CVC Chief: क्या है केंद्रीय सतर्कता आयोग और कौन हैं इसके नये प्रमुख प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
केंद्र सरकार के विभागों एवं पब्लिक सेक्टर यूनिट्स में भ्रष्टाचार की रोकथाम के उद्देश्य से सेंट्रल विजिलेंस कमीशन की स्थापना की गयी थी। इसमें एक मुख्य सतर्कता आयुक्त एवं दो अन्य आयुक्त होते हैं।

CVC Chief: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार नियंत्रण की सर्वोच्च संस्था है। 11 फरवरी 1964 को भ्रष्टाचार निवारण समिति की सिफारिशों (जिसके अध्यक्ष के. संथानम थे) पर सरकार ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सेंटर विजिलेंस कमीशन - सीवीसी) की स्थापना की थी। जिसका उद्देश्य सतर्कता के क्षेत्र में केंद्रीय सरकारी एजेंसियों को सलाह देना व मार्गदर्शन करना है। निट्टूर श्रीनिवास राऊ केंद्रीय सतर्कता आयोग के पहले मुख्य आयुक्त रहे। इस आयोग को तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा 25 अगस्त 1988 में 'संवैधानिक दर्जा' देकर एक बहुसदस्यीय आयोग बनाया गया। उसके उपरांत वर्ष 2003 में केंद्रीय सतर्कता आयोग विधेयक संसद के दोनों सदनों (लोक सभा व राज्य सभा) में पारित हुआ और राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति मिलने पर उसी समय से प्रभावी हुआ।
कौन है प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
24 दिसंबर 2022 को प्रवीण कुमार श्रीवास्तव केंद्रीय सतर्कता आयोग के 19वें चीफ विजिलेंस कमिश्नर (सीवीसी) नियुक्त हुये। इससे पहले वे आयोग में सतर्कता आयुक्त थे। प्रवीण कुमार श्रीवास्तव असम-मेघालय कैडर के 1988-बैच के (सेवानिवृत्त) भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। वे 31 जनवरी 2022 को सचिव (समन्वय), कैबिनेट सचिवालय के पद से सेवानिवृत्त हुये थे। गृह मंत्रालय में विशेष सचिव व अतिरिक्त सचिव का दायित्व निभाते हुये उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा के कैडर प्रबंधन, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मियों तथा सामान्य प्रशासन से संबंधित मामलों को संभाला था।
श्रीवास्तव ने वाणिज्य विभाग के निदेशक/उप सचिव के रूप में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तहत व्यापार से संबंधित वार्ताओं में सरकार की सहायता की। उन्होंने राइट्स लिमिटेड में मुख्य सतर्कता अधिकारी तथा जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक के रूप में भी कार्य किया है।
सीवीसी की नियुक्ति कैसे होती है?
आयोग में एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त व दो सतर्कता आयुक्त होते हैं। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (Chief Vigilance Commissioner - CVC) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक तीन सदस्यीय समिति (प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री व लोकसभा में विपक्ष के नेता) की सिफारिश पर होती है। सीवीसी व सतर्कता आयुक्त का कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो) होता है। सेवानिवृत्त होने (रिटार्यमेंट) के बाद ये पदाधिकारी केंद्र या राज्य सरकार में किसी भी पद पर आसीन नहीं होते हैं।
कैसे हटाया जाता है सीवीसी व सदस्यों को पद से?
राष्ट्रपति केंद्रीय सतर्कता आयोग के प्रमुख व सदस्यों को हटा सकते हैं। यदि वह चरित्रहीनता के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा दोषी पाया जाता है। या, अपने कार्यक्षेत्र से बाहर किसी लाभ के पद पर है। या, मानसिक या शारीरिक रूप से कार्य करने में असमर्थ है अथवा वह दिवालिया घोषित हो गया हो।
सीवीसी के अधिकार व कार्य
केंद्रीय सतर्कता आयोग किसी भी कार्यकारी प्राधिकारी के नियंत्रण से मुक्त है तथा केंद्रीय सरकार के अंतर्गत सभी सतर्कता गतिविधियों की निगरानी करता है। यह भ्रष्टाचार या कार्यालय के दुरुपयोग से संबंधित शिकायतें सुनकर उपयुक्त कार्यवाही की सिफारिश करता है। आयोग कोई जांच एजेंसी नहीं है। यह सीबीआई के माध्यम से या सरकारी कार्यालयों में नियुक्त मुख्य सतर्कता अधिकारी (चीफ विजिलेंस आफिसर - सीवीओ) द्वारा मामले की जांच कराता है।
सीवीसी लोकसेवकों द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 के तहत किये गये भ्रष्टाचारों की जांच कराने की शक्ति रखता है। सीवीसी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आयोग द्वारा किये गए कार्यों का विवरण देता है और उन विफलताओं को इंगित करता है जिनके परिणामस्वरूप सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार होता है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत केंद्रीय सतर्कता आयोग दण्ड प्रक्रिया के अंतर्गत किसी अपराध में सीबीआई द्वारा की गई जांच की प्रगति तथा लंबित आवेदनों की प्रगति का भी पुनर्विलोकन करता है।
सीवीसी, विभिन्न केंद्रीय सरकारी मंत्रालयों, विभागों तथा केंद्रीय सरकार के संगठनों के सतर्कता प्रशासन पर निगरानी रखता है। किसी भी जांच का संचालन करते समय केंद्रीय सतर्कता आयोग को सिविल न्यायालय के सभी अधिकार प्राप्त है। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त उस समिति के अध्यक्ष तथा दोनों सतर्कता आयुक्त सदस्य हैं, जिसकी सिफारिशों पर केंद्रीय सरकार, प्रवर्तन निदेशक (Director of Enforcement) की नियुक्ति करती है।
केंद्रीय सतर्कता आयोग की मजबूरी
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सीवीसी को प्रायः एक शक्तिहीन संस्था माना जाता है, क्योंकि यह केवल एक सलाहकार संस्था के रूप में कार्य करती है। इसके पास सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने की शक्ति नहीं है और न ही यह संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के अधिकारियों के विरुद्ध जांच के लिये सीबीआई को निर्देश दे सकती है। यहां तक कि एक स्वतंत्र संस्था होने के बावजूद भी संसाधन न होने के कारण भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्यवाही नहीं कर सकती।
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