Marco Rubio Post: भारत दौरे में फंसे Marco Rubio, लौटते ही डिलीट किया ‘Stupid’ वाला पोस्ट, किसको दी थी गाली?
Marco Rubio Post: अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio चार दिन की भारत यात्रा पर थे, लेकिन इस दौरान दिया गया उनका एक बयान अब बड़ा विवाद बन गया है। नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने भारतीयों के खिलाफ होने वाली नस्लवादी टिप्पणियों पर जवाब देते हुए कहा कि “हर देश में मूर्ख (Stupid) लोग होते हैं।”
उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर बहस छिड़ गई है। खास बात यह रही कि अमेरिकी विदेश विभाग ने पहले इस बयान वाला वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पोस्ट किया, लेकिन बाद में विवाद बढ़ने पर वीडियो का वही हिस्सा हटा दिया गया।

विदेश विभाग ने पहले पोस्ट किया, फिर हटाया वीडियो
दरअसल, अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया था। इसमें नस्लवाद से जुड़े सवाल का जवाब भी शामिल था। लेकिन जैसे-जैसे वीडियो वायरल होने लगा और लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू की, विदेश विभाग ने बाद में सवाल-जवाब वाला हिस्सा हटा दिया। इससे विवाद और बढ़ गया, क्योंकि लोगों ने इसे डैमेज कंट्रोल की कोशिश बताया।
रिपोर्टर ने पूछा भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद पर सवाल
नई दिल्ली में हुई ज्वॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar भी मौजूद थे। इसी दौरान एक पत्रकार ने मार्को रुबियो से सवाल पूछा। रिपोर्टर ने कहा-
“अमेरिका में भारतीयों और भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ काफी नस्लवादी टिप्पणियां हो रही हैं। यह भारत-अमेरिका संबंधों की बुनियाद के खिलाफ है। इस पर आपकी क्या राय है?”जब रुबियो ने पूछा कि रिपोर्टर किस घटना का जिक्र कर रहे हैं, तो पत्रकार ने जवाब दिया, “हमने वे सभी टिप्पणियां देखी हैं और उनका समर्थन भी देखा है।”
Marco Rubio ने क्या जवाब दिया?
इस सवाल का जवाब देते हुए रुबियो ने कहा कि वह ऐसी टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा-
“मैं उन टिप्पणियों को बहुत गंभीरता से लूंगा। मुझे यकीन है कि ऑनलाइन और दूसरी जगहों पर लोगों ने ऐसी बातें कही होंगी, क्योंकि दुनिया के हर देश में मूर्ख लोग होते हैं। मुझे यकीन है कि यहां भी मूर्ख लोग हैं और अमेरिका में भी मूर्ख लोग हैं, जो हर समय बेवकूफी भरी बातें करते रहते हैं।”रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका उन लोगों से मजबूत बना है, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से वहां आए, अमेरिकी बने और देश में योगदान दिया।
माइकल सैवेज की टिप्पणी से जुड़ा विवाद
हालांकि पत्रकार ने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन कई लोगों ने इस सवाल को अमेरिकी रेडियो होस्ट और पॉडकास्टर Michael Savage की हालिया विवादित टिप्पणियों से जोड़कर देखा।माइकल सैवेज ने भारत, चीन और कुछ दूसरे देशों को hellholes यानी नरक-कुंड कहा था। उन्होंने अमेरिका में जन्म लेने वाले गैर-नागरिकों के बच्चों को मिलने वाली ऑटोमैटिक नागरिकता का भी विरोध किया था।
भारतीय और चीनी प्रवासियों पर भी की थी टिप्पणी
माइकल सैवेज ने अपने पत्र में लिखा था-
“यहां पैदा हुआ बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है, और फिर वे अपने पूरे परिवार को चीन, भारत या दुनिया के किसी दूसरे नरक-कुंड से यहां ले आते हैं।”उन्होंने भारतीय और चीनी प्रवासियों को “लैपटॉप वाले गैंगस्टर” तक कह दिया था। साथ ही दावा किया था कि उन्होंने अमेरिकी झंडे का अपमान किया है। इन टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर काफी लोगों ने शेयर किया, जिसके बाद यह मुद्दा और बड़ा बन गया।
Trump और Modi की दोस्ती का भी किया जिक्र
विवाद बढ़ने के बाद मार्को रुबियो ने भारत विरोधी माहौल के आरोपों को कम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump भारत और प्रधानमंत्री Narendra Modi के बड़े प्रशंसक हैं। अगले दिन मीडिया ब्रीफिंग में रुबियो ने कहा-“राष्ट्रपति भारत के बहुत बड़े फैन हैं और प्रधानमंत्री मोदी के भी बड़े प्रशंसक हैं। अगर राष्ट्रपति मुझे यहां नहीं चाहते तो मैं यहां नहीं होता।”
भारत में अमेरिकी राजदूत को लेकर भी दिया बयान
रुबियो ने आगे कहा कि अगर ट्रंप भारत के साथ अच्छे रिश्ते नहीं चाहते, तो वह अपने करीबी सहयोगी सर्जियो गोर को भारत में राजदूत बनाकर नहीं भेजते। उन्होंने कहा कि सर्जियो गोर राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी लोगों में शामिल हैं और यह दिखाता है कि अमेरिका भारत के साथ रिश्तों को कितना अहम मानता है।
“ऑनलाइन लोग कुछ भी बोलते हैं”
एक और मीडिया ब्रीफिंग के दौरान जब पत्रकारों ने इस विवाद पर दोबारा सवाल पूछा, तो रुबियो ने कहा कि इंटरनेट पर लोग हर तरह की बातें करते रहते हैं। उन्होंने कहा-“आज के समय में आप ऑनलाइन जाते हैं और लोग अजीब-अजीब बातें करते हैं। मुझे तो यह भी नहीं पता कि वे असली लोग हैं या नहीं।” रुबियो ने संकेत दिया कि उन्हें लगा था कि पत्रकार सोशल मीडिया पर मौजूद लोगों की टिप्पणियों की बात कर रहा था, न कि किसी आधिकारिक बयान की।
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