Twisha Sharma Case: 'बच्चा पैदा करने की मशीन', ट्विशा केस पर फूटा ममता कुलकर्णी का गुस्सा लेकिन भड़क गए लोग
Twisha Sharma Case: भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस संवेदनशील केस में अब 90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने भी खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने समाज और माता-पिता दोनों से कई तीखे सवाल पूछे हैं। ममता का कहना है कि बेटियों की शादी केवल दिखावे या जल्दबाजी में नहीं करनी चाहिए, बल्कि उस परिवार की मानसिकता और क्षमता को भी समझना बेहद जरूरी है।
एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि 'माता-पिता को अपनी बेटियों की शादी असक्षम घरों में नहीं करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों लोग अपनी बेटियों को ऐसे परिवारों में भेज देते हैं, जहां उन्हें सम्मान और बराबरी नहीं मिलती। क्या आपने कभी किसी बड़े घर के लोगों को अपनी बेटी की शादी भिखारी के घर में करते देखा है?' उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।

ममता कुलकर्णी ने ट्विशा की सास के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि ट्विशा को खाना बनाना नहीं आता था। अभिनेत्री ने इस सोच को पुरानी मानसिकता बताते हुए कहा कि शादी का मतलब सिर्फ घर के काम करना नहीं होता। उन्होंने कहा, 'दादी-नानी के समय में भी क्या हर लड़की को शादी से पहले खाना बनाना आता था? अगर नहीं आता था, तो सिखाया जा सकता था। पांच महीने के अंदर उसे प्रेग्नेंट किया फिर गर्भपात करा दिया, बच्चे पैदा करने की मशीन बना दिया। '
'शादी में दोनों को बराबर चलना चाहिए'
ममता कुलकर्णी ने आगे कहा कि यदि खाना बनाना नहीं आता था, तो उसे सिखाया जा सकता था। उन्होंने जोर देकर कहा, 'शादी में दोनों को बराबर चलना चाहिए। कभी-कभी प्यार में सबकुछ सीख जाती है। किसी भी लड़की पर जुल्म करना व्यापार है।'

'गरीबी कोई अपराध नहीं है', ममता पर फूटा लोगों का गुस्सा
ममता कुलकर्णी के बयान पर इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कई यूजर्स इसे गरीब परिवारों का अपमान बता रहे हैं। X (पूर्व ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर यूजर्स ने अभिनेत्री को जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया। कई लोगों का कहना है कि किसी परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर उसका अपमान करना गलत है। एक यूजर ने लिखा, 'गरीबी कोई अपराध नहीं है, इंसानियत और संस्कार मायने रखते हैं।' वहीं दूसरे यूजर ने कमेंट किया, 'ममता कुलकर्णी को शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए था।'

'बेटी की शादी ऐसे परिवार में होनी चाहिए जहां सम्मान'
हालांकि, सोशल मीडिया पर एक वर्ग ऐसा भी है जो अभिनेत्री की बात को सही ठहरा रहा है। समर्थकों का कहना है कि ममता का इशारा आर्थिक स्थिति से ज्यादा मानसिकता और जिम्मेदारी की ओर था। कुछ लोगों ने लिखा कि उन्होंने केवल यह समझाने की कोशिश की कि बेटी की शादी ऐसे परिवार में होनी चाहिए, जहां उसे सम्मान और बराबरी मिले।
ममता कुलकर्णी ने फिल्म 'तिरंगा' से बॉलीवुड में डेब्यू किया
आपको बता दें कि 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने 1992 में फिल्म 'तिरंगा' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। प्रशंसकों ने उनकी फिल्मों को काफी सराहा लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने ग्लैमर की दुनिया से दूरी बना ली। ममता कुलकर्णी ने संन्यास अपना लिया और प्रयागराज महाकुंभ में किन्नर अखाड़े से जुड़ीं। उन्हें 'महामंडलेश्वर' का पद भी दिया गया था, पर कुछ समय बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया।














Click it and Unblock the Notifications