'मेरी और ट्रंप की राय एक नहीं', अमेरिका-ईरान डील पर क्यों आगबबूला हुए नेतन्याहू?
US-Iran Deal: मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक सरगर्मी और सैन्य तनाव के बीच एक बड़ा विरोधाभास उभरा है। एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान ने बीते कुछ महीनों से जारी तनाव को कम करने के लिए एक नए समझौते पर सहमति बना ली है वहीं दूसरी तरफ इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह अपने आक्रामक रुख से पीछे नहीं हटेगा।
आगामी शुक्रवार को जिनेवा में इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने हैं, जिसे तनाव टालने की बड़ी पहल माना जा रहा है। हालांकि, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश इस अंतरराष्ट्रीय प्रयास के बावजूद अपनी स्वतंत्र राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर लगातार अडिग रहेगा।

जिनेवा समझौते के बीच नेतन्याहू ने दी दोटूक चेतावनी
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़े शब्दों में कहा कि भले ही वैश्विक मंच पर कोई भी कूटनीतिक समझौता क्यों न हो जाए, लेकिन ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकना इजरायल का मुख्य लक्ष्य है और इस मुद्दे पर वे किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।
नेतन्याहू- ईरान के साथ कोई नरमी नहीं!
नेतन्याहू ने कहा, इजराइली सेना ने हालिया महीनों में देश को विनाश के खतरे से बचा लिया है। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि सुरक्षा अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। सीमाओं पर सभी प्रकार की सुरक्षा चुनौतियों का समाधान होने तक यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने कहा ईरान पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
अमेरिका और ईरान के समझौते को लेकर दिया अल्टीमेटम
अनेतन्याहू ने कहा, अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले समझौते की शर्तों का इजरायल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कूटनीतिक रुख दिखाते हुए साफ किया कि इजरायल क्षेत्र में मौजूद खतरों को विफल करने के लिए अपने स्वतंत्र सैन्य ऑपरेशनों को पहले की तरह जारी रखेगा। इस रुख से अमेरिका और इजरायल के बीच के रणनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं।
नेतन्याहू बोले- ट्रंप और मेरी एक जैसी राय नहीं
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी नेतृत्व और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वे और ट्रंप मजबूत पॉटर्नर हैं। दोनों नेताओं की अक्सर कई महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मामलों पर सहमत होते हैं, लेकिन कई बार दोनों देशों के बीच स्पष्ट रणनीतिक असहमतियां भी उभरती हैं।
ईरान- अमेरिका पर क्यों भड़के नेतन्याहू?
इस बयान के जरिए इजरायल ने यह संदेश दिया है कि वह अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले पूरी तरह अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ही लेगा। भले ही अमेरिकी प्रशासन सुरक्षा नीतियों को लेकर ईरान के खिलाफ लचीला रुख अपनाए, इजरायल अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए जरूरी रणनीतिक तैयारी करता रहेगा।
इजराइल बोला-सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं
नेतन्याहू ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुकाबला करने के लिए जो भी आवश्यक सैन्य या खुफिया कार्रवाई करनी होगी, उनका देश बिना किसी संकोच के वह कदम उठाएगा। इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं या कूटनीतिक वादों पर निर्भर नहीं रह सकता।
लेबनान बफर जोन और हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान
क्षेत्रीय जमीनी अभियानों के मुद्दे पर नेतन्याहू ने लेबनान में जारी सैन्य प्रयास का विशेष जिक्र किया। उन्होंने घोषणा की कि जब तक इजरायल के लिए जरूरी होगा, इजराइली सेना सीमावर्ती बफर जोन में तैनात रहेगी। यह तैनाती हिजबुल्लाह के किसी भी अचानक रॉकेट हमले और सीमा पार घुसपैठ को नाकाम करने के लिए बेहद जरूरी है।
इजराइली सैन्य बलों ने लेबनान के उन महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया है, जिनका उपयोग पहले हिजबुल्लाह इजरायल को निशाना बनाने के लिए करता था। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि अपनी उत्तरी सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए इजरायल किसी भी कीमत पर इन विशिष्ट बफर स्थानों को खाली नहीं करेगा।
US-ईरान के बीच किन मुद्दों पर हुआ समझौता?
- अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई।
- लेबनान फ्रंट को भी इस सीजफायर व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा।
- अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का आश्वासन दिया।
- ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त की जाएगी।
- 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए दोबारा खोला जाएगा।
- अमेरिकी सेना ईरान के आसपास के कुछ रणनीतिक क्षेत्रों से धीरे-धीरे पीछे हटेगी।
- ईरान के तेल निर्यात पर लगी कुछ पाबंदियों में ढील दी जाएगी।
- ईरान को अपने तेल राजस्व तक फिर से पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।
- अमेरिका और उसके सहयोगी देश पुनर्निर्माण कार्यों के लिए लगभग 300 अरब डॉलर तक की सहायता देंगे।
- अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच विस्तृत वार्ता जारी रहेगी।
- ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने की अपनी NPT प्रतिबद्धता दोहराई।
- बातचीत की अवधि में अमेरिका कोई नए प्रतिबंध लागू नहीं करेगा।
- वार्ता के दौरान अमेरिका कोई नई सैन्य कार्रवाई भी नहीं करेगा।
- ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियां चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएंगी और समझौते की निगरानी के लिए एक अलग तंत्र बनाया जाएगा।














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