Global UPI: भारत का यूपीआई हुआ ग्लोबल, सिंगापुर सहित 33 देश अपना चुके इस पेमेंट सिस्टम को
यूपीआई (UPI) अब ग्लोबल हो चुका है। इस पेमेंट सिस्टम के जरिए भारत और सिंगापुर के बीच फंड ट्रांसफर करना बेहद आसान हो गया है। इसके अलावा कई और देश हैं, जिन्होंने भारत में विकसित यूपीआई को अपनाना शुरू कर दिया है।

Global UPI: भारत की यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस और सिंगापुर की पेमेंट सर्विस पे-नाउ (PayNow) के बीच इस सप्ताह एक साझेदारी हुई है। इस साझेदारी की वजह से भारतीय यूजर्स अपने मोबाइल से सिंगापुर में फटाफट फंड ट्रांसफर कर सकेंगे। पीएम नरेन्द्र मोदी, रिजर्व बैंक के गवर्नर शशिकांत दास, सिंगापुर के मॉनिटरी ऑथिरिटी के डायेक्टर रवि मेनन और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली हसेन लूंग ने वर्चुअली इस सेवा को लॉन्च किया है।
इस सर्विस के लॉन्च होने के बाद भारतीय यूजर्स 24X7 सिंगापुर में मोबाइल के जरिए फंड ट्रांसफर कर सकेंगे यानी यूजर्स किसी भी डिजिटल पेमेंट सर्विस गूगलपे (Google Pay), फोनपे (PhonePe) और पेटीएम (Paytm) आदि का इस्तेमाल करके सिंगापुर के पेनाउ यूजर्स को फंड ट्रांसफर कर पाएंगे। यह सुविधा बेहद ही सरल और सुगम होगी।
यूपीआई और पेनाउ कैसे करते हैं काम?
भारत की यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस को सरकारी संस्था नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने डेवलप किया है। इस इंटरफेस के जरिए यूजर्स अपने मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं। इसके लिए एक वर्चुअल पेमेंट अड्रेस (VPA) जनरेट होता है। यह वर्चुअल पेमेंट अड्रेस पैसे भेजने वाले और पैसे रिसीव करने वाले यूजर्स की बैंक डिटेल को उजागर नहीं करता है। साथ ही साथ इसके जरिए रीयल टाइम में पर्सन-टू-पर्सन (P2P) और पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) पेमेंट किया जा सकता है।
सिंगापुर का पेमेंट सिस्टम पेनाउ भी यूपीआई की तरह ही काम करता है। इसमें भी यूजर के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके फंड को बैंक अकाउंट या फिर ई-वॉलेट में ट्रांसफर कर सकते हैं। इस सिस्टम के जरिए पीयर-टू-पीयर पेमेंट किया जा सकता है, जिसमें सिंगापुर के बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स (NFI) हिस्सा लेते हैं। यूपीआई और पेनाउ के लिंक होने का मतलब है कि भारत और सिंगापुर में मोबाइल नंबर के जरिए पैसा या फंड ट्रांसफर करना बेहद आसान हो जाएगा।
किन लोगों को होगा फायदा?
सिंगापुर और भारत के बीच शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का फायदा उन भारतीय नागरिकों को होगा, जो सिंगापुर में काम करने या पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। यह सर्विस सुगम के साथ-साथ कम खर्चीली है। आरबीआई रेमिटेंस सर्वे 2021 (RBI Remittance Survey 2021) के मुताबिक, भारत से फंड ट्रांसफर किए जाने वाले देशों में सिंगापुर टॉप-4 देशों में आता है। विदेश मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक, सिंगापुर में रहने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या 6.5 लाख के करीब है, जिनमें एनआरआई (अप्रवासी भारतीय) भी शामिल हैं।
मॉनिटरी ऑथोरिटी ऑफ सिंगापुर (MAS) के चीफ फिनटेक ऑफिसर सोपेंदू मोहन्ती का मानना है कि इस सिस्टम के शुरू होने के बाद भारत और सिंगापुर में फंड ट्रांसफर करने पर लगने वाले खर्च में 10 प्रतिशत की कमी आ सकती है। उन्होंने बताया कि पेनाउ-यूपीआई की लिंकिंग की वजह से दोनों देश के नेशनल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को फायदा मिलेगा। वहीं, आरबीआई का मानना है कि यह नेक्स्ट जेनरेशन डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक नया आयाम स्थापित करेगा।
नेपाल और भूटान में भी यूपीआई
भारतीय यूपीआई को लागू करने वाले देश में सबसे पहला नाम नेपाल का है। नेपाल ने पिछले साल मार्च 2022 में एनपीसीआई के यूपीआई डिजिटल पेमेंट सिस्टम को अपने यहां लागू किया था। फिलहाल नेपाली नागरिक अपने आतंरिक पेमेंट के लिए इस सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब जल्दी ही, भारतीय यूजर्स नेपाल में भी इसके जरिए जल्द इंस्टैंट पेमेंट कर सकेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय इस संबंध में नेपाल से बातचीत कर रहा है, ताकि भारत से नेपाल जाने वाले यूजर्स को ऑनलाइन पेमेंट करने में कोई दिक्कत न हो सके। लखनऊ में आयोजित जी-20 की बैठक में केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एंव सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अल्केश कुमार शर्मा ने इस बात के संकेत भी दिए हैं कि इस साल से ही यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
नेपाल के साथ-साथ पड़ोसी देश भूटान भी भीम-यूपीआई (BHIM UPI) आधारित पेमेंट सर्विस लॉन्च कर चुका है। एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और भूटान की रॉयल मोनेटरी ऑथिरिटी (RMA) ने भी क्यूआर (QR) आधारित पेमेंट्स के लिए साझेदारी की है। आने वाले कुछ महीनों में भारतीय यूजर्स भूटान में भी यूपीआई के जरिए पेमेंट कर सकेंगे।
33 देशों ने अपनाया यूपीआई
NPCI International की वेबसाइट के मुताबिक भारतीय फाइनेंशियल संस्थान ने भारत से बाहर UPI सर्विस के लिए फिलहाल डिस्कवर फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) अमेरिका, जापान क्रेडिट ब्यूरो (JCB), यूनियन पे इंटरनेशनल (UPI) चीन, रॉयल मॉनेटरी ऑथिरिटी (RMA) ऑफ भूटान और नेटवर्क इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रांसफर (NETS), सिंगापुर के साथ साझेदारी की है। G20 डिजिटल वर्किंग ग्रुप की लखनऊ में आयोजित मीटिंग में केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत ने 13 और देशों के साथ यूपीआई इंटिग्रेशन के लिए एमओयू (MoU) साइन किया है।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय यूपीआई को पूरी दुनिया में पसंद किया जा रहा है। अब तक कुल 33 देशों में यूपीआई या यूपीआई जैसा सिस्टम लागू हो चुका है। भारतीय यूपीआई को अपनाने वाले देशों में नेपाल, भूटान, सिंगापुर, यूके, फ्रांस, यूएई और मलेशिया सबसे पहले नाम हैं। इनके अलावा ओमान, सउदी अरब, बेलजियम, नीदरलैंड्स, इटली, लग्जमबर्ग, बहरीन, मालदीव, वियतनाम, ताइवान, जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया, कंबोडिया, फिलीपींस, स्वीट्जरलैंड, तुर्किये, अर्जेंटिना, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जर्मनी, इंडोनेशिया, ब्राजील, कनाडा, अमेरिका और मैक्सिको शामिल हैं।
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इसके अलावा कई अफ्रीकी देशों ने भी यूपीआई की तर्ज पर इंस्टैंट पेमेंट सिस्टम डेवलप किया है। भारत सरकार और नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) का इंटरनेशनल विंग कई और देशों से इसके लिए साझेदारी कर रहा है।
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