Amanjot Kaur: कारपेंटर का काम करते हैं अमनजोत कौर के पिता, बेटी ने क्रिकेट में पाया नाम

15 साल की उम्र में क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कर 23 साल की उम्र में टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया था भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी अमनजोत कौर ने।

success story of Amanjot Kaur journey in indian cricket team

Amanjot Kaur: अमनजोत कौर का जन्म एक जनवरी 2000 को मोहाली में हुआ था। चंडीगढ़ के लिए खेलने वाली अमनजोत ने घरेलू क्रिकेट में पंजाब का नेतृत्व किया है। इसके साथ ही उन्होंने भारत A की महिला टीम का नेतृत्व भी किया है। उनकी बल्लेबाजी क्षमता को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम में शामिल किया गया।

ऐसे की करियर की शुरुआत

अमनजोत कौर ने 15 साल की उम्र में क्रिकेट की ट्रेनिंग लेनी शुरू की थी। उस समय 10वीं की परीक्षा के कारण 2-3 महीनों की ट्रेनिंग करके वह पढाई पर ध्यान देने लग गयी। फिर 10वीं की परीक्षा पास करने के बाद अमनजोत ने कोच नागेश गुप्ता से चंडीगढ़ के सेक्टर-32 में ट्रेनिंग लेनी शुरू की।

अपने कारपेंटर पिता को सुपर हीरो कहने वाली अमनजोत के पिता ने सच में ही बेटी के लिए अपनी क्षमता से बढ़कर किया। अमनजोत के पिता बेटी को कोचिंग के लिए छोड़कर जाते और वापस लेने भी आते। ये सिलसिला काफी सालों तक चलता रहा। इसके बाद अमनजोत ने अपनी मेहनत के दम पर पंजाब की अंडर-19 टीम में और 2017 में पंजाब अंडर 23 में स्थान पाया।

लोगों ने कहा 'ये लड़को का खेल'

अमनजोत कौर ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए एक इंटरव्यू में बताया था कि आप जानते हैं कि हमारे पास किस तरह का समाज है? जब मैंने क्रिकेट में दिलचस्पी दिखाई तो लोग कहते थे कि लड़की होकर तुम क्रिकेट खेलती हो। यह तो लड़कों का खेल है। लेकिन उन तानों ने ही मुझे मजबूत बनाया। मैं पिच पर एकलौती लड़की हुआ करती थी। मुझे लगता है कि मैं लड़कों के साथ खेलते हुए क्रिकेट के लिए जिद्दी हो गई हूं। मेरे परिवार के सपोर्ट ने आगे बढ़ने में मेरी काफी मदद की।

पिता ने दिया बलिदान

मैन ऑफ द मैच मिलने के बाद एक बयान में अमनजोत ने कहा था कि मेरे पिता ने मेरे करियर में बड़ी भूमिका निभाई है। शुरुआत में उन्होंने सोचा था कि धीरे-धीरे क्रिकेट में मेरी रुचि कम हो जाएगी। पर उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि मैं भारत के लिए खेलूंगी। मैंने क्रिकेट में खुद को साबित करने के लिए कड़ी मेहनत की है।

इसके साथ ही अमनजोत ने बताया कि पिताजी का संघर्ष मेरे संघर्ष से बहुत बड़ा है। वह पहले ज्यादा काम लेते थे और काम के सिलसिले में कई बार घर से बाहर रहते थे। पर मेरे लिए उन्होंने अपना आधा काम छोड़ दिया जिससे कि मैं अकादमी जाने से वंचित न रह जाऊं। वह सुबह और शाम मुझे अकादमी लेकर जाते। उस कारण उनका आधा काम ही हो पाता और वे घर के पास ही थोड़ा काम करते रहे।

डेब्यू मैच में मिला मैन ऑफ द मैच

अमनजोत कौर बचपन में गली में लड़कों के साथ क्रिकेट खेला करती थी। इसके साथ ही स्कूल में भी अमनजोत लड़कों के साथ ही क्रिकेट खेलती थी। फिलहाल अमनजोत कौर वुमेंस प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस की महिला टीम की तरफ से खेल रही हैं। अमनजोत को मुंबई इंडियंस की टीम ने 50 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया है।

जबकि साउथ अफ्रीका के खिलाफ 19 जनवरी 2023 को अपने डेब्यू टी-20 मैच में ही अमनजोत कौर ने मैन ऑफ द मैच का अवार्ड अपने नाम किया था। इस मैच में सातवें नंबर पर खेलने उतरी अमनजोत ने धुआंधार बैटिंग करते हुए 30 गेंदों में नाबाद 41 रन की पारी खेली थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमनजोत कौर चंडीगढ़ टीम की कप्तान भी है।

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