Fuel Shortage: पेट्रोल पंपों पर पैनिक बाइंग ने बढ़ाई टेंशन! कई राज्यों में राशनिंग के हालात! संकट में किसान
Fuel Shortage in India 2026: पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध का असर अब सीधे भारत की आम जनता और किसानों की जेब और जरूरत पर पड़ने लगा है। देश के कई राज्यों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत की खबरें आ रही हैं। एक तरफ जहां युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और तेल कंपनियों ने डिलीवरी कम कर दी है, वहीं दूसरी तरफ खेती के पीक सीजन में मांग बढ़ने और जनता के बीच 'पैनिक बाइंग' (डर के मारे जरूरत से ज्यादा तेल खरीदने) की वजह से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
हालात इस कदर नाजुक हो गए हैं कि कई राज्यों में पेट्रोल पंप पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। आइए जानतें हैं देश के अलग-अलग राज्यों में इस समय ईंधन संकट को लेकर क्या हालात बने हुए हैं...

किसानों पर दोहरी मार: महाराष्ट्र और पंजाब में हाहाकार
देश के सबसे बड़े कृषि प्रधान राज्यों में इस संकट का सबसे बुरा असर देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र के किसानों का कहना है कि आगामी बुवाई सीजन से ठीक पहले उन्हें ट्रैक्टरों के लिए डीजल नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण छोटे कस्बों में पेट्रोल पंपों के बाहर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं।
वहीं पंजाब के ईंधन डीलरों ने भी बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की तरफ से बेहद अनियमित और कम सप्लाई मिल रही है। पंजाब में इस समय खेती की गतिविधियों के कारण डीजल की मांग अपने चरम पर है, ऐसे में सप्लाई में कटौती से राज्य के कई पेट्रोल पंप पूरी तरह ड्राई (सूखे) होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
राजस्थान में 35% तक घटी सप्लाई, डीलर्स पहुंचे कोर्ट
राजस्थान में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं। यहां पेट्रोल पंप मालिकों को सामान्य दैनिक खपत के मुकाबले बेहद कम ईंधन मिल रहा है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव शशांक कोरानी ने बताया कि पंपों पर होने वाली तेल की डिलीवरी में 30% से 35% तक की भारी कटौती देखी गई है। कंपनियों द्वारा लगाई गई इस कथित अनऑफिशियल पाबंदी के खिलाफ तंग आकर अब पेट्रोल पंप मालिकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
बिहार में तेल मिलने की सीमा तय, राशनिंग शुरू
ईंधन की किल्लत को देखते हुए बिहार के पटना और गया समेत कई जिलों में प्रशासन और पंप मालिकों ने तेल की राशनिंग शुरू कर दी है, यानी अब कोई भी अपनी मर्जी के मुताबिक असीमित तेल नहीं खरीद सकता। बिहार में अस्थाई तौर पर लगी पाबंदियों के तहत:
- दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर): एक बार में अधिकतम ₹200 का पेट्रोल।
- चार पहिया वाहन (कार): एक बार में अधिकतम ₹1,000 का तेल।
- भारी वाहन (बस/ट्रक): एक बार में अधिकतम ₹2,500 तक का ही डीजल-पेट्रोल ले सकते हैं।
यूपी-गुजरात में 'पैनिक बाइंग' और बेंगलुरु में रात को पंप बंद
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) को लेकर लोगों में ऐसा डर बैठा है कि वे जरूरत से ज्यादा तेल स्टॉक करने के लिए पंपों पर टूट पड़े हैं। यूपी के कई पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारों के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। ऐसा ही कुछ हाल गुजरात के भी कुछ जिलों में देखने को मिला है, जहां 'पैनिक बाइंग' ने संकट को और बढ़ा दिया है।
दक्षिण भारत की बात करें तो बेंगलुरु के कुछ स्टेशनों ने बताया कि उन्हें सामान्य से बहुत कम टैंकर मिल रहे हैं। स्टॉक को बचाने के लिए कई पंप ऑपरेटरों ने रात के समय अपने आउटलेट बंद रखना शुरू कर दिया है। वहीं तमिलनाडु में खेती की बढ़ती गतिविधियों के कारण बिक्री तो बढ़ी है, लेकिन सप्लाई बाधित होने से कुछ रिटेल आउटलेट खाली हो गए हैं और लोगों को दूसरे इलाकों में भागना पड़ रहा है।
डीलरों पर लटकी तलवार
सप्लाई में आ रही इस कमी ने पेट्रोल पंप मालिकों को एक और बड़ी मुसीबत में डाल दिया है। दरअसल, आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत हर पेट्रोल पंप को अपने पास एक तय न्यूनतम स्टॉक (Minimum Stock) बनाए रखना अनिवार्य होता है। लेकिन पीछे से सप्लाई न आने के कारण आउटलेट सूख रहे हैं, जिससे डीलरों पर प्रशासनिक कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा है।
इन राज्यों में राहत, कहीं-कहीं खपत में आई गिरावट
राहत की बात यह है कि पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से फिलहाल किसी बड़ी सप्लाई किल्लत की रिपोर्ट नहीं है। हालांकि, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में लगातार हुई कीमतों में बढ़ोतरी (Price Hikes) के बाद ईंधन की खपत में 10% से 15% की गिरावट दर्ज की गई है, खासकर लोग अब पेट्रोल का इस्तेमाल पहले से कम कर रहे हैं।
क्या वाकई देश में तेल की कमी है?
इस पूरे संकट और देश में मचे हल्ले के बीच भारत सरकार और तेल कंपनियों ने स्थिति को स्पष्ट किया है:
कंपनियों की अपील: भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी दिग्गज तेल विपणन कंपनियों ने साफ किया है कि देश में राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और 'पैनिक बाइंग' करने से बचें।
पेट्रोलियम मंत्रालय का तर्क: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि कुछ इलाकों में मांग बढ़ने की मुख्य वजह खेती का सीजन है। इसके अलावा, हाल के दिनों में निजी तेल कंपनियों (Private Retailers) द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने के कारण ग्राहक तेजी से सरकारी पेट्रोल पंपों (Public-Sector Fuel Retailers) की तरफ शिफ्ट हुए हैं, जिससे अचानक सरकारी पंपों पर दबाव बढ़ गया है। सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जल्द ही इसे सुचारू कर लिया जाएगा।














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