Green Fuel: हरित ईंधन क्या होता है, किसानों और पर्यावरण के लिए कैसे है यह लाभदायक
देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती मांग, उनके मूल्य एवं पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देना आज के समय की आवश्यकता बन गयी है।

Green Fuel: सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने एकबार कहा था कि "मुझे पूरा विश्वास है कि पांच साल बाद देश से पेट्रोल खत्म हो जाएगा। आपकी कारें और स्कूटर पूरी तरह हरित ईंधन (हाइड्रोजन, एथेनॉल, सीएनजी या एलएनजी) पर आधारित होंगे।" वास्तव में, पर्यावरण प्रदूषण और ईंधन की महंगाई दोनों ही बेहद गंभीर समस्याएं हैं। बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है तो वहीं बढ़ती डीजल-पेट्रोल की मांग व कीमतें आम जनता को बेहाल कर रही है। जिसके निवारण में ग्रीन फ्यूल (Green Fuel) एक अहम भूमिका निभा सकता है।
क्या होता है ग्रीन फ्यूल
ग्रीन फ्यूल (हरित ईंधन), ऊर्जा का वह स्रोत है जो उपयोग करने पर बहुत कम प्रदूषण उत्पन्न करता है। इसके एक प्रकार को जैव ईंधन (Bio Fuel) भी कहा जाता है। यह बायोमास यानि पौधे या शैवाल सामग्री या पशु अपशिष्ट से प्राप्त होता है। पेट्रोलियम, कोयला और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन के विपरीत, अक्षय ऊर्जा (जो प्रदूषणकारक नहीं है, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत ऊर्जा, बायो गैस आदि) को भी हरित ऊर्जा और ईंधन का एक स्रोत माना जाता है। इसे पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में मान्यता मिल गयी है। इसमें बायो इथेनॉल, बायो गैस, बायो डीजल, बायो हाईड्रोजन व बायो ब्यूटेनॉल आदि आते हैं।
कैसे बनता है ग्रीन फ्यूल
किण्वन विधि (बायोमास को इथेनॉल में परिवर्तित करने की विधि) द्वारा बायो इथेनॉल (अक्षय ईंधन/अल्कोहल) बनाया जाता है। इस विधि में सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया और खमीर आदि) पादप शर्करा को चयापचय (metabolism) कर इथेनॉल का उत्पादन करते हैं। इस विधि से गन्ना, ज्वार, मक्का, बाजरा, धान, गेहूं और दूसरे बीज-अवशेषों से भी इथेनॉल बनाया जा सकता है। इसी प्रकार बायोडीजल को सोयाबीन तेल या ताड़ के तेल, वनस्पति अपशिष्ट तेलों और पशु वसा जैसे वनस्पति तेलों से प्राप्त किया जाता है। ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल को पानी से बनाया जाता है। पानी का इलेक्ट्रोलिसिस (सोलर एनर्जी द्वारा) करके हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है। हाईड्रोजन एक पावरफुल ईंधन है, जिसको काफी मात्रा में उत्पन्न किया जा सकता है।
पर्यावरण व किसानों के लिए कैसे है लाभदायक
हरित ईंधन एथेनॉल, जिसको खेतों से निकली पराली, खाद्य पदार्थों के अवशेष और दूसरी कई चीजों से बनाया जाता है, वायु प्रदूषण को कम करने में काफी हद तक सहायक है। इसके साथ ही यह किसानों की आय बढ़ाने का भी काम कर रहा है। क्योंकि भारत में जहां चावल, मक्का, गन्ना और गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और इनके कृषि अवशेष का निपटान भी एक बड़ी समस्या है, ऐसे में इथोनॉल उत्पादन में इन फसलों के कृषि अवशेष, जो अभी तक जलाये जाते थे, को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। यही कारण है कि इथोनॉल कारखाने लगने से न सिर्फ वायु प्रदूषण, बल्कि महंगे तेल की समस्या को हल करने में भी खासी मदद मिलेगी तथा किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। इसके साथ ही साथ इथोनॉल उत्पादन प्लांट लगाए जाने से रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।
दुनिया को ग्रीन फ्यूल का विकल्प देने में भारत की भूमिका काफी अहम हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पर्याप्त मात्रा में धूप होती है, जिससे ग्रीन हाइड्रोजन को तैयार करने में मदद मिल सकती है।
कार्बन उत्सर्जन में भारत व अन्य देशों की स्थिति
भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ को आश्वस्त किया है कि 2030 तक भारत कार्बन उत्सर्जन की मौजूदा मात्रा को 33-35 प्रतिशत घटा देगा और 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य भी हासिल करेगा। भारत जहां प्रतिवर्ष 20.70 लाख किलो टन (प्रति व्यक्ति 1.7 टन) कार्बन उत्सर्जन करता है, वहीं अमेरिका सर्वाधिक 1.03 करोड़ किलो टन (प्रति व्यक्ति 7.4 टन) कार्बन उत्सर्जन करता है।
ग्रीन फ्यूल के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए कदम
भारत सरकार हाइड्रोजन और अमोनिया को भविष्य के प्रमुख हरित ईंधन के रूप में मान रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने के अंतर्गत 75वें स्वतंत्रता दिवस अर्थात् 15 अगस्त 2021 को 'राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन' प्रारंभ किया गया था। जिसका उद्देश्य जलवायु लक्ष्यों को पूरा करना तथा भारत को ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाना है। इस मिशन के अंतर्गत 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन व नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से संबंधित विकास में मदद मिलेगी।
इस मिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन/अमोनिया विनिर्माता पावर एक्सचेंज से नवीकरणीय ऊर्जा खरीद सकते है अथवा अन्य माध्यम से अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित कर सकते हैं। यह नीति नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के उत्पादन को बढ़ावा देगी, क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लिए मूल सामग्री होगी। जिससे स्वच्छ ऊर्जा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद प्राप्त होगी।
केंद्र सरकार द्वारा करीब 199 एथेनॉल प्लांट स्थापित करने की भी मंजूरी दी गई हैं। इसके तहत गोंड़ा में एशिया का सबसे बड़ा एथेनॉल प्लांट बनाया गया है। इसके अलावा बरेली, पानीपत, सूरत में भी इथेनॉल प्लांट बनाये जा रहे हैं।
ग्रीन फ्यूल के नकारात्मक पहलू
ग्रीन फ्यूल के सकारात्मक पहलू के साथ-साथ कुछ नकारात्मक पहलू भी है। जैसे फिलहाल ग्रीन हाइड्रोन फ्यूल की कीमत बहुत ज्यादा है। साथ ही यह अधिक ज्वलनशील होता है, जिससे सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कृषि भूमि पर खाद्यान्न उत्पादन अधिक हो, यह प्राथमिकता छोड़कर यदि बायो फ्यूल के लिए फसलों का उत्पादन होने लगा तो भविष्य में देश की खाद्य सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह भी लग सकता है।
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