छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र का पहला दिन, आरक्षण के मामले में जमकर हुआ हंगामा
विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने सदस्यों से कहा कि राजभवन और राज्यपाल के प्रति मर्यादा का पालन होना चाहिए।
सोमवार से छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया। शीतकालीन सत्र के पहले सदन में आरक्षण के मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष के बीच जमकर बहस के हुई। जिसके बाद सदन की कार्रवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

आरक्षण विधेयक में राज्यपाल के दस्तखत होने में हो रही सियासी बयानबाजियो के बीच विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने सदस्यों से कहा कि, राजभवन और राज्यपाल के प्रति मर्यादा का पालन होना चाहिए।उन्होंने कहा कि राज्यपाल पर की गई टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, उनपर किसी भी प्रकार की अशोभनीय बात सदन की मर्यादा के खिलाफ है।
दरअसल सत्तापक्ष के विधायकों ने सदन में राज्यपाल द्वारा आरक्षण विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं किए जाने का मुद्दा गया था,वहीं विपक्ष ने क्वांटिफाइब डाटा आयोग की रिपोर्ट सदन में नहीं रखे जाने पर प्रश्न किया था,जिसके बाद दोनों पक्षों के विधायकों के बीस बीच जबरदस्त नोंकझोंक देखी गई।
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इधर 6 जनवरी तक चलने वाले इस सत्र में भाजपा विधायक कई मुद्दे उठाने वाले हैं। किसानों को धान बेचने के दौरान टोकन प्राप्त करने हो रही समस्या,राज्य में बड़ी संख्या में आंदोलनरत सरकारी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग समेत कई मुद्दों पर विपक्ष स्थगन के माध्यम अपना विरोध जतायेगा। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने बताया था कि सत्र के दरमियान धर्मांतरण के मुद्दे पर भी चर्चा की मांग की जाएगी। इधर सरकार की बात की जाये,तो भूपेश बघेल सरकार इस सत्र में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टा की रोकथाम के लिएसख्त कानून का विधेयक ला सकती है।
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