ग्राउंड वॉटर लेवल जमीनी स्तर से 5.75 मीटर नीचे था। कुछ क्षेत्रों में जमीनी स्तर से 8 मीटर नीचे स्तर दिखा और यहां तक कि कुछ जगहों पर तो यह 10 मीटर के भी नीचे था। और यही बात की जाए वर्ष 1990 के आंकड़ों की तो यह जमीनी स्तर से 2 मीटर नीचे था। GDSA भी मराठवाड़ा में गिरते जल स्तर के पीछे, सिंचाई के लिए भूजल उपयोग, बारिश की कमी, और संसाधनों का सही इस्तेमाल न करने को गिरते जल स्तर का कारण मानता है। 2019-20 के महाराष्ट्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार मराठवाड़ा में वार्षिक 12 मिलीयन क्यूबिक मीटर भूजल इस्तेमाल किया गया था।
राज्य सरकार के प्रयास
राज्य सरकार ने वॉटर स्टोरेज और मैनेजमेंट स्कीम बनाई है जिसमें बांध और कुएं के माध्यम से जल संग्रह किया जा रहा है। चूंकि, मराठवाड़ा में अंडरग्राउंड वाटर लेवल बहुत ज्यादा नीचे चला गया है तो सरकार ने पानी खींचने के लिए नयी तकनीक ईजाद की है जिसकी वजह से बहुत गहराई से भी पानी ऊपर खींचा जा सकता है। मराठवाड़ा क्षेत्र में किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गरीब किसानों को लोन देने की व्यवस्था भी की है और वह भी बहुत कम दरों पर।
सिंचाई के साधारण तरीके से पानी का वेस्टेज बहुत ज्यादा होता है तो सरकार ने मराठवाड़ा क्षेत्र के किसानों को स्प्रिंकलिंग इरीगेशन और ड्रिप इरिगेशन जैसे नए संसाधनों का इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने 'जलयुक्त शिवार अभियान' की शुरुआत भी की थी जिसका मकसद था हर वर्ष 5000 महाराष्ट्र के गाँवों को सूखा मुक्त करना। दिसंबर 2022 में 'जलयुक्त शिवार 2.0' अभियान भी लॉन्च किया गया जिसका भी मकसद है कि हर साल महाराष्ट्र के 5000 गांवों को सूखा मुक्त बनाया जाए।
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