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Dementia: क्या होता है डिमेंशिया या मनोभ्रंश, जिससे दुनिया भर में 5.2 प्रतिशत बुजुर्ग पीड़ित हैं

60 साल की उम्र पार कर चुके एक करोड़ भारतीय बुजुर्गों के डिमेंशिया से पीड़ित होने की संभावना है। जर्नल न्यूरोएपिडेमियोलॉजी ने 31,477 बुजुर्गों के डेटा का विश्लेषण कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से यह शोध किया है।

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Dementia: डिमेंशिया या मनोभ्रंश एक मेडिकल जगत का शब्द है। जिसका उपयोग याददाश्त खोना, मिजाज परिवर्तन, बातचीत एवं सम्प्रेषण में कठिनाई सहित अन्य मानसिक क्षमताओं में गिरावट को बताने के लिए किया जाता है। डिमेंशिया वास्तव में कोई विशिष्ट बीमारी नहीं है। बल्कि यह इंसानी दिमाग के अलग-अलग विकारों के कारण होने वाला एक सिंड्रोम है। जिसमें अल्जाइमर रोग, पार्किंसंस रोग, हंटिंगटन रोग जैसी बीमारियां शामिल होती हैं।

दुनिया भर में 5.2% बुजुर्ग (60 वर्ष से अधिक) डिमेंशिया के साथ अपनी जिंदगी काट रहे है। जबकि डिमेंशिया वाले सभी लोगों में से 66% लोग मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। अल्जाइमर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक हर तीन में से एक बुजुर्ग की अल्जाइमर्स या डिमेंशिया के कारण मौत हो जाती है।

भारत में डिमेंशिया

तेजी से बढ़ती आबादी के कारण भारत में डिमेंशिया एक महामारी जैसी बीमारी बन रही है। अल्जाइमर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डिमेंशिया से पीड़ित लगभग 40 लाख लोग हैं। यह संख्या 2050 तक तीन गुना होने का आसार है। भारत में डिमेंशिया का प्रसार शहरी क्षेत्रों और महिलाओं में अधिक है।

डिमेंशिया के कदम जिस तरह से बढ़ रहे है उस हिसाब से जागरूकता कम है। साथ ही, डिमेंशिया के निदान और प्रबंधन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे सहित प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की कमी हैं। हालांकि, डिमेंशिया से निपटने के लिए भारत सरकार ने कुछ पहल शुरू की है। उदाहरण के लिए, बुजुर्गों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम, नेशनल प्रोग्राम फॉर हेल्थकेयर ऑफ द एल्डर्ली शुरू किया गया है। जिसमें डिमेंशिया के मरीजों की देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

डिमेंशिया और विश्व स्वास्थ्य संगठन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डिमेंशिया की चुनौती से निपटने के लिए कुछ कार्यक्रम शुरू किए हैं। डब्ल्यूएचओ ने एक ग्लोबल डिमेंशिया ऑब्जर्वेटरी विकसित की है। यह वेब-आधारित एक प्लेटफॉर्म है जो डिमेंशिया की जानकारी और डेटा प्रदान करता है। इसके अलावा संगठन ने इस सिंड्रोम को लेकर कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए है। डब्ल्यूएचओ फिलहाल इस सिंड्रोम के कारणों को बेहतर ढंग से समझने और संभावित उपचार सहित निवारक उपायों की पहचान के लिए डिमेंशिया अनुसंधान में लगातार निवेश कर रहा है।

डिमेंशिया का क्या इलाज?

दुर्भाग्य से, वर्तमान में डिमेंशिया का कोई इलाज नहीं है। हालांकि, ऐसी कई दवाएं हैं जिनका आमतौर पर डिमेंशिया के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। जैसे, चोलिनेस्टरेज इनहिबिटर। यह दवा मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर एसिटाइलकोलाइन के स्तर को बढ़ाती है। यह याददाश्त के लिए महत्वपूर्ण है।

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    इसी प्रकार, मेमनटाइन का प्रयोग ग्लूटामेट की गतिविधि को नियंत्रित करने में किया जाता है। यह मस्तिष्क में मौजूद एक महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर होता है। यह दवा डिमेंशिया को रोकने में काम आती है। जबकि एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाओं का उपयोग डिप्रेशन के इलाज में किया जाता है। डिप्रेशन भी डिमेंशिया का एक सामान्य लक्षण है।

    यह भी पढ़ें: डिप्रेशन का लक्षण है ? स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है- Study

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