Vaibhav Sooryavanshi ने खोया आपा! क्या अब मैच रेफरी लगाएंगे बैन? डेब्यू से पहले ही मुश्किल में बिहार का लाल
Vaibhav Sooryavanshi banned: आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से भारतीय टी-20 टीम में जगह बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) एक गंभीर विवाद में फंस गए हैं। श्रीलंका में चल रही त्रिकोणीय सीरीज (Tri-Series) के दौरान श्रीलंका ए के खिलाफ मैच हारने के बाद वैभव मैदान पर अपना आपा खो बैठे और विरोधी खिलाड़ी के साथ झड़प कर बैठे।
वैभव सूर्यवंशी पर लग सकता है बैन (Vaibhav Sooryavanshi banned)
आईसीसी (ICC) के कड़े नियमों के तहत विरोधी खिलाड़ी को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाना या धक्का देना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। ऐसे में भारतीय सीनियर टीम की दहलीज पर खड़े इस युवा खिलाड़ी को इस गलती के लिए मैच बैन का सामना करना पड़ सकता है। त्रिकोणीय श्रृंखला में भारत ए और श्रीलंका ए के बीच खेला गया मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और इसका फैसला सुपर ओवर के जरिए हुआ।

मैच के बाद जमकर हुई धक्का-मुक्की
सुपर ओवर में जीत हासिल करने के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने वैभव सूर्यवंशी के ठीक सामने आकर बेहद आक्रामक अंदाज में जश्न मनाना शुरू कर दिया। इस उकसावे से नाराज होकर वैभव ने एक श्रीलंकाई खिलाड़ी को धक्का दे दिया। जवाब में विपक्षी खिलाड़ी ने भी उन्हें पीछे धकेला। हालांकि, अन्य खिलाड़ियों ने तुरंत बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया, लेकिन यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई।
क्या है आईसीसी का नियम?
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के कोड ऑफ कंडक्ट (आचार संहिता) के तहत मैदान पर शारीरिक संपर्क या धक्का-मुक्की को एक गंभीर अपराध माना गया है। नियमों के अनुसार सजा को चार स्तरों (Levels) में बांटा गया है। लेवल 1 में मामूली बहस या धक्का-मुक्की के लिए केवल आधिकारिक चेतावनी, मैच फीस का जुर्माना और 1 डिमेरिट अंक दिया जाता है।
वैभव से हुआ लेवल 2 वाला अपराध
लेवल 2 के अंदर जानबूझकर किसी खिलाड़ी को धक्का देने पर मैच फीस का बड़ा हिस्सा कटता है और 2 से 4 डिमेरिट अंक मिलते हैं। इसके तहत खिलाड़ी पर 1 या 2 मैचों का प्रतिबंध लग सकता है। लेवल 3 और 4 में यदि धक्का-मुक्की के कारण किसी खिलाड़ी को चोट लगती है, तो इसे हिंसक आचरण मानकर पूरे सीजन का बैन भी लगाया जा सकता है। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी खिलाड़ी को चोट नहीं आई है, जिससे वैभव बड़ी सजा से बच सकते हैं।
कप्तान तिलक वर्मा भी रेफरी के राडार पर
मैच के दौरान केवल वैभव ही नहीं, बल्कि कप्तान तिलक वर्मा भी अंपायरों के साथ तीखी बहस करते नजर आए। मुख्य मैच टाई होने के बाद अंपायर समय की कमी के कारण सुपर ओवर नहीं कराना चाहते थे, लेकिन तिलक ने इसके लिए दबाव बनाया। इसके बाद सुपर ओवर की आखिरी गेंद पर 'नो-बॉल' के फैसले को लेकर भी तिलक अंपायरों से भिड़ गए। इस अनुचित व्यवहार के कारण कप्तान पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।















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