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Religious Conversion: ‘धर्मांतरण’ पर छत्तीसगढ़ में बवाल, जानिये आरएसएस, भाजपा और कांग्रेस का क्या कहना है

धर्मांतरण को लेकर एक बार फिर से हंगामा मचने लगा है। लेकिन, इस बार धर्मांतरण का विरोध खुद आदिवासी समाज की ओर से किया जा रहा है।

Tribals Protest Against Religious Conversion in chhattisgarh

Religious Conversion: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में बीते दिन धर्मांतरण मामले को लेकर आदिवासियों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। भीड़ ने यहां स्थित एक चर्च में जमकर तोड़-फोड़ की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए मौके पर पहुंचे नारायणपुर के एसपी सदानंद कुमार पर भी भीड़ ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया। दरअसल, 31 दिसंबर 2022 को सर्व आदिवासी समाज को धर्मांतरण के मामले की जानकारी मिली, इसे लेकर आदिवासी समाज के लोगों ने विरोध जताया। इस दौरान एक धर्म विशेष के लोगों द्वारा उनके साथ मारपीट की गयी और मामला गरमा गया।

ईसाई बने, धर्म बदला पर नाम नहीं?

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में वनवासियों का धर्मांतरण सबसे सॉफ्ट टारगेट होता है। जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक साल 1991 के बाद से छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में ईसाई आबादी तेजी से बढ़ी है।

दरअसल, बहुत से वनवासी लोगों का धर्म परिवर्तित तो करवा दिया जाता है लेकिन उनका नाम नहीं बदला जाता ताकि वे आरक्षण का लाभ ले सकें। साल 1950 में एक कानून बना कि अगर कोई SC-ST हिंदू धर्म छोड़ देता है तो उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। फिर साल 1956 में इस कानून में संशोधन किया गया। इसके अनुसार अगर कोई सिख धर्म अपनाता है तो उसे आरक्षण की सुविधा दी जायेगी। फिर 1990 में बौद्ध अपनाने पर SC-ST को आरक्षण की सुविधा दी गयी थी। वहीं धर्म परिवर्तन करके मुसलमान और ईसाई बनने पर SC-ST लोगों को आरक्षण का फायदा नहीं मिलता है। इस वजह से वो धर्म तो बदल लेते हैं लेकिन सबको जाहिर नहीं करते हैं।

'धर्म नहीं बदले हैं, बस वो पूजा क्रिश्चन धर्म के अनुसार करते हैं'

छत्तीसगढ़ क्रिस्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल कहते हैं कि किसी का धर्मांतरण केवल कलेक्टर की अनुमति से ही किया जा सकता है लेकिन राज्य में ऐसे लोगों की संख्या बहुत है, जिनका धर्मांतरण नहीं हुआ लेकिन वो नियमित रुप से चर्च आते हैं और हमारी पूजा पद्धति को अपनाते हैं। वहीं उन्होंने ETV को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि राज्य में 12 लाख 75 हजार ईसाई हैं। जबकि साल 2011 की जनगणना के हिसाब से वहां 4.90 लाख ईसाई थे।

धर्मांतरण पर भाजपा-कांग्रेस की राय

धर्मांतरण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी खुलकर अपनी राय रखती है और धर्मांतरण का विरोध करती है। इसका जीता-जागता उदाहरण यह है कि ज्यादातर भाजपा शासित प्रदेशों में धर्मांतरण और लव-जिहाद पर कई कानून लाकर नकेल कसने की कोशिश की जा रही है। वहीं भाजपा SC-ST के धर्मांतरण की भी मुखर विरोधी है।

साल 2022 के नवंबर महीने में ही छत्तीसगढ़ के राजानंदगांव से कांग्रेस मेयर हेमा देशमुख एक सामूहिक धर्मांतरण कार्यक्रम में शामिल हुईं, जिसका वीडियो वायरल हो गया था। जिस पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस का एकमात्र इरादा हिंदू धर्म के प्रति नफरत फैलाना है। वहीं कांग्रेस कभी भी धर्मांतरण के मुद्दे पर खुलकर नहीं बोलती है। हमेशा इसका ठीकरा भाजपा पर फोड़ती है और साम्प्रदायिकता फैलाने का आरोप लगा देती है।

धर्मांतरण को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा था कि जाति तो जन्म से मिलती है। उसे बदल नहीं सकते। हालांकि, धर्म चुनने का अधिकार सबको है। पहले राजतंत्र था तो राजा का दंड, सिक्का और धर्म होता था इसे प्रजा मानती थी। वह समय बीत गया, और अब प्रजातंत्र में धर्म चुनने का अधिकार सबको है।

संघ प्रमुख ने क्या कहा था

लगभग दो महीने पहले जब RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत छत्तीसगढ़ आए थे, तब धर्मांतरण पर बगैर किसी का नाम लिये वनवासियों से कहा था कि हमारे भोलेपन का लाभ लेकर ठगने वाले लोगों से सावधान रहना है। ठगने वाले बहुत लोग हैं। अब हमको जागना है। अपने देश, धर्म के लिए पक्का रहना है। हमें अपने संस्कारों और देवी-देवताओं को नहीं भूलना है।

धर्मांतरण पर क्या है केंद्रीय कानून?

आजादी के पहले अंग्रेजों ने धर्मांतरण को लेकर कोई कानून नहीं बनाया था लेकिन कुछ रियासतों ने इस पर नियम-कानून बनाए थे। जिसमें रायगढ़ स्टेट कन्वर्सन एक्ट (1936), पटना फ्रीडम ऑफ रीलिजन एक्ट (1942), उदयपुर स्टेट एंटी कन्वर्जन एक्ट जैसे कुछ कानून बने थे लेकिन आजादी के बाद की बात करें तो धर्म परिवर्तन विरोधी कानून पारित करने के लिए कई बार संसद में बहस हुई लेकिन कोई एकमत राय नहीं बनी और न कभी कोई बिल पास हुआ। अगर सीधा समझा जाए तो केंद्रीय लेवल पर कोई ऐसा कानून नहीं है, जिससे सीधा धर्मांतरण पर नकेल कसा जा सके।

नबंवर 2022 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि 9 राज्यों ने इसे रोकने के लिए कानून बनाये हैं। केंद्र सरकार भी जरूरी कदम उठाएगी। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि धर्म का प्रचार करना एक मौलिक अधिकार है, लेकिन किसी का धर्म बदल देना कोई अधिकार नहीं है।

धर्मांतरण को लेकर संविधान क्या कहता है?

भारत के संविधान के अनुसार अनुच्छेद 25 से लेकर 28 के बीच धर्म की स्वतंत्रता का जिक्र किया गया है। अनुच्छेद 25 में बताया गया है कि स्वेच्छा से भारत के हर व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने की, प्रैक्टिस करने और धर्म का प्रचार-प्रसार करने की आजादी है।

धर्मांतरण पर छत्तीसगढ़ का कानून

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    मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद छत्तीगढ़ ने धर्मांतरण का कानून मध्यप्रदेश में बने कानून को ही अपनाया। इस कानून के तहत जबरन धर्मांतरण पर एक साल तक की जेल और 5,000 तक का जुर्माना तय किया गया था। वहीं इस कानून के तहत एससी-एसटी समुदाय के नाबालिगों और महिलाओं के धर्मांतरण पर दो साल की सजा और 10,000 का जुर्माना देना होगा। वहीं साल 2006 में इसे संशोधित भी किया और धर्मांतरण से पहले अब जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति लेने की अनिवार्यता की गयी है।

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