TMC के जहांगीर खान को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने अचानक छीनी सुरक्षा, किसी भी वक्त हो सकती है जेल!

पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानूनी गलियारे से इस वक्त की एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता जहांगीर खान को एक ऐसा करारा झटका दिया है, जिससे उनके खेमे में हड़कंप मच गया है। कोर्ट ने जहांगीर खान को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा (Protection from Arrest) को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।

इस फैसले के बाद अब टीएमसी नेता पर कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस गया है और उन पर किसी भी वक्त गिरफ्तार होने की तलवार लटक गई है।

TMC Leader Jahangir Khan

आइए जानतें हैं कलकत्ता हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने सुनवाई के दौरान जहांगीर खान की सुरक्षा हटाने को लेकर क्या सख्त टिप्पणी की है।

चुनाव के बहाने मिली थी सुरक्षा

livelaw की रिपोर्ट के मुताबिक, कलकत्ता हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच के जस्टिस पार्थसारथी सेन ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए जहांगीर खान की अंतरिम सुरक्षा बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को सुरक्षा विशेष रूप से फलता विधानसभा उपचुनाव में उनकी भागीदारी को आसान बनाने के लिए दी गई थी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल 'राजनीतिक प्रतिशोध' या राज्य के बदले राजनीतिक हालातों का हवाला देकर लंबे समय तक दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा नहीं दी जा सकती।

सुबह से दोपहर तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा

मंगलवार सुबह जब इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो अदालत में जहांगीर खान के वकील मौजूद नहीं थे, जिसके कारण मामले को दूसरी पीठ के पास भेजा गया। इसके बाद दोपहर में जब सुनवाई दोबारा शुरू हुई, तो जहांगीर खान के वकील किशोर दत्ता ने अदालत से जवाब तैयार करने के लिए कुछ और समय देने की गुहार लगाई।

हालांकि, राज्य सरकार (बंगाल पुलिस) ने इसका कड़ा विरोध किया और अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि जांच आगे बढ़ाने में अब कोई कानूनी अड़चन नहीं है, जिसके बाद कोर्ट ने सुरक्षा हटाने का आदेश सुना दिया।

क्या है पूरा माजरा?

सूत्रों और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण 24 परगना के फलता थाने में जहांगीर खान के खिलाफ एक-दो नहीं, बल्कि कुल 7 FIR दर्ज हैं। 2019 के एक पुराने मामले और चुनाव से पहले दर्ज हुए मुकदमों में गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

18 मई को कोर्ट ने उन्हें इस शर्त पर राहत दी थी कि वह जांच में सहयोग करेंगे। लेकिन दिलचस्प मोड़ तब आया जब 21 मई को होने वाले फलता उपचुनाव से ठीक 48 घंटे पहले जहांगीर खान ने अचानक चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी। हाल ही में घोषित हुए नतीजों में उन्हें महज 7,000 के करीब वोट मिले हैं।

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चुनाव खत्म होते ही राज्य सरकार ने कोर्ट में घेरा

अदालत में अंतरिम सुरक्षा की अवधि बढ़ाने की याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि जहांगीर खान को पहले जो राहत दी गई थी, उसका मकसद सिर्फ उन्हें चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने का मौका देना था। चूंकि अब चुनाव पूरी तरह संपन्न हो चुके हैं, इसलिए उस पुराने आदेश को जारी रखने का कोई तुक नहीं बनता। कोर्ट ने इस दलील को सही माना और सुरक्षा कवच हटा लिया, जिससे टीएमसी नेता की मुश्किलें अब सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं।

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