Lahore Names: पाक में हिन्दू-सिखों को झटका, कट्टरपंथियों के सामने Maryam का सरेंडर,वापस लिया अपना ही फैसला
Lahore Names: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने फिलहाल लाहौर में पुराने ऐतिहासिक नामों को बहाल करने की अपनी योजना रोक दी है। अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला कट्टरपंथी तत्वों के दबाव की वजह से लिया गया है। इस पहल का मकसद लाहौर की बंटवारे के पहले वाली पहचान को वापस लाना था, जिसके तहत प्राचीन हिंदू, सिख और ब्रिटिश दौर के नामों को फिर से इस्तेमाल में लाने की तैयारी चल रही थी।
क्या है LAHR प्रोजेक्ट?
यह पूरी कवायद Lahore Authority for Heritage Revival (LAHR) नाम के बड़े शहरी संरक्षण अभियान का हिस्सा है। पाकिस्तान के पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने 2025 में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। इस मेगा प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 50 अरब पाकिस्तानी रुपये बताई जा रही है। इसका मकसद सिर्फ नाम बदलना नहीं, बल्कि लाहौर की ऐतिहासिक इमारतों, पुरानी सड़कों, पार्कों और सांस्कृतिक स्थलों को फिर से नया रूप देना है।

नौ जगहों के नाम पहले ही बदले जा चुके थे
पिछले दो महीनों में लाहौर की कम से कम नौ जगहों के नाम आधिकारिक तौर पर उनके पुराने ऐतिहासिक नामों में बदले जा चुके थे। लेकिन अब इस पूरी पहल को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर (रिटायर्ड कैप्टन) मुहम्मद अली एजाज ने पाकिस्तानी अखबार डॉन से कहा- “अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।” उनका यह बयान उन खबरों से अलग था जिनमें कहा जा रहा था कि इस परियोजना को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और मुख्यमंत्री मरियम नवाज का समर्थन हासिल है।
सरकार ने क्यों रोका फैसला?
जब डिप्टी कमिश्नर से पूछा गया कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय से पुराने नाम बहाल करने की मंजूरी मिल चुकी थी, तो उन्होंने फिर दोहराया कि मामला अभी विचाराधीन है और अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नवाज शरीफ निजी तौर पर लाहौर की मूल सांस्कृतिक पहचान को फिर से जिंदा करने के पक्ष में थे। उनका मानना था कि शहर के पुराने नाम और ऐतिहासिक पहचान लाहौर के असली इतिहास को दर्शाते हैं।
सिर्फ साइनबोर्ड नहीं, पूरी विरासत बचाने का था प्लान
LAHR प्रोजेक्ट केवल सड़क या इलाके के नाम बदलने तक सीमित नहीं है। इसके तहत लाहौर की बहु-सांस्कृतिक विरासत से जुड़े धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भी संरक्षण किया जा रहा है।इसमें चर्च, मंदिर, गुरुद्वारे और सिख शासनकाल की कई ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य लाहौर की उस पहचान को सुरक्षित रखना है, जो विभाजन से पहले शहर की खासियत हुआ करती थी।
किन ऐतिहासिक स्थलों पर काम चल रहा है?
वर्तमान में जिन प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है उनमें खड़क सिंह हवेली का पुनर्वास शामिल है। इसके अलावा लाहौर किले में राजकुमारी बाम्बा सदरलैंड की एक ऐतिहासिक पेंटिंग को भी रिस्टोर किया जा रहा है। बादशाही मस्जिद के पास मौजूद कई पुराने गुरुद्वारों के संरक्षण पर भी काम चल रहा है। इन परियोजनाओं को लाहौर के सिख, हिंदू और औपनिवेशिक इतिहास को संरक्षित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इतिहास बनाम राजनीति की बहस तेज
अधिकारियों का कहना है कि LAHR का मुख्य उद्देश्य लाहौर की बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत को बचाना है। लेकिन पुराने नाम बहाल करने की पहल पर लगे ब्रेक ने यह भी दिखा दिया है कि पाकिस्तान में ऐतिहासिक पहचान और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत का मुद्दा कितना संवेदनशील बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पीछे सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि राजनीति और वैचारिक दबाव भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
क्या आगे फिर शुरू हो सकती है यह पहल?
फिलहाल सरकार ने इस योजना पर अंतिम फैसला टाल दिया है, लेकिन लाहौर की विरासत को बचाने वाले प्रोजेक्ट्स जारी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या भविष्य में पंजाब सरकार फिर से पुराने हिंदू-सिख और औपनिवेशिक नामों को बहाल करने का फैसला लेगी या यह योजना राजनीतिक दबाव में हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में चली जाएगी।
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